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Delhi: स्थायी समिति की शक्तियों के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं मेयर शैली ओबेरॉय , भाजपा ने साधा महापौर पर निशाना

Mon, 29 Jan 2024 01:42 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 29 Jan 2024 01:42 AM IST
सार

उन्होंने अपनी याचिका में उपराज्यपाल को एक पक्ष के रूप में शामिल किया है। उन्होंने दलील दी कि स्थायी समिति का गठन न होने पर एमसीडी का काम ठप हो गया है।

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Delhi: Mayor Shaili Oberoi reached the Supreme Court for the powers of the Standing Committee.
मेयर शैली ओबेरॉय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एमसीडी की स्थायी समिति के कार्यों को सदन से संचालित करने की मांग को लेकर मेयर डॉ. शैली ओबेरॉय ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। उन्होंने अपनी याचिका में उपराज्यपाल को एक पक्ष के रूप में शामिल किया है। उन्होंने दलील दी कि स्थायी समिति का गठन न होने पर एमसीडी का काम ठप हो गया है।

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दरअसल स्थायी समिति का गठन सुप्रीम कोर्ट के समक्ष नामांकित व्यक्तियों की नियुक्तियों की वैधता पर निर्णय लंबित होने के कारण रुका हुआ है। लिहाजा स्थायी समिति का गठन न होने तक सदन के माध्यम से एमसीडी के कामकाज को सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट हस्तक्षेप करें।
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मेयर ने याचिका में तर्क दिया है कि कानून का उल्लंघन करते हुए उपराज्यपाल ने दिल्ली सरकार की सहायता और सलाह के बिना नामांकित व्यक्तियों को नियुक्त किया। इन नियुक्तियों की वैधता पर दिल्ली सरकार बनाम उपराज्यपाल कार्यालय के केस में फैसले का इंतजार है।
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इस बारे में 17 मई 2023 को फैसला सुरक्षित रखा गया था। इन नियुक्तियों की वैधता का निर्धारण सीधे और महत्वपूर्ण रूप से स्थायी समिति के 18 सदस्यों में से 12 सदस्यों के चुनाव को प्रभावित करता है, जिससे बहुमत की प्राप्ति पर सीधा प्रभाव पड़ता है। इस वजह से स्थायी समिति असंरचित बनी हुई है।

उन्होंने उल्लेख किया है कि कोर्ट उचित समय पर अपना फैसला सुनाएगी, लेकिन वर्तमान मुद्दा यह है कि स्थायी समिति की ओर से किए जाने वाले कार्य रुक गए हैं। खासकर पांच करोड़ रुपये से अधिक व्यय वाले कार्य, अगले वर्ष होने वाले खर्च के लिए वर्तमान वर्ष से परे किसी भी खर्च को शामिल करने, नगरपालिका सचिव या नगरपालिका मुख्य लेखा परीक्षक के अधीन एमसीडी अधिकारियों की नियुक्ति करने, बजट अनुदान में संशोधन की सिफारिश करने आदि कार्य प्रभावित हो गए है।

वहीं स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों के लिए पाठ्य पुस्तकों व चिकित्सा आपूर्ति की खरीद से लेकर सार्वजनिक पार्कों, सार्वजनिक शौचालयों और अन्य सुविधाओं के रखरखाव के कार्य से जुड़ी योजनाएं भी लटकी हुई हैं। उन्होंने कहा कि सदन ने 15 जनवरी 2024 को एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें यह तय किया गया है कि वर्तमान स्थिति से निपटने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जाए।

भाजपा ने साधा मेयर पर निशाना
प्रदेश भाजपा की महासचिव व वरिष्ठ पार्षद कमलजीत सहरावत ने स्थायी समिति के अधिकार सदन को देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट जाने पर मेयर पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि स्थायी समिति में बहुमत न मिलने की आशंका के कारण आम आदमी पार्टी स्थायी समिति का चुनाव नहीं करा रही है।


मेयर का सुप्रीम कोर्ट जाने का निर्णय पूरी तरह डीएमसी एक्ट का सम्मान नहीं करने के समान है। दरअसल स्थायी समिति के गठन पर रोक नहीं है, मगर आप तानाशाही के कारण चुनाव नहीं करा रही।

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