फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   demonetization disturbs economy of banks, they need 4500 crore rupees but gets only 976 crores

नोटबंदी से बिगड़ा बैंकों का अर्थशास्त्रः जरूरत है 4500 करोड़, मिल रहे हैं सिर्फ 976 करोड़

Sat, 19 Nov 2016 12:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम
ब्यूरो/अमर उजाला, गुरुग्राम Updated Sat, 19 Nov 2016 12:07 AM IST
विज्ञापन
demonetization disturbs economy of banks, they need 4500 crore rupees but gets only 976 crores
note - फोटो : अमर उजाला

500 और 1000 रुपये की नोटबंदी से बैंकों का अर्थशास्त्र बिगड़ गया है। जिले के 715 बैंक शाखाओं को मांग के बदले केवल 22 फीसदी रकम मिल रही है। करेंसी चेस्ट वाले बैंकों को मांग के बदले 40 फीसदी रकम दी जा रही है। जिससे आम लोगों के साथ बैंक के आला अधिकारी भी परेशान हैं और लगातार आपूर्ति बढ़ाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से मांग कर रहे हैं।

विज्ञापन


साइबर सिटी में 44 राष्ट्रीय और निजी बैंकों की 715 शाखाएं हैं। इन बैंकों की रोजाना की जरूरत 4500 करोड़ रुपये है, लेकिन इन्हें केवल 976 करोड़ रुपये की आपूर्ति हो रही है।
विज्ञापन


इन बैंकों में छह बैंक एचडीएफसी बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स, पंजाब नेशनल बैंक, कॉरपोरेशन बैंक और सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक के करेंसी चेस्ट गुरुग्राम में हैं, लेकिन उनके पास भी नए नोटों की मांग और आपूर्ति मेें भारी कमी है। 6 बैंकों के 239 शाखाओं के लिए 1248 करोड़ रुपये की मांग है। इसके बदले 500 करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

demonetization disturbs economy of banks, they need 4500 crore rupees but gets only 976 crores

नए नोट की आपूर्ति की कमी के कारण सर्व हरियाणा ग्रामीण बैंक की हालत सबसे अधिक खराब हो गई है। जिले के 56 शाखाओं के लिए एक भी पैसा नहीं है। अदला-बदली और लेनदेन का कारोबार प्रभावित हो रहा है।

इसी तरह कॉरपोरेशन बैंक को हर दिन 10 करोड़ रुपये की जरूरत है, लेकिन इन्हें ढाई से तीन करोड़ की आपूर्ति हो रही है। बृहस्पतिवार तक की रिपोर्ट के मुताबिक एचडीएफसी के करेंसी चेस्ट में 2000 करोड़ रुपये की क्षमता है, लेकिन अब वहां भी 500 करोड़ की कमी है।

जिला अग्रणी बैंक के मैनेजर आरसी नायक कहते हैं बैंकों में मांग की अनुसार नए नोट की आपूर्ति में कमी है। इसके लिए लगातार बैंकों के संपर्क में हैं और आरबीआई से बातचीत जारी है।

5000 करोड़ रुपये की हो चुकी है खपत
नोटबंदी के बाद बैंकों और एटीएम के जरिये अब तक 5000 करोड़ रुपये की खपत हो चुकी है। इनमें 2000 और 100 के नए नोट हैं। छह करेंसी चेस्ट वाले बैंकों की 239 शाखाओं के जरिये 657.36 करोड़ बैंकों के काउंटर और एटीएम के जरिये बांट दिया गया है। जबकि बाकी अन्य 476 शाखाओं के जरिये नए नोट लोगों को दिए गए हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed