मजबूत इरादों वाली है दिल्ली की सबसे गरीब उम्मीदवार
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दिल्ली के महारण में उतरने वाले करोड़पतियों की तो बहुतायात है। भाजपा अकाली गठबंधन की ओर लड़ रहा उम्मीदवार मजिंदर सिरसा तो 100 करोड़ की संपत्ति का मालिक है। इसके बावजूद इस दंगल में एक ऐसी प्रत्याशी भी मैदान में है जो करोड़ों के तो शायद सपने भी कभी-कभी ही देखती होगी।
जिंदगी बसर करने के लिए उसे कुछ पैसों का ही सहारा है। हम बात कर रहे हैं आर.के.पुरम से निर्दलीय उम्मीदवार कुसमा देवी की, जो दिल्ली चुनाव में खड़ी हुई सबसे गरीब उम्मीदवार है।
कुसमा घरों में काम करती है। कुसमा के पास तो नामांकन भरने तक के पैसे नहीं थे। कुसमा की कहानी बेहद प्रेरणादायक है। आगे पढ़ें कि कैसे उसने पैसे न होने पर भी अपना नामांकन भरा और कैसे उसने राजनीति में आने की ठानी।
100 रुपए उधार लेकर भरा नामांकन
नामांकन के लिए पैसे न होने पर 100 रुपए उधार मांगकर फॉर्म भरने वाली कुसमा का एकसूत्री एजेंडा नानकपुरा के श्रीराम जेजे स्लम क्लस्टर की दयनीय स्थिति को बदलना है। इस इलाके में पानी की भारी किल्लत है और सफाई का हाल भी कुछ ठीक नहीं है।
पिछली कांग्रेस सरकार ने झुग्गी बस्ती के लोगों को फ्लैट देने का वादा किया था जो आज तक पूरा नहीं हुआ। गौरतलब है कि पिछले ही हफ्ते इस इलाके में पानी की पाइप लाइन और स्ट्रीटलाइट्स लगाई गई हैं।
चुनाव में फायदा लेने के लिए इन्हें लगा तो दिया है पर आलम यह है कि इनमें से किसी में भी अभी न पानी आ रहा है, न रोशनी। रोशनी के प्रतीक 'टॉर्च' को अपना चुनाव चिन्ह बनाने वाली कुसमा कहती है कि राजधानी में होने के बावजूद उसके इलाके में अभी विकास नहीं पहुंचा है।
अपना जीत को तय न मानते हुए वह कहती है कि चाहे वो जीते या न जीते लेकिन उसे यह पता होगा कि उसने बेहतरी के लिए कोशिश जरूर की। कुसमा कहती है कि वह कोशिश जरूर करना चाहती है, सफलता मिले न मिले।
प्रचार करने के लिए भी समय नहीं है
क्षेत्र के कुछ लोग कहते हैं कि कुसमा के चुनाव लड़ने से, जिसे सबसे ज्यादा फायदा होगा वह होगी बीजेपी। इसका कारण भी वह देते हैं। कहते हैं कि लोगों के वोट कांग्रेस, आप और कुसमा में बंट जाएंगे और मजे बीजेपी लेगी।
एक स्थानीय निवासी के अनुसार इलाके में कोई नहीं जानता कि कुसमा चुनाव लड़ रही है। उसने अपना प्रचार भी अब तक शुरू नहीं किया है।
इस पर कुसमा कहती है कि लोग उसके बारे में अफवाहें फैला रहे हैं। वह पूरे दिन चार-चार घरों में काम करके थक जाती है, इसलिए प्रचार शुरू नहीं कर पाई है। लेकिन उसने रविवार और सोमवार की छुट्टी ली ताकि वह प्रचार कर सके।
उसने तय किया था कि वह अपने स्लम के अलावा आरके पुरम विधानसभा क्षेत्र की अंबेडकर बस्ती में भी प्रचार करेगी। कुसमा के परिवार को उम्मीद है कि इस बार बदलाव के लिए स्लमवासी उसे चुनेंगे।
अगर कुसमा चुनाव जीत जाती है और स्लम का विकास होता है तो उसके चार बच्चे भी उसके पास आ जाएंगे, जो झुग्गी छोटी होने के कारण कहीं दूर रहते हैं।