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Monitoring System: डिजिटल रिंग से की जाएगी दिल्ली की निगरानी, अब हर एंट्री पॉइंट पर होगी रियल-टाइम ट्रैकिंग

Sun, 19 Apr 2026 03:12 AM IST
दुष्यंत शर्मा धनंजय मिश्रा, नई दिल्ली
धनंजय मिश्रा, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 19 Apr 2026 03:12 AM IST
सार

भारतीय राजमार्ग प्रबंधन कंपनी लिमिटेड (आईएचएमसीएल) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के प्रमुख एंट्री पॉइंट्स पर व्हीकल मॉनिटरिंग, एनफोर्समेंट एंड कलेक्शन सिस्टम (वीएमईसीएस) लागू करने करने जा रही है। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

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Delhi will be monitored through a digital ring, with real-time tracking at every entry point.
CCTV कैमरा - फोटो : AI जनरेटेड

विस्तार

राजधानी दिल्ली में आने-जाने वाले वाहनों की निगरानी व्यवस्था अब पूरी तरह बदलने जा रही है। भारतीय राजमार्ग प्रबंधन कंपनी लिमिटेड (आईएचएमसीएल) ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के प्रमुख एंट्री पॉइंट्स पर व्हीकल मॉनिटरिंग, एनफोर्समेंट एंड कलेक्शन सिस्टम (वीएमईसीएस) लागू करने करने जा रही है। इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई। इस सिस्टम के लागू होने के बाद दिल्ली के चारों ओर एक तरह का डिजिटल रिंग बन जाएगा, जहां हर वाहन की रियल-टाइम ट्रैकिंग संभव होगी और नियम उल्लंघन की स्थिति में अपने-आप चालान जारी होगा।

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नई व्यवस्था खास तौर पर ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे से दिल्ली में प्रवेश करने वाले मार्गों पर लागू की जाएगी, जहां मौजूदा समय में भारी संख्या में वाहन बिना किसी केंद्रीकृत निगरानी के प्रवेश करते हैं। यह परियोजना मौजूदा मार्गों पर हाईटेक निगरानी व्यवस्था स्थापित करने की है। जिन सड़कों पर अभी तक सामान्य यातायात व्यवस्था संचालित थी, वहीं अब डिजिटल निगरानी का एकीकृत ढांचा विकसित किया जाएगा।
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राजधानी की सीमाओं पर सड़कें और एक्सप्रेसवे तो वर्षों से संचालित हैं, लेकिन निगरानी व्यवस्था बिखरी हुई थी। कुछ स्थानों पर टोल प्लाजा और फास्टैग आधारित वसूली व्यवस्था मौजूद है, जबकि ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन पर चालान मुख्य रूप से स्थानीय कैमरों या ट्रैफिक पुलिस के माध्यम से किया जाता रहा है। यह सिस्टम अलग-अलग एजेंसियों के तहत काम करता है और इसमें रियल-टाइम एकीकृत डाटा या नेटवर्क आधारित ट्रैकिंग की कमी रही है।
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नई प्रणाली के तहत पहली बार इन सभी एंट्री पॉइंट्स को एक एकीकृत डिजिटल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। वीएमईसीएस में ऑटोमेटिक नंबर प्लेट पहचान, हाई-रेजोल्यूशन कैमरे और एक केंद्रीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर शामिल होगा। यह सिस्टम मल्टी-लेन फ्री-फ्लो तकनीक पर आधारित होगा, यानी वाहनों को कहीं रुकना नहीं पड़ेगा। जैसे ही कोई वाहन एंट्री पॉइंट से गुजरेगा, उसकी पहचान अपने-आप हो जाएगी और अगर कोई नियम उल्लंघन पाया जाता है, तो सिस्टम स्वतः चालान जारी कर देगा।

इसलिए अहम हैं ईस्टर्न और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे
ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (ईपीई) और वेस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे (डब्ल्यूपीई) दिल्ली के चारों ओर एक बाहरी रिंग की तरह काम करते हैं। इनका मकसद राजधानी के भीतर आने वाले भारी ट्रैफिक को डायवर्ट करना है। ईपीई मुख्यतः उत्तर प्रदेश की ओर से आने वाले ट्रैफिक जैसे गाजियाबाद, नोएडा, मेरठ और पूर्वी यूपी को संभालता है, जबकि डब्ल्यूपीई हरियाणा और पश्चिमी राज्यों जैसे सोनीपत, बहादुरगढ़, रोहतक, गुरुग्राम और आगे राजस्थान से आने वाले वाहनों का दबाव लेता है।

