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Delhi Politics : विधानसभा चुनाव के बाद एमसीडी की राजनीति गरमाई, बदले समीकरण; भाजपा की स्थिति मजबूत
Sun, 16 Feb 2025 05:20 AM IST
दुष्यंत शर्मा
विनोद डबास, नई दिल्ली
विनोद डबास, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 16 Feb 2025 05:20 AM IST
सार
आप के तीन निगम पार्षद एंड्रयूज गंज से अनीता बसोया, हरिनगर से निखिल चपराना और आरकेपुरम से धर्मवीर सिंह शनिवार को भाजपा में शामिल हो गए। विधानसभा चुनाव और मतगणना के बाद आप के 13 पार्षदों के दल बदलने से स्थिति बदल गई है।
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भाजपा में शामिल हुए आप के 3 पार्षद
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली विधानसभा के चुनाव में आम आदमी पार्टी की हार के बाद एमसीडी की राजनीति में नया मोड़ आ गया है। आप के तीन निगम पार्षद एंड्रयूज गंज से अनीता बसोया, हरिनगर से निखिल चपराना और आरकेपुरम से धर्मवीर सिंह शनिवार को भाजपा में शामिल हो गए। विधानसभा चुनाव और मतगणना के बाद आप के 13 पार्षदों के दल बदलने से स्थिति बदल गई है। अब पार्टी का सदन में बहुमत नहीं रहा है। भाजपा अब मुख्य विपक्षी दल के तौर पर मजबूत हो गई है।
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दरअसल भाजपा के पार्षदों की संख्या में वृद्धि हो गई है और उसके पास सत्ता में आने का मौका बनता दिखाई दे रहा है। हालांकि भाजपा को पार्षदों की संख्या के मामले में सदन में अभी पूर्ण बहुमत हासिल नहीं हुआ है। लिहाजा इस समय, सदन में कांग्रेस की भूमिका सबसे अहम बन गई है, क्योंकि पार्टी के पास फैसला करने की चाबी है। दरअसल, सांसद व विधायक सदन की बैठक में नहीं आते हैं। अप्रैल में होने वाले मेयर चुनाव को भाजपा अपने सांसदों व विधायकों के दम पर आसानी से जीत जाएगी।
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गत वर्ष, एक एमसीडी पार्षद सांसद बनने के कारण और हाल ही में 12 पार्षदों के विधायक बनने के बाद, एमसीडी में अब कुल पार्षदों की संख्या 250 से घटकर 238 रह गई है और आम आदमी पार्टी के 13 पार्षदों के दल बदलने के कारण उसके पास अब केवल 113 पार्षद रह गए हैं, जबकि उसे सदन में बहुमत प्राप्त करने के लिए 120 पार्षदों का समर्थन चाहिए। हालांकि, आम आदमी पार्टी को एक निर्दलीय पार्षद का समर्थन प्राप्त है, फिर भी यह आंकड़ा बहुमत से काफी कम है। वहीं, भाजपा की स्थिति मजबूत हुई है और उसके पास अब एमसीडी में 116 पार्षद हैं। हालांकि, भाजपा के पास भी बहुमत नहीं है, लेकिन अप्रैल में होने वाले मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव में भाजपा अपने सांसदों, विधायकों और पार्षदों की संख्या के दम पर जीत सकती है।
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कांग्रेस की भूमिका
एमसीडी में बदलती राजनीतिक स्थिति के कारण सदन में कांग्रेस की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। एमसीडी में कांग्रेस के पास आठ पार्षद हैं और वह जिस दल का समर्थन करेंगे, उसी दल के पास सदन में निर्णय लेने की शक्ति होगी, क्योंकि सदन की बैठक में सांसद व विधायन नहीं आते है। इस कारण कांग्रेस की स्थिति अब निर्णायक बन गई है।
भाजपा को बढ़त
एमसीडी की सत्ता हासिल करने के मामले भाजपा के लिए संभावनाएं बढ़ी हैं। एमसीडी में कुल 274 सदस्यों की तुलना में वर्तमान में सिर्फ 262 सदस्य ही हैं। भाजपा के पास अब 133 सदस्य हैं, जिनमें सात सांसद भी शामिल हैं। इसके अलावा विधानसभा से मनोनीत किए जाने वाले 14 विधायकों में से 10 विधायक भाजपा के होंगे, क्योंकि विधानसभा से 20 प्रतिशत विधायक हर साल एमसीडी में मनोनीत किए जाते हैं और उनका चयन दलीय स्थिति के आधार पर किया जाता है।
आम आदमी पार्टी की स्थिति
आम आदमी पार्टी ने एमसीडी चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया था, लेकिन इस समय उसकी स्थिति संकट में है। पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल नाराज है और पिछले मेयर चुनाव में मतदान नहीं किया था और इस बार भी उनके मतदान में आने की संभावना कम है। उसने पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है।
आप ने एमसीडी में खोया बहुमत, महापौर नैतिकता के आधार पर दें इस्तीफा: भाजपा
एमसीडी में नेता प्रतिपक्ष राजा इकबाल सिंह ने कहा कि आम आदमी पार्टी का संख्याबल घटकर 113 रह गया है, जबकि भाजपा के पार्षदों की संख्या 116 हो गई है। इस कारण मेयर महेश कुमार से नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए। दरअसल जिस तरह विधानसभा में आप ने जनमत खो दिया है, अब उसी तरह एमसीडी में भी वह विश्वासमत खो चुकी है।
ऐसे में ममेयर को पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा अब सदन में जनहित के मुद्दे उठाना जारी रखेगी और आप की मनमानी को रोकेगी। वहीं उन्होंने कहा कि भाजपा को जब भी सेवा का मौका मिलेगा, वह दिल्ली में रुके हुए विकास कार्यों को पूरा करेगी और भाजपा तीन इंजन की सरकार (केंद्र, एमसीडी और दिल्ली) बनाकर विकास को गति देगी।