रिपोर्ट में खुलासा: देश का सबसे बड़ा ओजोन हॉटस्पॉट बना दिल्ली-NCR, हर दिन मानक से ज्यादा स्तर; रात भी जहरीली
रिपोर्ट में एक और चिंताजनक बात सामने आई है कि दिल्ली-एनसीआर में ओजोन अब केवल दिन की समस्या नहीं रही। गर्मी और हीटवेव के दौरान रात में भी ओजोन का स्तर सुरक्षित सीमा से ऊपर बना रहता है। अध्ययन के दौरान दिल्ली-एनसीआर में 46 रात में ओजोन का स्तर मानक से अधिक दर्ज किया गया, जो देश में सबसे ज्यादा है।
विस्तार
वायु प्रदूषण का संकट अब केवल सर्दियों के धुएं और पीएम 2.5 तक सीमित नहीं रह गया है। बल्कि दिल्ली-एनसीआर अब देश का सबसे बड़ा जमीनी स्तर का ओजोन हॉटस्पॉट बन चुका है। गर्मियों के दौरान यहां लगभग हर दिन ओजोन का स्तर राष्ट्रीय मानक से ऊपर दर्ज किया गया। इसकी गवाही सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) की हालिया रिपोर्ट देती है। नए शोध में साल 2021 से 2026 के बीच के आंकड़ों का विश्लेषण किया है। इसके अनुसार, 1 मार्च से 10 मई 2026 के बीच 71 दिनों की अध्ययन अवधि में दिल्ली-एनसीआर में हर दिन ओजोन का आठ घंटे का औसत स्तर राष्ट्रीय मानक (100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर) से अधिक रहा।
प्रतिदिन औसतन 8.79 स्टेशन मानक से ऊपर
राजधानी के मॉनिटरिंग नेटवर्क में प्रतिदिन औसतन 8.79 स्टेशन मानक से ऊपर रिकॉर्ड हुए, जबकि एनसीआर के अन्य शहरों में औसतन 3.2 स्टेशन रोजाना सीमा से अधिक स्तर दर्ज कर रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के पूसा और आईएमडी परिसर के अलावा ग्रेटर नोएडा नॉलेज पार्क-5, नोएडा सेक्टर-125 और गाजियाबाद के वसुंधरा क्षेत्र ओजोन प्रदूषण के प्रमुख हॉटस्पॉट बनकर सामने आए हैं। साथ ही, ग्रेटर नोएडा नॉलेज पार्क-5 में 71 दिनों में से 44 दिन ओजोन का स्तर तय मानक से ऊपर दर्ज किया गया।
गर्मी और हीटवेव के दौरान रात में भी ओजोन का स्तर सुरक्षित सीमा से ऊपर
रिपोर्ट में एक और चिंताजनक बात सामने आई है कि दिल्ली-एनसीआर में ओजोन अब केवल दिन की समस्या नहीं रही। गर्मी और हीटवेव के दौरान रात में भी ओजोन का स्तर सुरक्षित सीमा से ऊपर बना रहता है। अध्ययन के दौरान दिल्ली-एनसीआर में 46 रात में ओजोन का स्तर मानक से अधिक दर्ज किया गया, जो देश में सबसे ज्यादा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ओजोन प्रदूषण अब केवल उत्तर भारत तक सीमित नहीं है। मुंबई में पूरे वर्ष कई महीनों तक ओजोन का स्तर ऊंचा बना रहा, जबकि चेन्नई में अचानक ओजोन बढ़ने की घटनाएं सामने आईं। इसके अलावा, बेंगलुरु में लंबे समय तक लोगों के ओजोन के संपर्क में रहने की स्थिति दर्ज की गई।
-राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी 2.0) में ओजोन को शामिल करें
-पूरे एयरशेड के आधार पर क्षेत्रीय रणनीति बनाएं
-परिवहन, उद्योग और कचरा जलाने से होने वाले उत्सर्जन पर सख्ती से नियंत्रण
विशेषज्ञ बाइट
दिल्ली-एनसीआर में ओजोन प्रदूषण अब स्थानीय नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की समस्या बन चुका है। इसलिए केवल धूल और पीएम 2.5 पर ध्यान देने के बजाय ओजोन बनाने वाली गैसों (नॉक्स और वॉक्स) के उत्सर्जन को भी नियंत्रित करना जरूरी है। -अनुमिता रॉयचौधरी, कार्यकारी निदेशक, सीएसई
जमीन के स्तर पर ओजोन का स्तर बढ़ रहा
छह साल के डेटा से पता चलता है कि जमीन के स्तर पर ओजोन का स्तर बढ़ रहा है। ऐसे दिनों की संख्या बढ़ रही है, जब यह तय मानकों से अधिक हो जाता है, खासकर गर्मियों में इसके संपर्क में रहने का समय बढ़ रहा है और वायुमंडलीय ट्रैपिंग के कारण रात में भी यह बना रहता है। -शरणजीत कौर, डिप्टी प्रोग्राम मैनेजर, अर्बन लैब, सीएसई