फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Delhi tis hazari court frames assault and other charges against kuldeep sengar and shashi singh

उन्नाव कांडः विधायक कुलदीप सेंगर के खिलाफ दुष्कर्म मामले में आरोप तय

Fri, 09 Aug 2019 12:42 PM IST
पूजा त्रिपाठी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Fri, 09 Aug 2019 12:42 PM IST
सार

  • तीस हजारी कोर्ट ने विधायक के खिलाफ दुष्कर्म के मामले में आरोप तय किए
  • शशि सिंह पर नाबालिग के अपहरण का आरोप दर्ज
  • पॉक्सो एक्ट के तहत लगाई गईं धाराएं कोर्ट ने की पास 

विज्ञापन
Delhi tis hazari court frames assault and other charges against kuldeep sengar and shashi singh
कुलदीप सेंगर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उन्नाव दुष्कर्म मामले की सुनवाई कर रही दिल्ली की तीस हजारी अदालत ने 2017 में नाबालिग के दुष्कर्म के मामले में भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सेंगर के खिलाफ बलात्कार के आरोप तय किए हैं।

विज्ञापन


अदालत ने सेंगर के साथी शशि सिंह के खिलाफ नाबालिग लड़की के अपहरण के संबंध में आरोप तय किए हैं। अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धाराओं 120 बी (आपराधिक षड्यंत्र), 363 (अपहरण), 366 (अपहरण एवं महिला पर विवाह के लिए दबाव डालना), 376 (बलात्कार) और बाल यौन अपराध संरक्षण कानून (पॉक्सो) की प्रासंगिक धाराओं के तहत आरोप तय किए हैं।
विज्ञापन


सीबीआई ने बृहस्पतिवार को अदालत को बताया था कि सेंगर और उसके भाई ने लड़की के पिता पर हमला किया और तीन राज्य पुलिस अधिकारियों एवं पांच अन्य के साथ मिलकर शस्त्र कानून के एक मामले में उसे फंसाया।
विज्ञापन
विज्ञापन


वहीं कुलदीप सेंगर और शशि सिंह ने अदालत में कहा कि उन्हें झूठे आरोपों में फंसाया गया है। उन्होंने मामले में सुनवाई किए जाने की मांग की।
 

पीड़िता के पिता को अवैध हथियार रखने के मामले में झूठा फंसाया, पुलिस ने की थी साजिश

उन्नाव दुष्कर्म की पीड़िता के पिता को अवैध हथियार रखने के मामले में झूठा फंसाया गया था और पुलिस से मिलीभगत कर आरोपियों ने उससे हथियार की बरामदगी करवाई थी।

यह भी पढ़ेंः उन्नाव कांड: सीबीआई ने अदालत में कहा, विधायक कुलदीप सेंगर ने किया था दुष्कर्म

पुलिसकर्मियों व आरोपियों के बीच मोबाइल फोन पर बातचीत का डाटा भी मौजूद है। यह दलील सीबीआई ने बांगरमऊ के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर, व अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोपों पर जिरह करते हुए दी। पीड़िता के पिता को भीड़ ने पीटा था जिसके कारण हिरासत में उसकी मौत हो गई थी। एजेंसी ने कहा कि इन आरोपियों पर आरोप तय करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं।

यह भी पढ़ेंः उन्नाव कांड: रिश्तेदार की मांग, सेंगर का हो पॉलीग्राफ और नार्को टेस्ट

इसके बाद उसके खिलाफ पुलिस को मोबाइल पर उसके खिलाफ शिकायत दी गई थी। इस शिकायतकर्ता ने कुलदीप सेंगर से भी तभी बातचीत की थी। पीड़िता के पिता के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद इन लोगों के बीच बातचीत बंद हो गई थी। इन तथ्यों के मद्देनजर आरोपियों पर आरोप तय करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं। 

अदालत ने कहा कि इस मामले की सुनवाई दूसरे शनिवार यानी 10 अगस्त को करने के लिए हाईकोर्ट की अनुमति ली जाएगी। अगर अनुमति मिलती है तो सुनवाई शनिवार अथवा मंगलवार को होगी क्योंकि सोमवार को ईद की छुट्टी है। 

तीस हजारी अदालत के जिला व सत्र न्यायाधीश धर्मेश शर्मा के समक्ष सीबीआई ने आरोप पत्र का हवाला देते हुए कहा कि पीड़िता के पिता की पहले बुरी तरह पिटाई की गई थी और उसके कपड़े फाड़ दिए गए थे।

पीड़िता के पिता पर थोपा गया था कट्टा: सीबीआई 

सीबीआई ने यह भी आरोप लगाया कि जो कट्टा व चार कारतूस पीड़िता की निशानदेही पर बरामद किया गया वह उसका नहीं था और उस पर यह हथियार थोपा गया था। आरोपियों ने पुलिस के साथ मिलीभगत कर यह किया था।

इसके अलावा एसआई कामता प्रसाद की गिरफ्तारी के एक माह बाद उसके घर से एक कट्टा बरामद हुआ था। इस पर कामता प्रसाद के वकील भरत सिंह ने आपत्ति की। इस पर सीबीआई ने कहा कि उस हथियार की बरामदगी का इस केस से कोई लेना देना नहीं है। 

यूपी पुलिस का इंस्पेक्टर व एसआई भी आरोपी
पेश मामले में जमानत पर चल रहे आरोपी यूपी पुलिस के इंस्पेक्टर अशोक सिंह भदौरिया, एसआई कामता प्रसाद पेश हुए। इनके अलावा कुलदीप सिंह सेंगर, शैलेंद्र सिंह उर्फ टिंकू सिंह, विनीत मिश्रा उर्फ विनय मिश्रा, बिरेंद्र सिंह उर्फ बौवा सिंह, राम शरण सिंह, शशि प्रताप सिंह व जयदीप सिंह उर्फ अतुल सिंह को दिल्ली पुलिस ने तिहाड़ जेल से लाकर पेश किया। 

बचाव पक्ष के वकीलों ने इन आरोपियों की ओर से आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सीबीआई का केस पूरी तरह झूठा व बेबुनियाद है। इस बात को कोई साक्ष्य नहीं है कि पीड़िता के पिता को अवैध हथियार के मामले में फंसाया गया। पुलिस ने खुद उससे कट्टा व चार कारतूस बरामद किए थे। इन तथ्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ आरोप तय नहीं किए जाने चाहिए। 

तत्कालीन सीएमओ पर साजिश का आरोप 

दूसरी ओर पीड़िता व उसकी मां की ओर से कोर्ट में पेश हुए वकील धर्मेंद्र कुमार मिश्रा व अधिवक्ता पूनम कौशिक ने कहा कि पीड़िता के पिता की गिरफ्तारी से पहले बेरहमी से पिटाई हुई थी और उसे अस्पताल में भी भर्ती करवाया गया था।

इसके बाद भी उन्नाव के सीएमओ ने उसे न्यायिक हिरासत में भेजने के लिए फिट बताया गया था और जेल में उसकी मौत हो गई थी। इसमें सीएमओ तथा आरोपियों की साजिश साफ नजर आती है। 

पीड़ित पक्ष ने यह भी कहा कि मामले में आरोपी यूपी पुलिस का सिपाही आमिर खान पर केवल पीड़िता से कट्टा व कारतूस बरामदगी का आरोप है। वह यह काम खुद अपनी मर्जी से नहीं करेगा। इस मुद्दे पर एसपी उन्नाव व स्थानीय एसओ तथा एसआई की भूमिका की जांच करवाई जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed