नोटबंदी के बाद दिल्ली समेत देशभर के लोग जहां बैंक की कतार में खड़े है। वहीं राजधानी पॉश महारानी बाग से सटे किलोकरी गांव के निवासी 59 साल के नंदकिशोर शर्मा की मानें तो वह अभी तक एक बार भी बैंक नहीं गए हैं।
पूछने पर पता चला कि उनका मोबाइल ही उनका बैंक बन गया है। किलोकरी गांव में यह आदत लगभग सभी लोगों ने डाल दी है। यहां का निवासी हो या फिर दुकानदार या फिर किरायेदार। नोटबंदी के बाद यहां के लगभग सभी लोगों ने कैशलेस लेनदेेन शुरू कर दिया है। इलाके में 80 फीसदी लेनदेन कैशलेस हो रहा है।
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- फोटो : विवेक निगम/अमर उजाला
नंद किशोर शर्मा ने बताया कि नोटबंदी के बाद पहली बार उन्होंने अपने मोबाइल में ई-वैलेट्स पेटीएम का प्रयोग शुरू किया। आज वह बेहद खुश है क्योंकि इसे अपनाने के बाद उन्हें बैंक नहीं जाना पड़ा। उनके मुताबिक इस गांव में कैशलेस आदत की शुरुआत 20 नवंबर को पहली बार जब राजस्व विभाग के डीएम ऑफिस की ओर से यहां कैंप लगाया गया। कैैंप में बैंक अकाउंट खुलवाने और कैशलेस लेनदेन के विकल्पों के बारे में बताया गया।
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- फोटो : विवेक निगम/अमर उजाला
उसके बाद से ही डीएम ऑफिस गांववालों की रुचि को देखते हुए इस कैशलेस बनाने की मुहिम में जुट गया। उसके बाद यहां ई-वैलेट्स पेटीएम, एसबीआई बडी, ऑक्सीजेन जैसी कंपनियों की टीमों ने गांव में बाकायदा कैंप लगाया।
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उसका परिणाम यह हुआ की गांव में चाय की दुकान चलाने वाले गौरव ने बताया कि यहां बड़ी संख्या में स्टूडेंट किराये पर रहते हैं। ई-वैलेट्स नहीं होता तो मेरा धंधा ही खत्म हो जाता है।