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बिना एफआईआर के किसी को हिरासत में रखना मौलिक अधिकार का उल्लंघन : कोर्ट
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द्वारका कोर्ट ने पुलिस आयुक्त को अवैध हिरासत मामले में जांच रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया
नई दिल्ली। द्वारका कोर्ट ने पुलिस आयुक्त को एक आरोपी की कथित अवैध हिरासत रखने के मामले में जांच रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि बिना एफआईआर के किसी को हिरासत में रखना जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।
विशेष न्यायाधीश मनु गोयल खरब आरोपी कृष्णा की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उत्तम नगर पुलिस थाने के अधिकारियों ने आरोपी को गिरफ्तार किया था। अदालत ने कहा कि पुलिस अधिकारियों की ओर से दाखिल जवाब के अनुसार आरोपी कृष्णा को आठ जुलाई को प्रारंभिक जांच के बाद जाने दिया गया था। हालांकि, सीसीटीवी फुटेज के अनुसार आरोपी को सात जुलाई रात लगभग 12:50 बजे उसके घर से ले जाया गया।
अदालत ने जांच अधिकारी (आईओ) और आतंकवाद निरोधक अधिकारी (एटीओ या इंस्पेक्टर लॉ एंड ऑर्डर) से पूछा कि अगर आरोपी को आधी रात को उसके घर से ले जाने का मकसद सिर्फ शुरुआती जांच करना था तो उसे इतनी जल्दी क्यों उठा लिया गया जिसका उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। अदालत ने कहा कि जब दोनों पुलिस अधिकारियों को संबंधित फुटेज दिखाने का आदेश दिया गया जिसमें दिखाया गया था कि प्रारंभिक पूछताछ के बाद कृष्णा को थाने से रिहा कर दिया गया था तो वे चुप रहे। अदालत ने कहा कि चुप्पी से आरोपी के वकील के इस कथन की पुष्टि होती है कि उनके मुवक्किल को सात जुलाई देर रात को उसके घर से ले जाया गया था और तीन दिन बाद 10 जुलाई को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया था। अदालत ने कहा कि स्पष्ट रूप से कृष्णा को उत्तम नगर पुलिस स्टेशन के पुलिस अधिकारियों की ओर से एफआईआर दर्ज होने से पहले ही अवैध रूप से हिरासत में लिया गया था जो अनुचित कारावास और आवेदक की स्वतंत्रता से अवैध रूप से वंचित करने के समान है।
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नई दिल्ली। द्वारका कोर्ट ने पुलिस आयुक्त को एक आरोपी की कथित अवैध हिरासत रखने के मामले में जांच रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि बिना एफआईआर के किसी को हिरासत में रखना जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।
विशेष न्यायाधीश मनु गोयल खरब आरोपी कृष्णा की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उत्तम नगर पुलिस थाने के अधिकारियों ने आरोपी को गिरफ्तार किया था। अदालत ने कहा कि पुलिस अधिकारियों की ओर से दाखिल जवाब के अनुसार आरोपी कृष्णा को आठ जुलाई को प्रारंभिक जांच के बाद जाने दिया गया था। हालांकि, सीसीटीवी फुटेज के अनुसार आरोपी को सात जुलाई रात लगभग 12:50 बजे उसके घर से ले जाया गया।
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अदालत ने जांच अधिकारी (आईओ) और आतंकवाद निरोधक अधिकारी (एटीओ या इंस्पेक्टर लॉ एंड ऑर्डर) से पूछा कि अगर आरोपी को आधी रात को उसके घर से ले जाने का मकसद सिर्फ शुरुआती जांच करना था तो उसे इतनी जल्दी क्यों उठा लिया गया जिसका उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। अदालत ने कहा कि जब दोनों पुलिस अधिकारियों को संबंधित फुटेज दिखाने का आदेश दिया गया जिसमें दिखाया गया था कि प्रारंभिक पूछताछ के बाद कृष्णा को थाने से रिहा कर दिया गया था तो वे चुप रहे। अदालत ने कहा कि चुप्पी से आरोपी के वकील के इस कथन की पुष्टि होती है कि उनके मुवक्किल को सात जुलाई देर रात को उसके घर से ले जाया गया था और तीन दिन बाद 10 जुलाई को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया था। अदालत ने कहा कि स्पष्ट रूप से कृष्णा को उत्तम नगर पुलिस स्टेशन के पुलिस अधिकारियों की ओर से एफआईआर दर्ज होने से पहले ही अवैध रूप से हिरासत में लिया गया था जो अनुचित कारावास और आवेदक की स्वतंत्रता से अवैध रूप से वंचित करने के समान है।
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