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Delhi : आंधी-तूफान में मेट्रो यात्रियों की सुरक्षा मजबूत करेंगे सेंसर, हवा की रफ्तार को जानकर होगा उपाय
Thu, 24 Apr 2025 06:18 AM IST
दुष्यंत शर्मा
धनंजय मिश्रा, नई दिल्ली
धनंजय मिश्रा, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 24 Apr 2025 06:18 AM IST
सार
हवा की रफ्तार का पता लगाकर मेट्रो को सुरक्षित रखा जाएगा। डीएमआरसी की ओर से अलग-अलग जगह छह सेंसर लगाए गए हैं।
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Delhi Metro
- फोटो : AdobeStock
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विस्तार
दिल्ली-एनसीआर में आंधी-तूफान आने पर मेट्रो में बैठे यात्री सुरक्षित रहें, इसके लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) ने बड़ा कदम उठाया है। हवा की रफ्तार का पता लगाकर मेट्रो को सुरक्षित रखा जाएगा। डीएमआरसी की ओर से अलग-अलग जगह छह सेंसर लगाए गए हैं। इनकी मदद से हवा की गति का पता चलेगा। सेंसर ऊंचे स्थानों लगाए गए हैं। इससे न केवल समय रहते हवा की गति का पता चलेगा, बल्कि ट्रेनों के संचालन के दौरान सावधानी भी बरती जा सकेगी।
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डीएमआरसी ने तेज हवा और तूफान के दौरान यात्रियों की सुरक्षा और मेट्रो सेवाओं के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुरक्षा उपाय लागू किए हैं। मेट्रो अधिकारियों ने बताया कि इन सुरक्षा उपाय में सबसे महत्वपूर्ण सेंसर भी हैं। इनकी मदद से जब हवा की गति 70 से 90 किमी प्रति घंटा के बीच होती है, तो ट्रेनों को ऊंचे या ग्रेड-स्तरीय खंडों पर प्लेटफॉर्म क्षेत्रों में 40 किमी प्रति घंटा से अधिक की गति से नहीं चलने का निर्देश दिया जाता है।
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वहीं, यदि हवा की गति 90 किमी प्रति घंटा से अधिक हो जाती है, तो प्लेटफॉर्म पर खड़ी ट्रेनों को ऑपरेशंस कंट्रोल सेंटर (ओसीसी) से अगले निर्देश मिलने तक रुकने का आदेश दिया जाता है। चलती हुई ट्रेनें 15 किमी प्रति घंटा की सीमित गति से अगले स्टेशन तक पहुंचती हैं और स्थिति स्थिर होने तक रुकती हैं। प्रोटोकॉल के अनुसार, अनअटेंडेड ट्रेन ऑपरेशन (यूटीओ) मोड में चलने वाली ट्रेनों को तुरंत मैनुअल मोड में बदला जाता है और उपरोक्त सावधानियों के अनुसार संचालित किया जाता है।
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त्वरित कार्रवाई होती है : सेंसर से प्राप्त अलर्ट सीधे ओसीसी को भेजे जाते हैं, जिसके बाद ट्रैफिक कंट्रोलर, स्टेशन कंट्रोलर व इलेक्ट्रिकल, सिविल, ट्रैक सिग्नलिंग विभागों की तकनीकी टीमें त्वरित समन्वय करती हैं। साथ ही, सिस्टम-वाइड कमांड जैसे ग्लोबल ट्रेन होल्ड, सिस्टम होल्ड, ऑल स्टेशन होल्ड या ऑल प्लेटफॉर्म होल्ड को लाइन और सिग्नलिंग सिस्टम के आधार पर सक्रिय किया जाता है, ताकि समय रहते सुरक्षा के सभी प्राेटोकॉल का पालन हो और अप्रिय घटना न हो। अधिकारियों ने बताया कि ट्रेनों का संचालन तभी शुरू होता है जब हवा की गति कम हो जाए और कम से कम पांच मिनट तक लगातार निगरानी की जाए। इसके बाद ओसीसी की ओर से आवश्यक मंजूरी सुनिश्चित करने के बाद सेवाएं बहाल की जाती हैं।
यात्रियों को भी दी जाती है जानकारी
ट्रेन ऑपरेटरों को ट्रेन की घोषणाओं के माध्यम से यात्रियों को स्थिति की जानकारी देने का निर्देश दिया जाता है। स्टेशनों पर नियमित सार्वजनिक घोषणाएं की जाती हैं, ताकि यात्रियों को स्थिति और सेवा बहाली के बारे में जानकारी मिलती रहे।
इन स्टेशनों पर लगे सेंसर
नोएडा-ग्रेटर नोएडा के बीच एक्वा मेट्रो के सिग्नल सिस्टम में आने वाली खराबी जल्द दूर होगी। इस पर 92,88,056 रुपये की लागत आएगी। सिग्नल डिवाइस में लगने वाले पार्ट और स्कॉडा सिस्टम से जुड़े काम के लिए नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने दो टेंडर जारी किए हैं। 22 मई के पहले एजेंसियों को आवेदन करने हैं। अभी एक्वा मेट्रो के सिग्नल में लगातार खराबी आ रही है। इस वजह से मेट्रो का संचालन प्रभावित हो रहा है। यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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