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Delhi NCR News: सारकोमा के इलाज और पहचान में नई प्रगति पर की चर्चा
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आरजीसीआईआरसी की ओर से रोहिणी में शुरू हुई दो दिवसीय समिट
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली में आयोजित एक मेडिकल समिट में शनिवार को विशेषज्ञों ने दुर्लभ कैंसर सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा की पहचान और इसके इलाज में हुई नई प्रगति को लेकर चर्चा की। यह समिट राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर (आरजीसीआईआरसी) की ओर से रोहिणी में शनिवार को शुरू हुई। इसमें भारत के साथ अमेरिका के एमडी एंडरसन कैंसर सेंटर और दक्षिण कोरिया की सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ भी शामिल हुए।
आरजीसीआईआरसी के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर डॉ. धर्मेंद्र सिंह गंगवार ने कहा कि यह समिट जानकारी के आदान-प्रदान को बढ़ावा देगी और सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा के लिए सबूत-आधारित इलाज के तरीकों को मजबूत करेगी। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में कैंसर की जांच के नए तरीकों, आधुनिक उपचार पद्धतियों और मरीजों के लिए व्यक्तिगत (पर्सनलाइज्ड) इलाज पर चर्चा होगी।
आरजीसीआईआरसी के को-डायरेक्टर (मेडिकल ऑन्कोलॉजी) के चीफ डॉ. उल्लास बत्रा ने कहा कि सारकोमा के मैनेजमेंट में सटीक पैथोलॉजी और मॉलिक्यूलर प्रोफाइलिंग बहुत अहम है। नए डायग्नोस्टिक टूल्स और प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी के तरीकों से वह ट्यूमर को क्लासिफाई करने, इलाज की दिशा तय करने और मरीजों के लिए पर्सनलाइज्ड केयर में मदद करने के लिए बेहतर ढंग से तैयार है। आर्थोपेडिक ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. हिमांशु रोहेला ने कहा कि सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा के लिए सटीक पहचान, स्टेजिंग और तालमेल वाले इलाज की योजना की जरूरत होती है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली में आयोजित एक मेडिकल समिट में शनिवार को विशेषज्ञों ने दुर्लभ कैंसर सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा की पहचान और इसके इलाज में हुई नई प्रगति को लेकर चर्चा की। यह समिट राजीव गांधी कैंसर इंस्टीट्यूट एंड रिसर्च सेंटर (आरजीसीआईआरसी) की ओर से रोहिणी में शनिवार को शुरू हुई। इसमें भारत के साथ अमेरिका के एमडी एंडरसन कैंसर सेंटर और दक्षिण कोरिया की सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ भी शामिल हुए।
आरजीसीआईआरसी के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर डॉ. धर्मेंद्र सिंह गंगवार ने कहा कि यह समिट जानकारी के आदान-प्रदान को बढ़ावा देगी और सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा के लिए सबूत-आधारित इलाज के तरीकों को मजबूत करेगी। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में कैंसर की जांच के नए तरीकों, आधुनिक उपचार पद्धतियों और मरीजों के लिए व्यक्तिगत (पर्सनलाइज्ड) इलाज पर चर्चा होगी।
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आरजीसीआईआरसी के को-डायरेक्टर (मेडिकल ऑन्कोलॉजी) के चीफ डॉ. उल्लास बत्रा ने कहा कि सारकोमा के मैनेजमेंट में सटीक पैथोलॉजी और मॉलिक्यूलर प्रोफाइलिंग बहुत अहम है। नए डायग्नोस्टिक टूल्स और प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी के तरीकों से वह ट्यूमर को क्लासिफाई करने, इलाज की दिशा तय करने और मरीजों के लिए पर्सनलाइज्ड केयर में मदद करने के लिए बेहतर ढंग से तैयार है। आर्थोपेडिक ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. हिमांशु रोहेला ने कहा कि सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा के लिए सटीक पहचान, स्टेजिंग और तालमेल वाले इलाज की योजना की जरूरत होती है।
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