{"_id":"5f7dae0f8ebc3e9b8409e867","slug":"delhi-high-court-rejects-pil-which-demand-direction-to-universities-to-just-take-tuition-fees-in-covid-19-times","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की विश्वविद्यालयों को सिर्फ ट्यूशन फीस लेने के निर्देश देने वाली जनहित याचिका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज की विश्वविद्यालयों को सिर्फ ट्यूशन फीस लेने के निर्देश देने वाली जनहित याचिका
Wed, 07 Oct 2020 05:31 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Wed, 07 Oct 2020 05:31 PM IST
विज्ञापन
दिल्ली हाईकोर्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को उस जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया जिसमें विश्वविद्यालयों को कोरोना महामारी के कारण सिर्फ ट्यूशन फीस लेने के निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। पीठ ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि रियायत अधिकार का मामला नहीं है। लिहाजा इस संबंध में कोई निर्देश नहीं दिया जा सकता।
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने संबंधित प्राधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इस मुद्दे को प्रतिवेदन के तौर पर देखें और कानून व सरकारी नीति के तहत इसका समाधान निकालें। पीठ ने कहा कि विश्वविद्यालयों को अपने प्रोफेसरों को भुगतान करना है और ऑनलाइन कक्षाओं के लिए बुनियादी ढांचे का निर्माण भी करना है। इसलिए उन्हें रियायतें देने के लिए नहीं कहा जा सकता। पीठ ने जनहित याचिका में छात्रों को गैजेट और 4जी इंटरनेट पैक प्रदान करने जैसी कई राहतों से असहमति जताई।
यह याचिका कानून के चौथे वर्ष के छात्र की ओर से दायर की गई थी। याचिका पर वकील कुश शर्मा से पीठ ने कहा कि आप स्वर्ग और आकाश मांग सकते हैं, लेकिन जरूरत की चीजें नहीं मांग सकते। आखिर मांगने में क्या हर्ज है। पीठ ने कहा कि इस तरह की याचिका जुर्माने के साथ खारिज करने लायक है, लेकिन हम ऐसा नहीं कर रहे हैं।
विज्ञापन
याची की मांग थी कि अभिभावकों को शुल्क जमा करने के लिए अधिक समय दिया जाए। ऐसे छात्रों को गैजेट और तेज गति वाला इंटरनेट कनेक्शन प्रदान करें जो इसका खर्च नहीं उठा सकते। याची का आरोप था कि फीस न भरने पर बच्चों का नाम काटने की धमकी कुछ संस्थान दे रहे हैं।
विज्ञापन
मुख्य न्यायाधीश डी एन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने संबंधित प्राधिकारियों को निर्देश दिया कि वे इस मुद्दे को प्रतिवेदन के तौर पर देखें और कानून व सरकारी नीति के तहत इसका समाधान निकालें। पीठ ने कहा कि विश्वविद्यालयों को अपने प्रोफेसरों को भुगतान करना है और ऑनलाइन कक्षाओं के लिए बुनियादी ढांचे का निर्माण भी करना है। इसलिए उन्हें रियायतें देने के लिए नहीं कहा जा सकता। पीठ ने जनहित याचिका में छात्रों को गैजेट और 4जी इंटरनेट पैक प्रदान करने जैसी कई राहतों से असहमति जताई।
विज्ञापन
यह याचिका कानून के चौथे वर्ष के छात्र की ओर से दायर की गई थी। याचिका पर वकील कुश शर्मा से पीठ ने कहा कि आप स्वर्ग और आकाश मांग सकते हैं, लेकिन जरूरत की चीजें नहीं मांग सकते। आखिर मांगने में क्या हर्ज है। पीठ ने कहा कि इस तरह की याचिका जुर्माने के साथ खारिज करने लायक है, लेकिन हम ऐसा नहीं कर रहे हैं।
विज्ञापन
याची की मांग थी कि अभिभावकों को शुल्क जमा करने के लिए अधिक समय दिया जाए। ऐसे छात्रों को गैजेट और तेज गति वाला इंटरनेट कनेक्शन प्रदान करें जो इसका खर्च नहीं उठा सकते। याची का आरोप था कि फीस न भरने पर बच्चों का नाम काटने की धमकी कुछ संस्थान दे रहे हैं।