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दिल्ली में एसआईआर की कतार: कागज का पेट भरने में किसी की छूटी दिहाड़ी, कोई बच्चों को छोड़ घंटों लाइन में

Wed, 23 Sep 2026 03:43 AM IST
दुष्यंत शर्मा ज्योति सिंह/प्रवीण कुमार, दिल्ली
ज्योति सिंह/प्रवीण कुमार, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 23 Sep 2026 03:43 AM IST
सार

मिनटों में पूरा होने वाला काम कई-कई घंटे ले रहा है। कई लोग दो-दो दिन से केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं।

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Queue for SIRs in Delhi: Some lost a day's wages to complete the paperwork
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अपनी पहचान और पुराने रिकॉर्ड को दुरुस्त कराने के लिए दिल्ली के एसआईआर केंद्रों पर लोगों को घंटों कतार में खड़ा होना पड़ रहा है। किसी के नाम के आगे मृत दर्ज है, तो किसी के पिता के नाम में गड़बड़ी है। किसी का नाम सूची से गायब है, तो कोई पुराने रिकॉर्ड से अपना और परिवार का नाम जोड़ने के लिए दस्तावेजों का पुलिंदा लेकर पहुंच रहा है। मिनटों में पूरा होने वाला काम कई-कई घंटे ले रहा है। कई लोग दो-दो दिन से केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं।

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इस प्रक्रिया का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ रहा है, जो रोज कमाकर परिवार चलाते हैं। किसी की कई दिन की दिहाड़ी छूट रही है, तो कोई नौकरी से छुट्टी लेकर सुबह से शाम तक कतार में खड़ा है। मोती नगर के एक एसआईआर केंद्र पर मंगलवार दोपहर बाद भी लंबी कतार लगी रही। कोई गोद में डेढ़ साल की बच्ची लेकर खड़ा था, तो कोई बीमार बेटी को घर पर छोड़कर अपनी बारी का इंतजार कर रहा था।
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लोगों ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों के लंच के नाम पर भी लंबे समय तक काम प्रभावित होता है। एक महिला ने परेशान होकर केंद्र पर वीआईपी एंट्री होने का आरोप लगाया और बीएलओ से बहस भी की। हालांकि, केंद्र पर काम में देरी की वजह को लेकर अलग-अलग लोगों की अलग-अलग शिकायतें थीं।
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रणजीत नगर बूथ पर अपनी मां के नाम में गड़बड़ी ठीक कराने पहुंचीं नाजिया निजी कंपनी में काम करती हैं। उन्होंने दफ्तर से आधे दिन की छुट्टी ली थी। वह सुबह 11 बजे केंद्र पहुंचीं और दोपहर दो बजे तक कतार में खड़ी रहीं। इस दौरान उनकी बारी नहीं आई और उन्हें यह भी स्पष्ट नहीं हो सका कि अभी कितना और इंतजार करना पड़ेगा। एसआईआर केंद्रों पर आने वाले लोगों का कहना है कि कई बीएलओ स्कूल की ड्यूटी पूरी करने के बाद दोपहर में पहुंचते हैं।

उनके आने के बाद ही संबंधित काम शुरू हो पाता है। इसके बाद लंच का समय होने से प्रक्रिया में और देरी हो जाती है। मतदाताओं का कहना है कि बीएलओ पर अतिरिक्त काम का दबाव अपनी जगह है, लेकिन उन्हें भी दफ्तर से छुट्टी लेकर या रोज का काम छोड़कर केंद्रों पर आना पड़ रहा है। ऐसे में प्रक्रिया लंबी होने से उनकी परेशानी बढ़ रही है।

स्कूल में पढ़ाएं या एसआईआर का काम निपटाएं, दोहरी जिम्मेदारी में उलझीं बीएलओ
एसआईआर की प्रक्रिया में मतदाताओं के साथ बीएलओ भी अतिरिक्त जिम्मेदारी के दबाव में हैं। कई बीएलओ सरकारी स्कूलों में शिक्षिका हैं। सुबह स्कूल में बच्चों को पढ़ाने और स्कूल से जुड़ा काम पूरा करने के बाद उन्हें बूथ कैंप पहुंचकर एसआईआर का काम निपटाना पड़ रहा है। इसके बाद घर और परिवार की जिम्मेदारी भी रहती है। एक शिक्षिका बीएलओ ने बताया कि दिन का ज्यादातर हिस्सा इसी भागदौड़ में निकल रहा है। परीक्षा नजदीक होने के बावजूद वह रात में अगले दिन की पढ़ाई की तैयारी नहीं कर पा रही हैं। बीएलओ की यह दोहरी जिम्मेदारी और केंद्रों पर उमड़ रही भीड़ के बीच मतदाताओं का इंतजार बढ़ रहा है। एक तरफ रिकॉर्ड में छोटी-छोटी गड़बड़ियां दूर कराने के लिए लोगों को कई दस्तावेज जुटाने पड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्हें अपनी बारी के लिए लंबा समय देना पड़ रहा है। इसका सीधा असर उनकी नौकरी और रोज की कमाई पर पड़ रहा है।

लोगों की परेशानी, उन्हीं की जुबानी...
तीन साल की बेटी बीमार है, उसे घर छोड़कर आई हूं
अपनी डेढ़ साल की बेटी को गोद में लेकर सुबह से कतार में खड़ी हूं। दूसरी तीन साल की बेटी बीमार है, जिसे घर पर छोड़कर आई हूं। मेरे और मेरे ससुर के नाम में गड़बड़ी है। सुबह 11 बजे से यहां खड़ी हूं। अब शाम के पांच बज चुके हैं। बच्ची को गोद में लेकर कब तक इंतजार करूं, समझ नहीं आ रहा।
-कंचन, मोती नगर

