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Delhi : बढ़ रहे हैं डिजिटल अरेस्ट के मामले, साइबर एक्सर्टोशन के लिए नए कानूनों में भी कोई प्रावधान नहीं

Mon, 08 Jul 2024 05:43 AM IST
दुष्यंत शर्मा पुरुषोत्तम वर्मा, नई दिल्ली
पुरुषोत्तम वर्मा, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 08 Jul 2024 05:43 AM IST
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सार
इसे साइबर एक्सर्टोशन कहते हैं। इसमें पीड़ित को एक कमरे में कई घंटों तक बंद रखा जाता है। पीड़ित को उसकी मर्जी से कुछ नहीं करने दिया जाता। इसे ही डिजिटल अरेस्ट कहते हैं।
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Digital arrest cases are increasing, there is no provision even in the new laws
इसे साइबर एक्सर्टोशन कहते हैं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

डिजिटल अरेस्ट शब्द आजकल बहुत सुनने को मिलने लगा है। इसे साइबर एक्सर्टोशन कहते हैं। इसमें पीड़ित को एक कमरे में कई घंटों तक बंद रखा जाता है। पीड़ित को उसकी मर्जी से कुछ नहीं करने दिया जाता। इसे ही डिजिटल अरेस्ट कहते हैं। तेजी से बढ़ रहे इस साइबर एक्सर्टोशन के लिए नए कानूनों में कार्रवाई का कोई प्रावधान नहीं है। आईपीसी के कानूनों में भी डिजिटल अरेस्ट के लिए कोई कानून नहीं था।



दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल की आईएफएसओ के पुलिस उपायुक्त डॉ. हेमंत तिवारी ने दिल्ली पुलिस के पॉडकास्ट में रविवार को बताया कि इन दिनों डिजिटल अरेस्टिंग के मामले बहुत बढ़ते जा रहे हैं। डाॅ. तिवारी ने एक केस का हवाला देते हुए बताया कि एक काफी प्रतिष्ठित परिवार की बुजुर्ग महिला हैं। उनके पास एक दिन आईवीआर से कॉल आई। 

उन्हें बताया गया कि उनका कस्टम ने एक पार्सल पकड़ा है। ये पार्सल उनके आधार नंबर से बुक किया गया है। आरोपियों ने उन्हें पार्सल की एक फोटो भेजी। इसके बाद आरोपियों ने पीड़िता को स्काइप कॉलिंग पर ले लिया और उनको बोला कि पार्सल में काफी संख्या में पासपोर्ट, सिम हैं। ये मामला आतंकवाद से जुड़ा लग रहा है। वह मुंबई पुलिस में शिकायत कर दें। इसके  बाद सीबीआई अधिकारी उनसे पूछताछ करेंगे। सीबीआई अधिकारी वीडियो कॉल पर बात करता है। उसके बैक ग्राउंड में सीबीआई का लोगो आदि दिखता है। वर्दी दिखाई देती है। इससे पीड़ित को लगता है कि आरोपी सीबीआई ऑफिस से ही है।

इस दौरान वह पता कर लेते हैं कि महिला के बच्चे अमेरिका में हैं। आरोपी कहते हैं कि वह पार्सल के बारे में अमेरिकी सरकार को बता देंगे। इससे उनके बच्चों की नौकरी चली जाएगी। इसके बाद वह पीड़ित से कहते हैं कि उन्हें डिजिटल अरेस्ट कर लिया गया है। इसके बाद ये सीनियर अधिकारी से महिला की बात कराते हैं। सीनियर अधिकारी महिला की सहानुभूति जीतता है। वह अपने जूनियर से कहता है कि पहले भी इसका केस आया था। उसमें पीड़ित के आधार नंबर का दुरुपयोग किया गया था। फिर इन्होंने महिला से बोला वह अपनी नकदी व शेयर आदि भारत सरकार के बैंक खाते में जमा करा दें।

एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को ऑफिस में किया डिजिटल अरेस्ट
एलएनटी विभाग में काम करने वाली एग्जीक्यूटिव महिला को उसके कार्यालय में ही करीब तीन से चार घंटे डिजिटल अरेस्ट करके रखा। इस पीड़ित महिला के साथ ही ऐसे ही साइबर एक्सर्टोसन करने की कोशिश की गई। इनको ऑफिस के ही एक कोने में  डिजिटल अरेस्ट करके रखा गया। पीड़ित महिला बहुत ज्यादा डर गई थी। हाथ कांपने की वजह से वह पिनकोड ठीक से नहीं डाल पाई और पैसे ट्रांसफर नहीं हुए। इस दौरान महिला ने पुलिस में उनके एक मित्र को यह बात बताई। पुलिस अफसर ने बताया कि उनके साथ साइबर ठगी की जा रही है। जब जाकर महिला ठगी का शिकार होने से बच गई।

112 नंबर पर कॉल करें
पुलिस उपायुक्त डाॅ. हेमंंत तिवारी ने बताया कि अगर आपसे कोई साइबर एक्सर्टोशन की कोशिका करता है या फिर डिजिटल अरेस्ट कर लेता है तो तुरंत एमरजेंसी नंबर 112 पर कॉल करें। ये पूरे देश का एमरजेंसी नंबर है। उन्होंने कहा कि वह जालसाजों से डरे नहीं । अगर डरेंगे नहीं तो वह ठगी का शिकार नहीं होंगे।

क्या होता है डिजिटल अरेस्ट

  • घर के एक कमरे व शांत जगह पर बंधक बनाकर रखते हैं
  • आरोपी पीड़ित को फोन काटने नहीं देते
  • फोन को चार्जिंग पाइंट में लगवाते हैं
  • इस दौरान पीड़ित अगर सोता है तो उसे वीडियो कॉल जारी रखकर सोने की बात कहते हैं
  • इस दौरान एक ही कमरे में रहने के साथ ही किसी को कुछ न बताने की धमकी देते हैं

नए कानूनों में भी कोई प्रावधान नहीं है : डाॅ. हेमंत 
स्पेशल सेल के आईएफएसओ के पुलिस उपायुक्त डाॅ. हेमंत तिवारी ने बताया कि गिरफ्तार व्यक्ति को फिजिकल रूप से गिरफ्तार किया जाता है। मगर वर्चुअल अरेस्टिंग कुछ नहीं होता है। उन्होंने बताया कि डिजिटल अरेस्टिंग के लिए नए कानूनों में भी कोई प्रावधान नहीं है। पुराने कानूनों में भी कोई प्रावधान नहीं था। वहीं साइबर एक्सर्टोसन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। सरकार कभी ऐसे फोन कर पैसे जमा नहीं कराती।
 

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