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दिल्ली पुलिस में लगी तुकलकी फरमान जारी करने की होड़

Sat, 21 Nov 2015 11:10 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 21 Nov 2015 11:10 PM IST
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Delhi Police DCP continued a series of unneccessary order.

दिल्ली पुलिस के जिला डीसीपी तुगलकी फरमान जारी कर रहे हैं। दो जिला डीसीपी केबाद अब और डीसीपी में तुगलकी फरमान जारी करने की होड़ से लग गई है।

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एक डीसीपी ने तो ये फरमान जारी कर दिया है कि सब-इंस्पेक्टर (एसआई) व असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर (एएसआई) लिखित अनुमति के बाद ही सप्ताह में एक दिन ही अपने घर जा सकते हैं। उन्हें अपने सब-डिवीजन एसीपी से लिखित अनुमति लेनी होगी।
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इस मामले में जब दिल्ली पुलिस के सीनियर विशेष पुलिस आयुक्त (कॉडिनेटर, लॉ एण्ड ऑर्डर) से इन तुगलकी फरमानों के पूछा गया तो उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर की।

लिखित अनुमति लेकर ही जा सकते हैं घर

Delhi Police DCP continued a series of unneccessary order.

जब उन्हें कई डीसीपी द्वारा इस तरह के तुगलकी फरमानों के जारी करने के बारे में बताया गया तो उन्होंने कहा कि आतंकी घटनाओं को देखते हुए एसआई व एएसआई समेत अन्य स्टाफ को थानों में रोका जा रहा है।

गौरतलब है कि इस समय दिल्ली पुलिस में 11 जिले हैं। सबसे पहले दक्षिण-पूर्व डीसीपी मंदीप सिंह रंघावा ने सबसे पहले तुगलकी फरमान जारी किया था कि एसआई व एएसआई 24 घंटे सातों दिन थानों में रहेंगे।

वह सप्ताह में एक बार ही अपने घर जा सकते हैं वह भी एसीपी की अनुमति लेकर जा सकते हैं। इसके बाद बाहरी जिला डीसीपी विक्रमजीत सिंह, पश्चिमी जिला डीसीपी पुष्पेन्द्र कुमार, विकासपुरी सब डिवीजन एसीपी ओमवती मलिक, उत्तरी जिला डीसीपी-दो अस्लम खान व उत्तर-पूर्वी जिला डीसीपी वीनू बंसल ने इस तरह का फरमान जारी कर दिया है।

इजाजत के लिए जाना होगी ACP कार्यालय

Delhi Police DCP continued a series of unneccessary order.

वीनू बंसल ने जो फरमान जारी किया है कि उसमें ये भी कहा कि एसआई व एएसआई सात दिन में एक बार घर जाएंगे तो वह एसीपी से लिखित अनुमति के बाद ही घर जा सकते हैं।

एसआई व एएसआई को लिखित अनुमति के लिए एसीपी के कार्यालय जाना होगा। अन्य डीसीपी का ये कहना कि एसआई व एएसआई फोन आदि पर घर जाने की अनुमति ले सकते हैं।

हालांकि जिन डीसीपी ने सर्कुलर जारी नहीं किए है जब उनसे इन फरमानों के बारे में पूछा गया तो एक डीसीपी का तो ये कहना था कि सोने के लिए तो दूर एसआई व एएसआई केलिए थानों में बैठने के लिए कमरा तक नहीं है। थानों में पर्याप्त संख्या में टॉयलेट नहीं हैं। डीसीपी के इन सकुर्लर से एसआई व एएसआई में बहुत ज्यादा रोष है।

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