आज काम नहीं हुआ तो कल भी छुट्टी लेनी पड़ेगी
पत्नी और दो छोटे बच्चों के साथ सुबह से सेंटर पर अपनी बारी का इंतजार कर रहा हूं। दफ्तर से छुट्टी लेकर आया हूं। अगर आज काम नहीं हुआ तो कल भी छुट्टी लेनी पड़ेगी। निजी कंपनी का कोई भरोसा नहीं है। नौकरी से निकाल दिया तो परिवार कैसे चलेगा।”
-दीपक, कीर्ति नगर

पांच दिन से लगा रहे चक्कर, रोज की 400 रुपये दिहाड़ी छूटी
मैं कूलर-पंखे का काम करता हूं और रोज करीब 400 रुपये की दिहाड़ी मिलती है। पांच दिन से यहां चक्कर काट रहा हूं। मेरे नाम में गड़बड़ी है। अभी तक कोई साफ नहीं बता रहा कि समस्या कैसे दूर होगी और कितना इंतजार करना पड़ेगा।
-सुरेश पंडित, बसई दारापुर, मोती नगर

सात घंटे लगे, ऊपर से 800 रुपये की दिहाड़ी गई
सुबह नौ बजे काम छोड़कर सेंटर पहुंचा हूं। मेरे दस्तावेज में कोई दिक्कत नहीं थी, लेकिन नोटिस आया था। उसे लेकर अपनी बात और दस्तावेज देने आया था। पूरी प्रक्रिया में करीब सात घंटे लग गए। आज की 800 रुपये की दिहाड़ी भी चली गई।
-सुखनंदन, कीर्ति नगर

35 साल से दिल्ली में, फिर भी पुराने रिकॉर्ड ने अटका दिया नाम
मैं करीब 35 साल से दिल्ली में रह रही हूं। मेरे पति का नाम दस्तावेज में अमीर हसन हो गया था, जबकि सही नाम जमीर हसन है। गलती ठीक कराने के बाद भी 2002 की एसआईआर सूची में नाम नहीं मिलने के कारण परेशानी बनी हुई है। छोटे बेटे के पास बारहवीं का दस्तावेज था, इसलिए उसका नाम जुड़ गया। बड़ा बेटा नौवीं तक पढ़ा है, इसलिए उसका नाम नहीं जुड़ पा रहा। मेरा, पति और बड़े बेटे का नाम जुड़वाने के लिए गांव से राशन कार्ड मंगाया है।”
-फातिमा, रणजीत नगर

एक नाम का फर्क, और नोटिस लेकर पहुंचना पड़ा
मेरे पिता का नाम 2002 की एसआईआर सूची में मो. आबिद खान दर्ज है, जबकि दस्तावेजों में मो. आबिद है। इसी अंतर के कारण हमें नोटिस मिला। नाम में अंतर ठीक कराने के बाद अखबार में भी सूचना दी। अब सभी दस्तावेज लेकर यहां जमा कराने आया हूं।
-मो. आदिल खान, रणजीत नगर

ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम नहीं तो 30 तक फॉर्म-6 के जरिये करें दावा

दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर-2026) के तहत जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम नहीं होने वाले पात्र नागरिक 30 सितंबर तक फॉर्म-6 के जरिए अपना दावा कर सकते हैं। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि किसी मतदाता को नोटिस जारी होने का मतलब उसका नाम मतदाता सूची से हटना नहीं है। संबंधित मतदाता को जवाब देने, जरूरी दस्तावेज जमा करने और अपील करने का पूरा अवसर मिलेगा। अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी।

दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची 31 अगस्त को जारी की गई थी। मतदाता इसे सीईओ की वेबसाइट, संबंधित निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) और सहायक निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (एईआरओ) के कार्यालयों तथा मतदान केंद्रों पर देख सकते हैं। निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर भी नाम की ऑनलाइन जांच की जा सकती है।

एसआईआर के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) ने राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंटों के साथ सत्यापन कर अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत और दोहरे (एएसडीडी) मतदाताओं की सूची तैयार की है। यह सूची सीईओ की वेबसाइट पर उपलब्ध है। पिछली एसआईआर सूची से लिंक स्थापित नहीं होने या रिकॉर्ड में तार्किक विसंगति मिलने पर संबंधित मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं।

नोटिस पाने वाले मतदाता ईआरओ या एईआरओ के समक्ष अपना जवाब और आवश्यक दस्तावेज जमा कर सकते हैं। सीईओ कार्यालय के अनुसार, उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी मतदाता का नाम सूची से नहीं हटाया जाएगा। नोटिसों का निस्तारण 29 अक्तूबर तक किया जाएगा।

ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं मिलने पर पात्र नागरिकों के लिए 30 सितंबर तक फॉर्म-6 के माध्यम से दावा दाखिल करने का मौका है। इसके बाद दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया के आधार पर अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी।

27 सितंबर को विशेष शिविर
सभी मतदान केंद्रों पर सुबह 10 से शाम 5 बजे तक शिविर लगेंगे। वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और विशेष सहायता की जरूरत वाले नागरिकों को बीएलओ मदद करेंगे।

बेघर और ट्रांसजेंडर नागरिकों के लिए कैंप
23 और 24 सितंबर को शाम 5 से रात 9 बजे तक रैन बसेरों और बेघर नागरिकों के अन्य क्षेत्रों में विशेष शिविर लगाए जाएंगे। दावे-आपत्तियों के निस्तारण के लिए सभी विधानसभा क्षेत्रों में अतिरिक्त एईआरओ भी तैनात किए जाएंगे।

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