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मुंबई ही नहीं दिल्ली में भी हैं लालबाघचा राजा

Fri, 29 Aug 2014 05:59 PM IST
Updated Fri, 29 Aug 2014 05:59 PM IST
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Delhi's lalbaughcha Raja in Pitampura.

गणेश चतुर्थी हालांकि देश के पश्चिमी भाग में बड़े धूमधाम से मनाई जाती है पर अब दिल्ली में भी इसका अच्छा असर दिखने लगा है। मुंबई का माना हुआ लालबाघचा राजा पूरे देश में मशहूर गणेश पंडाल है जहां मुंबई की आम जनता ही नहीं पूरा बॉलीवुड उमड़ता है।

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ये गणेश पंडाल लालबाघ क्षेत्र में बनाया जाता है और इसकी स्थापना 1934 में की गई थी। यहां हर साल गणेशोत्सव के पूरे दस दिन लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ लगती है।
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अब लालबाघचा राजा से प्रेरित होकर दिल्ली में भी राजा लालबाघचा गणपति के नाम से एक भव्य पंडाल बनाया गया है। यह पंडाल दिल्ली के पीतमपुरा में स्थित है। इस पंडाल के आयोजकों का दावा है कि पहली बार उन्होंने गणेश प्रतिमा मुंबई से मंगाई है और वहीं के पंडित भी लाए हैं।
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राजा लालबाघचा गणपति ट्रस्ट के मेला मंत्री और सेक्रेटरी राजेश गुप्ता ने बताया कि जो कुछ भी किया गया है वो सब भगवान की इच्छा थी। उन्होंने आदेश दिया और हम लालबाघ के गणपति को दिल्ली ले आए। हमें उम्मीद है कि भगवान के दर्शन के लिए उतने ही श्रद्धालू आएंगे जितने मुंबई में आते हैं।

भगवान के जन्म का उत्सव है गणेश चतुर्थी

Delhi's lalbaughcha Raja in Pitampura.

गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के जन्मोत्सव का त्योहार है। इस बार ये त्योहार शुक्रवार 29 अगस्त से शुरू हुआ है और नेताजी सुभाष प्लेस ग्राउंड पीतमपुरा में ‌8 सितंबर तक चलेगा। इसके बाद मूर्ति विसर्जित कर दी जाएगी।

भगवान गणेश की प्रतिमा उतनी ही बड़ी है जितनी कि मुंबई में होती है। आयोजकों का कहना है कि पंडाल के आसपास जो भी स्टॉल लगेंगे वो 24 घंटे खुले रहेंगे जिनमें मोदक मिलेगा।

गुप्ता का कहते हैं कि मुंबई में लोग दो लाइनों में खड़े होते, ज‌िसमें एक लाइन ऐसी होती है जिसमें लगकर आप भगवान के चरणों को छू सकते हैं पर यहां ऐसा नहीं होगा। यहां केवल एक ही लाइन होगी और कोई भी स्टेज पर नहीं चढ़ सकेगा। हालांकि भक्त स्टेज के पास से उनकी वंदना कर सकते हैं।

बता दें कि शहर का तमिल समुदाय साल 2005 से वसुंधरा एंक्लेव के संकटहारा गणपति मं‌दिर में गणेशोत्सव मना रहा है। संकटहारा भगवान गणेश का 23वां स्वरूप है। इसलिए हर साल ये लोग गणेश की प्रतिमा को विनायक चतुर्थी के दिन हाथी पर बैठाकर यात्रा निकालते हैं।

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