दिल्ली: ढांसा बस स्टैंड मेट्रो स्टेशन पर मेट्रो सेवाएं जल्द होंगी शुरू
- कला-संस्कृति को जीवंत रूप में किया पेश
- ग्रामीण और शहरी जीवन के रंग में सराबोर हुआ मेट्रो स्टेशन
- मेट्रो सेवा शुरू करने की तैयारी
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सांस्कृतिक विरासत, वन्य जीवों के साथ वनस्पति की कई प्रजातियों के फोटोग्राफ और कलाकृतियां। स्टेशन में ग्रामीण और शहरी परिवेश को इस तरह प्रदर्शित किया गया है। द्वारका-नजफगढ़ कॉरिडोर के विस्तार से दिल्ली-हरियाणा के गांवों में रहने वालों को मेट्रो में सफर के दौरान स्टेशन पर ग्रामीण परिवेश के साथ अपनेपन का अहसास होगा। करीब एक किलोमीटर के दायरे में निर्माण के बाद ढांसा तक मेट्रो परिचालन की तैयारियां पूरी हो चुकी है। सुरक्षा आयुक्त(मेट्रो रेल) इस कॉरिडोर का निरीक्षण कर चुके हैं और जल्द ही यात्रियों को मेट्रो की सेवाएं उपलब्ध होंगी।
मेट्रो सेवाएं शुरू होने से दिल्ली मेट्रो 390 किलोमीटर के नेटवर्क में 286 मेट्रो स्टेशन हो जाएंगे। ढांसा बस स्टैंड मेट्रो स्टेशन में परपंरागत के साथ साथ आधुनिकता के समावेश को फोटोग्राफ और कलाकृतियों के जरिये प्रदर्शित किया गया है। इस क्षेत्र के लोगों के लिए कृषि और पशुपालन आय का मुख्य स्त्रोत है।
स्टेशन को मिट्टी का रंग दिया गया है ताकि ग्रामीण और शहरी मूल्यों का जीवंत रूप में पेश किया जा सके। कलाकृतियों के जरिये सामाजिक मूल्यों के भावी जीवनशैली को एक साथ दिखाया गया है। नजफगढ़ और एांसा के बीच बारहमासी झील के इर्द गिर्द वन्य जीवों के अलावा हर साल प्रवासी पक्षियों का भी बसेरा होता है। तोते, बाज, बत्तख, किंगफिशर के अलावा सर्दियों में प्रवासी पक्षियां की मौजूदगी से क्षेत्र की खूबसूरती में चार चांद लगते हैं।
मेले के रंगों से होकर गुजरेंगे मेट्रो यात्री
आसपास के गांवों की कई प्राचीन कथाएं प्रचलित हैं। गांव के एतिहासिक महत्व के कारण यहां मेलों का भी हर साल आयोजन किया जाता है। पौराणिक कथाओं में इस क्षेत्र को एक अनूठी पहचान दी गई है। समृद्ध स्वभाव और मान्यताओं के आयोजन से प्रेरित हाथ से बनी कुछ कलाकृतियों को स्थानीय सामाजिक सांस्कृतिक परिदृश्य के तौर पर परिभाषित किया गया है। कलाकृतियों में मेलों के दृश्य भी प्रदर्शित किए गए हैं, जिनमें स्थानीय डिजाइन को मूल रूप में दिखाया गया है।