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दिल्ली पुलिस ने जारी किया मौलाना साद को चौथा नोटिस, सरकारी लैब में कराएं कोरोना जांच
Thu, 30 Apr 2020 02:25 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Thu, 30 Apr 2020 02:25 PM IST
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निजामुद्दीन मरकज के बाहर ड्यूटी पर सीआरपीएफ के जवान
- फोटो : Amar Ujala
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दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को मौलाना साद को चौथा नोटिस जारी कर सरकारी लैब में कोरोना की जांच कराने के लिए कहा। बता दें कि तब्लीगी जमात के मुखिया मौलाना साद एक प्राइवेट लैब में कोरोना टेस्ट करा चुके हैं, जहां उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई थी।
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इस नोटिस में क्राइम ब्रांच ने मौलाना साद से कुछ सवालों के जवाब भी मांगे हैं, जो उन्होंने पुराने नोटिस में नहीं दिया था। देश में कोरोना वायरस के मामलों में अचानक इजाफा करने वाले तब्लीगी जमात के मुखिया मौलाना साद के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग का मामला भी दर्ज किया है। ईडी ने दिल्ली पुलिस की एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत आपराधिक मामला दर्ज किया है।
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दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 31 मार्च को मौलाना साद समेत सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। साद ने बड़े जमावड़े पर रोक के आदेश के बावजूद जलसा किया था।
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मौलाना साद के नाम से अब तक नहीं मिला है कोई खाता
अपराध शाखा को निजामुद्दीन स्थित तब्लीगी मरकज के एक और बैंक खाते का पता लगा है। तब्लीगी मरकज के नाम वाला यह खाता हमदर्द स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा में है। इस खाते से लगातार लेन-देन होता रहता था। अपराध शाखा ने इसकी जानकारी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को दी है।
अपराध शाखा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांच को एक महीना होने जा रहा है, लेकिन अब तक मौलाना मोहम्मद साद के व्यक्तिगत नाम से कोई बैंक खाता नहीं मिला है।
अधिकारियों के अनुसार, मरकज के बैंक खाते साद का बेटा व भतीजा देखते थे। ये दोनों ही साद के राजदार हैं। अपराध शाखा दिल्ली में स्थित ट्रेवल्स एजेंट को वेरीफाई कर रही हैं कि उनके जरिये कितने जमाती विदेश गए थे और कब भारत आए थे। इसके अलावा, ट्रेवल एजेंट के जरिए अन्य जानकारी एकत्र की जा रही है।
जांच में पता चला है कि मरकज से लोग जमात के लिए टुकड़ियों में जाते थे। ये जहां जाते, वहां मजिस्दों में रहते और लोगों के घर खाना खाते थे। इस कारण प्रचार करने गए लोगों का खर्चा कम आता था। यह भी देखा जा रहा है कि धर्म के नाम पर आयकर विभाग से छूट ली जाती थी या नहीं।
अपराध शाखा के अधिकारियों के अनुसार, जांच टीम के सिपाही के कोरोना संक्रमित होने के बाद जिन पुलिस अधिकारियों को सेल्फ क्वारंटीन रहने को कहा गया है, उनमें सीनियर अफसर भी हैं। ऐसे में मरकज मामले की जांच धीमी होने की आशंका है।
अपराध शाखा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जांच को एक महीना होने जा रहा है, लेकिन अब तक मौलाना मोहम्मद साद के व्यक्तिगत नाम से कोई बैंक खाता नहीं मिला है।
अधिकारियों के अनुसार, मरकज के बैंक खाते साद का बेटा व भतीजा देखते थे। ये दोनों ही साद के राजदार हैं। अपराध शाखा दिल्ली में स्थित ट्रेवल्स एजेंट को वेरीफाई कर रही हैं कि उनके जरिये कितने जमाती विदेश गए थे और कब भारत आए थे। इसके अलावा, ट्रेवल एजेंट के जरिए अन्य जानकारी एकत्र की जा रही है।
जांच में पता चला है कि मरकज से लोग जमात के लिए टुकड़ियों में जाते थे। ये जहां जाते, वहां मजिस्दों में रहते और लोगों के घर खाना खाते थे। इस कारण प्रचार करने गए लोगों का खर्चा कम आता था। यह भी देखा जा रहा है कि धर्म के नाम पर आयकर विभाग से छूट ली जाती थी या नहीं।
अपराध शाखा के अधिकारियों के अनुसार, जांच टीम के सिपाही के कोरोना संक्रमित होने के बाद जिन पुलिस अधिकारियों को सेल्फ क्वारंटीन रहने को कहा गया है, उनमें सीनियर अफसर भी हैं। ऐसे में मरकज मामले की जांच धीमी होने की आशंका है।