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Delhi: पति की प्रेमिका से पत्नी बोली- तुमने मेरा रिश्ता तोड़ा... एक करोड़ हर्जाना दो, जानें कोर्ट ने क्या कहा

Tue, 23 Sep 2025 11:59 AM IST
आकाश द्विवेदी अमर उजाला ब्यूरो, दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, दिल्ली Published by: आकाश द्विवेदी Updated Tue, 23 Sep 2025 11:59 AM IST
सार

महिला ने अपने पति की प्रेमिका पर रिश्ता तोड़ने का आरोप लगाकर एक करोड़ रुपये का हर्जाना मांगा है। महिला का आरोप है कि प्रेमिका ने जानबूझकर उसके वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप किया, जिससे पति का स्नेह अलग हो गया। 

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wife filed petition husband girlfriend demanding compensation of Rs 1 crore in delhi high court
दिल्ली हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

विवाहेतर संबंधों के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि कोई महिला अपने पति की प्रेमिका के खिलाफ प्रेम अलगाव (एलाइनेशन ऑफ एफेक्शन) के आधार पर सिविल मुकदमा दायर कर हर्जाना मांग सकती है। 

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अदालत ने स्पष्ट किया कि व्यभिचार को अपराधमुक्त करने का मतलब यह नहीं है कि तीसरे पक्ष को सिविल परिणामों से मुक्ति मिल जाए। एक मामले में पत्नी ने पति की प्रेमिका पर रिश्ता तोड़ने का आरोप लगाकर एक करोड़ का हर्जाना मांगा है।
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न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की एकलपीठ ने इस मामले में पत्नी के दावे को सशर्त मान्य ठहराते हुए प्रेमिका से पक्ष रखने को कहा। पीठ ने कहा कि हिंदू मैरिज एक्ट या किसी अन्य वैवाहिक कानून में तीसरे पक्ष के कृत्यों के खिलाफ कोई स्पष्ट उपाय नहीं है। वैवाहिक कानून के अभाव में और किसी वैधानिक प्रतिबंध के बिना, तीसरे पक्ष के खिलाफ हर्जाने का सिविल मुकदमा सिविल कोर्ट में चलाया जा सकता है।
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महिला ने मांगा हर्जाना
एक महिला ने अपने पति की कथित प्रेमिका पर रिश्ता तोड़ने का आरोप लगाकर एक करोड़ रुपये का हर्जाना मांगा है। महिला का आरोप है कि प्रेमिका ने जानबूझकर उसके वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप किया, जिससे पति का स्नेह अलग हो गया और वैवाहिक संबंध टूट गए। पति और प्रेमिका ने मुकदमे को खारिज करने की मांग की थी। 

हाईकोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता का प्रयोग अपराध नहीं है, इसलिए सरकार इसे दंडित नहीं कर सकती। यह व्यवहार सिविल परिणामों को जन्म दे सकता है। जोसेफ शाइन फैसले ने व्यभिचार को अपराधमुक्त किया, लेकिन विवाह से बाहर अंतरंग संबंध बनाने का लाइसेंस नहीं दिया, जो सिविल या कानूनी परिणामों से मुक्त हो।


अदालत ने एलाइनेशन ऑफ एफेक्शन को एंग्लो-अमेरिकन कॉमन लॉ से लिया गया हार्ट-बाम टॉर्ट बताया, जो भारत में स्पष्ट रूप से मान्यता प्राप्त नहीं है। पीठ ने कहा कि कोई व्यक्ति विवाह के बाहर अंतरंग संबंध बनाने का पूर्ण अधिकार नहीं रखता।

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