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दिल्ली की प्रदूषित हवा से सिगरेट नहीं पीने वालों को भी हो सकता है कैंसर: रिपोर्ट

Tue, 13 Aug 2019 10:47 AM IST
Prachi Priyam न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Prachi Priyam Updated Tue, 13 Aug 2019 10:47 AM IST
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Delhis polluted air can cause lung cancer to both smokers and non smokers says report 
Lung Cancer

दिल्ली के सर गंगाराम अस्पताल के डॉक्टरों ने यहां की प्रदूषित हवा के कारण फेफड़ों में होने वाली गंभीर बिमारियों से संबंधित बड़ा खुलासा किया है। अस्पताल के सेंटर फॉर चेस्ट सर्जरी और लंग केयर फाउंडेशन की रिपोर्ट में पता चला है कि यहां सिगरेट नहीं पीने वाले लोगों में भी फेफड़े के कैंसर की बिमारी का खतरा उतना ही है जितना सिगरेट पीने वालों में है। 

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डॉक्टरों ने यह रिपोर्ट पिछले 30 साल में की गई लंग कैंसर के ऑपरेशनों के आधार पर तैयार की है। रिपोर्ट में पता चला कि 1988 में लंग कैंसर से पीड़ित हर 10 व्यक्ति में से 9 सिगरेट पीते थे। जबकि 2018 में यह आंकड़ा और भी भयभीत करने वाला था। 2018 में लंग कैंसर के 10 मामलों में से पांच सिगरेट पीने वालों के थे और पांच नॉन-स्मोकर्स के। 
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इसके सात ही रिपोर्ट में यह भी पता चला कि लंग कैंसर का इलाज करवाने आए 50 वर्ष से कम की आयु वाले 70 प्रतिशत मरीज नॉन-स्मोकर्स थे। 30 वर्ष से कम उम्र वाले कोई भी लंग कैंसर के मरीज सिगरेट नहीं पीते थे। रिपोर्ट को तैयार करने दौरान सिगरेट की लत छोड़ चुके लोगों को भी स्मोकर्स की श्रेणी में ही रखा गया था।
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दरअसल, सिगरेट नहीं पीने वाले युवाओं के बीच बढ़ते लंग कैंसर के मामलों को देखते हुए इस पर शोध किया गया। रिपोर्ट में यह भी पता चला है कि पहले के मुकाबले महिलाओं में भी फेफड़े के कैंसर को लेकर बढ़ोत्तरी देखी गई है। 

विशेषज्ञों ने बताया कि ज्यादातर मामलों में जांच के दौरान कैंसर का पता नहीं लग पाता है, इसलिए कई डॉक्टर्स बिमारी को ट्यूबरक्युलोसिस(टीबी) समझ कर लंबे समय तक उसी आधार पर उसका इलाज करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार दिल्ली की वायु गुणवत्ता का त्वरित असर तो नहीं दिखता,  लेकिन यह हमारे शरीर को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है और फेफड़ों के कैंसर जैसी घातक बिमारियों को अंजाम देता है।

क्या है लंग कैंसर-

शरीर में मौजूद करोड़ों कोशिकाएं अपनी उम्र पुरी होने के बाद खुद ही नष्ट हो जाती हैं, जिन्हें हम डेड सेल्स कहते हैं। शरीर के किसी भी हिस्से की कोशिकाओं की स्वत: खत्म होने की क्षमता अगर नष्ट हो जाती है, तो वो खत्म होने की बजाय दो से चार, चार से आठ के हिसाब से बढ़ने लगती हैं। शरीर के जिस अंग की कोशिकाओं में ये दिक्कत आने लगती है, उसी अंग को कैंसर की उत्पत्ति की जगह माना जाता है। जब यह दिक्कत फेफड़ों में होती है तो इसे लंग कैंसर कहते हैं।

लंग कैंसर के लक्षण-

  • अगर तीन हफ्तों से आपकी खांसी ठीक नहीं हो रही है।
  • बलगम में खून आ रहा हो।
  • सीढ़ियां चढ़ने उतरने में सांस फूलने लगती है।
  • सीने में दर्द की शिकायत रहती हो।
  • या फिर सब कुछ ठीक होने के बाद भी वजन लगातार घट रहा है।
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