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उपराज्यपाल सक्सेना का निर्देश: नालों से गाद निकालने के लिए नई पद्धति अपनाएं, इस प्रणाली पर दिया जोर

Tue, 16 Aug 2022 10:40 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रशांत कुमार Updated Tue, 16 Aug 2022 10:40 PM IST
सार

उपराज्यपाल ने कहा कि नालों से गाद निकालने के लिए पार्शियल ग्रेविटेशनल डी-सिल्टिंग प्रणाली को अपनाएं। बाढ़ नियंत्रण विभाग के प्रधान सचिव समेत दूसरे अधिकारियों को इस प्रणाली का अधिक से अधिक लाभ उठाने को कहा। 

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delhi Lieutenant Governor Instruction to adopt Partial Gravitational De-silting System to remove silt
उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना - फोटो : अमर उजाला, फाइल फोटो

विस्तार

उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने बाढ़ व सिंचाई विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि नालों से गाद निकालने के लिए पार्शियल ग्रेविटेशनल डी-सिल्टिंग प्रणाली को अपनाएं। यह नई पद्धति न केवल स्थायी है बल्कि कम खर्च में गाद का निपटारा संभव है। नजफगढ़ ड्रेन में वैज्ञानिक तरीके से किए जा रहे डी-सिल्टिंग कार्यों का शनिवार को निरीक्षण करने के बाद ये निर्देश दिए। सफाई के बाद नजफगढ़ ड्रेन को इको टूरिज्म हब के तौर पर विकसित किया जाएगा ताकि दिल्लीवासियों को बोटिंग, वाटर स्पोर्ट्स सहित दूसरी मनोरंजक गतिविधियों में शामिल होने का मौका मिल सके। 

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नालों की सफाई के लिए हाल ही में पार्शियल ग्रेविटेशनल डी-सिल्टिंग प्रणाली की शुरुआत की गई है। उपराज्यपाल को गुजरात के बंदरगाहों में ड्रेजिंग कार्यों का व्यापक अनुभव है। यह पहला मौका है जब किसी उपराज्यपाल ने नजफगढ़ ड्रेन में प्रवेश किया है। उपराज्यपाल ने इसी पद्धति के जरिये बंदरगाहों के ड्रेजिंग कार्यों को पारंपरिक पद्धति से गाद मुुक्त किया। सक्सेना ने पंजाबी बाग के नजदीक स्थित नाले (नजफगढ़ ड्रेन) में मोटर बोट द्वारा प्रवेश करीब एक घंटे तक एक किलो मीटर के दायरे में चल रहे कार्यों का निरीक्षण किया। 

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गाद को तोड़ने के बाद होती है सफाई 

पार्शियल ग्रेविटेशनल डी-सिल्टिंग पद्धति के जरिये सिल्ट (गाद) को तोड़ा और मथ दिया जाता है। इससे ड्रेन में बहने वाला पानी सिल्ट को अपने साथ बहाकर ले जाता है। इस प्रक्रिया में एकत्रित हुए सिल्ट को मथने का कार्य नाव में लगे रेकर और स्पाइक यंत्र के द्वारा किया जाता है। नाव में लगे संशोधित उपकरण नाले के अंदर तक के सिल्ट को तोड़ देते हैं। पानी का बहाव तेज होने पर सिल्ट खुद ही नाले के पानी के साथ बह जाती है।


 

ड्रेन में गिरते हैं 121 छोटे नालों के सीवेज

नजफगढ़ ड्रेन की लंबाई 57 कि.मी. है और इसमें 121 छोटे ड्रेन के सीवेज गिरते हैं। नाले में सालाना 2-2.5 लाख घन मीटर गाद जमा होती है  और फिलहाल करीब 85 लाख घन मीटर गाद ड्रेन में एकत्रित है। 

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रफ्तार नहीं बढ़ी तो डी-सिल्टिंग में लग सकते हैं 50 वर्ष

पिछले 40-50 वर्षों में गाद के दो बड़े टीले भी बन गए हैं जहां 45 लाख क्यूबिक मीटर गाद है। नजफगढ़ नाले का सफाई और गाद निकालने के लिए विभाग के पास सीमित संसाधन है। महज तीन फ्लोटिंग उपकरण हैं और जिनसे 60-65 लाख क्यूबिक मीटर गाद निकाला जा सकता है। अगर यही रफ्तार रही तो पूरे नजफगढ़ ड्रेन की डी-सिल्टिंग में 50 वर्ष से अधिक का समय लग सकता है।

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