इन दोनों कॉरिडोर पर रोजाना लाखों की संख्या में वाहन गुजरते हैं, जिनमें बड़ी संख्या भारी मालवाहक ट्रकों की होती है, जो पहले दिल्ली के भीतर से होकर गुजरते थे। इन एक्सप्रेसवे के कारण राजधानी के अंदर ट्रैफिक और प्रदूषण का दबाव कम करने में मदद मिली है, लेकिन इनके दिल्ली एंट्री पॉइंट्स पर अभी तक एकीकृत डिजिटल निगरानी व्यवस्था नहीं थी, जिसे अब वीएमईसीएस के जरिए लागू किया जा रहा है।

नई व्यवस्था से मिलेंगे कई फायदे

  • डाटा आधारित फैसले : रियल-टाइम डाटा के आधार पर ट्रैफिक मैनेजमेंट और नीतिगत निर्णय आसान होंगे।
  • जाम में कमी : टोल प्लाजा जैसी रुकावटें खत्म होने से ट्रैफिक फ्लो स्मूथ होगा।
  • सटीक निगरानी : हर वाहन की डिजिटल ट्रैकिंग से नियमों का पालन बेहतर होगा।
  • ऑटोमैटिक कार्रवाई : उल्लंघन पर तुरंत चालान जारी होने से मानवीय हस्तक्षेप कम होगा।
  • प्रदूषण नियंत्रण : सिस्टम को एयर क्वालिटी मैनेजमेंट से जोड़कर प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर नजर रखी जा सकेगी।

सड़कों की निगरानी के लिए एआई सिस्टम की तैयारी

सड़कों की हालत सुधारने और शिकायतों के निपटारे को तेज करने के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित इंटेलिजेंट रोड मेंटेनेंस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने की तैयारी में है। अधिकारियों के मुताबिक, यह एक व्यापक तकनीक आधारित प्लेटफॉर्म होगा, जो अलग-अलग स्रोतों से डाटा लेकर सड़कों की स्थिति की रियल-टाइम निगरानी करेगा और समस्याओं के समाधान की प्रक्रिया को तेज करेगा।

प्रस्तावित सिस्टम में एआई, वीडियो एनालिटिक्स और मोबाइल आधारित निरीक्षण को एक साथ जोड़ा जाएगा, जिससे सड़क से जुड़ी खामियों की पहचान और समाधान के लिए केंद्रीकृत व्यवस्था तैयार होगी। इसके केंद्र में एक एआई-सक्षम इश्यू मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म होगा, जो विभिन्न माध्यमों से मिलने वाली शिकायतों और फील्ड इनपुट को एक जगह एकत्र करेगा। इससे अधिकारियों को शिकायतों की ट्रैकिंग, कार्य आवंटन और समयबद्ध निपटारे में सुविधा होगी।

अधिकारियों के अनुसार, एआई आधारित वीडियो एनालिटिक्स के जरिए सड़कों पर कचरा, मलबा या अन्य अवरोधों की पहचान स्वतः हो सकेगी। इससे बिना मैन्युअल रिपोर्ट के ही खतरे वाले स्थानों की जानकारी मिल सकेगी और टीमों की प्रतिक्रिया समय में सुधार होगा। इसके अलावा, एक मोबाइल एप भी विकसित किया जाएगा, जिसके माध्यम से फील्ड कर्मचारी जियो-टैग्ड फोटो और वीडियो अपलोड कर सकेंगे। इन डेटा को एआई एल्गोरिद्म के जरिए प्रोसेस कर गड्ढों, दरारों जैसे दोषों की पहचान और उनकी गंभीरता के आधार पर वर्गीकरण किया जाएगा।

एआई तकनीक के जरिए रोलर और पेवर जैसी मशीनों की गतिविधि पर नजर रखी जाएगी, जिससे काम की गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। इसके लिए एक इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर भी स्थापित किया जाएगा, जहां से पूरे सिस्टम की निगरानी होगी। अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना को 12 महीनों के भीतर लागू करने की योजना है, जिससे दिल्ली में सड़क रखरखाव और शिकायत प्रबंधन की व्यवस्था अधिक स्मार्ट और प्रभावी बन सकेगी।

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