Delhi: डीटीसी बसों-टैक्सी के पैनिक बटन नहीं करते काम, कैसे हो महिलाओं की सुरक्षा
दिल्ली भाजपा नेता रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा है कि उनकी टीम ने कई बसों-टैक्सियों को रोककर उनमें लगे पैनिक बटन को टेस्ट किया है। इन बसों के पैनिक बटन दबाने के बाद भी किसी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला...
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दिल्ली में डीटीसी बसों और कैब-टैक्सी में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठते रहे हैं। कई बार इन बसों-टैक्सियों में महिलाओं के साथ अभद्रता हुई है, तो कई बार उन्हें अपनी जान भी गंवानी पड़ी है। महिलाओं को इन खतरों से बचाने के लिए बसों-टैक्सियों में पैनिक बटन लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। लेकिन भाजपा का आरोप है कि इन बसों-टैक्सियों में लगने वाले पैनिक बटन काम नहीं कर रहे हैं। इनको दबाने पर कोई सहायता का सिस्टम तैयार नहीं किया गया है, जबकि इन्हीं बटन को लगाने के लिए हर टैक्सी से 900 रुपये और हर बस से 2200 रुपये प्रति वर्ष वसूला जाता है।
दिल्ली भाजपा नेता रामवीर सिंह बिधूड़ी ने कहा है कि उनकी टीम ने कई बसों-टैक्सियों को रोककर उनमें लगे पैनिक बटन को टेस्ट किया है। इन बसों के पैनिक बटन दबाने के बाद भी किसी तरफ से कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने सभी बस वालों से इसके लिए मोटी रकम वसूली, लेकिन महिलाओं की सहायता के लिए कोई सिस्टम तैयार नहीं किया। उन्होंने कहा कि इस मद में बसों-टैक्सियों से सैकड़ों करोड़ रुपयों की वसूली हो चुकी है, लेकिन इस पर कोई काम नहीं हुआ। इसकी जांच होनी चाहिए कि वसूला गया पैसा किस स्थान पर खर्च किया गया।
पैनिक बटन लगाने की शुरुआत 2019 में की गई थी। इसके लिए टैक्सी वालों से 900 रुपये प्रतिवर्ष और बस वालों से 22,00 रुपये प्रतिवर्ष लेने का फैसला हुआ था। चार वर्ष से यह राशि लगातार वसूल की जा रही है। दिल्ली में कुल मिलाकर लगभग 10 हजार बसें और हजारों टैक्सियां रजिस्टर्ड हैं। इस तरह पांच वर्ष में पैनिक बटन के नाम पर लगभग 500 करोड़ रुपये की वसूली हो चुकी होगी।
दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर ने कहा कि दो माह पूर्व भाजपा ने सबूतों के साथ साबित किया था कि किस तरह केजरीवाल सरकार आटो-रिक्शा एवं अन्य वाहनों के फिटनेस के नाम पर एक एनजीओ से मिलकर स्कैम कर रही है। उन्होंने कहा कि पैनिक बटन के नाम पर हो रहा यह फर्जीवाड़ा महिलाओं-बच्चों की सुरक्षा से गंभीर खिलवाड़ है।