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मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरना: हाईकोर्ट ने कहा, विरोध प्रदर्शन करना मौलिक अधिकार लेकिन रिहायशी इलाके में नहीं

Thu, 17 Dec 2020 06:47 PM IST
Mohit Mudgal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Mohit Mudgal Updated Thu, 17 Dec 2020 06:47 PM IST
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delhi high court comment on mcd mayors protest in front of kejriwal residence
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास के बाहर प्रर्दशन करते तीनों निगमों के महापौर - फोटो : अमर उजाला

उच्च न्यायालय ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास के समक्ष जारी धरने पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने कहा विरोध प्रदर्शन करना मौलिक अधिकार है, लेकिन रिहायशी इलाके में धरने पर बैठने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

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न्यायमूर्ति संजीव सचदेव ने तीनों महापौर द्वारा धरना स्थल से ही कामकाज करने पर संज्ञान लेते हुए कहा रिहायशी इलाके में इस तरह से धरना गलत परंपरा को जन्म दे सकती है। निगम फंड की मांग को लेकर तीनों नगर निगमों के महापौर पिछले 12 दिन से मुख्यमंत्री आवास के बाहर धरने पर बैठे है।
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अदालत ने धरने से परेशान सिविल लाइंस रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की है। उन्होंने कहा है कि विरोध,धरना शांतिपूर्ण हो सकता है, लेकिन यदि एक बार परंपरा कायम हो जाती है तो कोई भी वहां आकर बैठ जाएगा जैसा कि वे रामलीला मैदान या जंतर मंतर जैसे जगहों पर करते हैं, जो विरोध प्रदर्शनों के लिए निर्दिष्ट स्थान हैं। 
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अदालत ने कहा है कि इसमें कोई समस्या नहीं है, जब आप आते हैं, विरोध करते हैं और फिर चले जाते हैं। मौजूदा धरना 11 दिनों तक लगातार चल रहा है और एक बार जब आप एक मिसाल कायम करते हैं, तो कोई भी आ जाएगा और वहां बैठ जाएगा। अदालत ने रामलीला मैदान व जंतर मंतर का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि ऐसा करने की अनुमति हमेशा दिया गया तो आप जानते हैं कि रामलीला मैदान और जंतर मंतर जैसे जगहों पर जहां धरना और विरोध प्रदर्शन की अनुमति है, कि क्या स्थिति होती है।

अदालत ने सुनवाई शुक्रवार को भी जारी रखने का निर्देश देते हुए कहा कि आवासीय कॉलोनी में उस तरह की स्थिति नहीं होने दी जा सकती है। उन्होंने कहा धरने से इलाके में सड़क पर यातयात अवरुद्ध कर दिया गया है और इससे लोगों को परेशानी हो रही है।


धरना स्थल पर के कार्यालय पर उठाया सवाल
अदालत ने धरना स्थल पर तीनों महापौर के कार्यालय चलाने पर भी सवाल उठाया। अदालत ने पुलिस से पूछा कि मुख्यमंत्री आवास के बाहर  टेंट कैसे लगा दिए गए हैं और मीडिया खबरों के अनुसार महापौर अपना दफ्तर वहीं से चला रहे हैं। अदालत ने दिल्ली पुलिस से यह बताने के लिए कहा है कि वहां से दफ्तर कैसे चलाया जा सकता है और धरना पर बैठे लोग अपना नित्यक्रिया या मल-मूत्र त्यागने कहां जा रहे हैं। 

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