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अगर दिल्ली पुलिस किसानों को गिरफ्तार करती तो उन्हें ऐसे कैद में रखने की बनाई थी योजना
Fri, 27 Nov 2020 08:28 PM IST
Mohit Mudgal
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: Mohit Mudgal
Updated Fri, 27 Nov 2020 08:28 PM IST
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किसानों का सिंघु बॉर्डर पर प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
दिल्ली में प्रवेश करने की इजाजत देने से पहले किसानों को जंतर मंतर पहुंचने से रोकने के लिए दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार करने की योजना बनाई थी। दिल्ली-सिंघु बार्डर पर किसानों के जमा होने के दूसरे दिन शुक्रवार को पुलिस ने इसके लिए अस्थाई जेलों की जगह तलाशनी शुरू की। पुलिस ने सुबह नौ बजे स्टेडियम को अस्थाई जेल में तब्दील करने के लिए दिल्ली सरकार से अनुमति मांगी थी। लेकिन दिल्ली सरकार ने किसान आंदोलन का समर्थन करते हुए स्टेडियम देने से मना कर दिया।
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दिल्ली पुलिस किसानों के विरोध प्रदर्शन से निपटने के लिए हर विकल्प पर काम कर रही थी। दिल्ली पुलिस पर चुनौती दो-तरफा थी। एक तो उनको दिल्ली-हरियाणा के दो बॉर्डर खुलवाना था। इसके लिए किसानों को भी शांति पूर्ण तरीके से बॉर्डर से हटाकर दूसरी जगह शिफ्ट करना था। गुरुवार के प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस मानकर चल रही थी कि किसान वापस नहीं लौटेंगे। ऐसे में उनको गिरफ्तार करना पड़ सकता है। बड़ी संख्या में किसानों को बंद करने के लिए पुलिस ने दिल्ली सरकार से स्टेडियम की मांग की। लेकिन इसको दिल्ली सरकार ने ठुकरा दी।
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गृहमंत्री सतेंद्र जैन द्वारा दिल्ली पुलिस को दिए गए लिखित जवाब में कहा गया है कि किसानों की मांगें जायज हैं। केंद्र सरकार को किसानों की मांगें तुरंत माननी चाहिए हैं। किसानों को जेलों में डालना इसका समाधान नहीं है। किसानों का आंदोलन बिल्कुल अहिंसक है। अहिंसक तरीके से आंदोलन करना हर भारतीय का संवैधानिक अधिकार है। उसके लिए उन्हें जेलों में बंद नहीं किया जा सकता। इसलिए स्टेडियम को जेल बनाने की दिल्ली पुलिस की इस अर्जी को दिल्ली सरकार नामंजूर करती है।
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आप सरकार की तारिफ
पुलिस की योजना की सूचना मिलते ही आम आदमी पार्टी ने इसका विरोध शुरू कर दिया। सांसद संजय सिंह समेत आप नेताओं ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से अपील की दिल्ली सरकार को पुलिस की मांग नहीं माननी चाहिए। बाद में दिल्ली सरकार के इंकार के बाद आप नेताओं ने मुख्यमंत्री को इसके लिए धन्यवाद दिया।
पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में दिल्ली सरकार पहले दिन से ही पंजाब के किसानों के साथ खड़ी है। चीमा का बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि दिल्ली पहुंचने वाले किसानों मे सबसे ज्यादा संख्या पंजाब के किसानों की है।
हरपाल चीमा ने कहा कि अरविंद केजरीवाल ही देश के पहले मुख्यमंत्री थे, जिन्होंने सबसे पहले जंतर-मंतर पर आम आदमी पार्टी के धरने का नेतृत्व करते हुए मोदी सरकार के कृषि विरोधी काले कानूनों के खिलाफ डटकर आवाज बुलंद की थी और यह कानून तुरंत वापस लेने की मांग की थी। केजरीवाल ने गेहूं और धान समेत सभी फसलों की एमएसपी पर कानूनी तौर पर गारंटी के साथ खरीद करने की वकालत की थी, जिससे देश भर के अन्नदाता के हक सुरक्षित रह सकें।
चीमा ने स्पष्ट किया कि दिल्ली पुलिस पर केंद्र सरकार का नियंत्रण है। दिल्ली पुलिस केंद्र के इशारे पर किसानों को गिरफ्तार करके जेलों में डालना चाहती है, परंतु केजरीवाल सरकार ने ऐसा नहीं होने दिया।