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Delhi : हाईकोर्ट में एनआईए ने कहा-गुनाह कबूल कर लेने भर से यासीन को नहीं मिलनी चाहिए मृत्युदंड से छूट
Fri, 12 Jul 2024 06:36 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 12 Jul 2024 06:36 AM IST
सार
आतंकवाद के वित्तपोषण मामले में कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक को मृत्युदंड देने की मांग करते हुए एनआईए ने कहा है कि यदि ऐसे खूंखार आतंकवादियों को केवल इस आधार पर मृत्युदंड नहीं दिया जाता कि उन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है, तो इससे देश की सजा नीति पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।
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Delhi High Court
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
आतंकवाद के वित्तपोषण मामले में कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक को मृत्युदंड देने की मांग करते हुए एनआईए ने कहा है कि यदि ऐसे खूंखार आतंकवादियों को केवल इस आधार पर मृत्युदंड नहीं दिया जाता कि उन्होंने अपना अपराध स्वीकार कर लिया है, तो इससे देश की सजा नीति पूरी तरह से खत्म हो जाएगी।
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इसके परिणामस्वरूप एक ऐसी व्यवस्था बन जाएगी जिसके तहत ऐसे खूंखार आतंकवादियों को सरकार के खिलाफ युद्ध में शामिल होने, जंग छेड़ने और उसका नेतृत्व करने के बाद मृत्युदंड से बचने का रास्ता मिल जाएगा। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस अमित शर्मा की खंड पीठ के समक्ष बृहस्पतिवार को एनआईए की अपील पर सुनवाई हो रही थी। पूर्ववर्ती पीठ ने इसे दुर्लभतम मामला बताते हुए एनआईए की अपील पर मलिक से जवाब मांगा था।
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मामले पर सुनवाई से हटे जस्टिस अमित शर्मा
हालांकि, सुनवाई शुरू होते ही जस्टिस अमित शर्मा ने खुद को मामले से अलग कर लिया। अब इस मामले को हाईकोर्ट की अलग पीठ के समक्ष 9 अगस्त के लिए सूचीबद्ध किया गया है। बता दें कि कुख्यात अपराधी मलिक चार वायुसेना कर्मियों की हत्या, पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री की बेटी रुबैया सईद के अपहरण का जिम्मेदार है। रुबैया के अपहरण के बाद रिहा किये गए चार आतंकवादियों ने 26/11 के मुंबई हमलों की साजिश रची थी।
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