फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Delhi HC orders stay on the decision ordering Delhi police to give 75 lakhs amount to injured

घायल युवक को 75 लाख का मुआवजा देने वाले आदेश पर दिल्ली उच्च न्यायालय ने लगाई रोक

Wed, 09 Sep 2020 10:55 PM IST
प्राची प्रियम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्राची प्रियम Updated Wed, 09 Sep 2020 10:55 PM IST
विज्ञापन
Delhi HC orders stay on the decision ordering Delhi police to give 75 lakhs amount to injured
दिल्ली उच्च न्यायालय - फोटो : PTI

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को अपने उस आदेश के अमल पर रोक लगा दी जिसमें एक युवक के परिवार को 75 लाख रुपये के मुआवजे का भुगतान करने के लिए दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया गया था। 

विज्ञापन


यह युवक सड़क पर एक साथ लगाए गए अवरोधकों की वजह से दुर्घटना का शिकार हुआ था और तब से 'वेजिटेटिव’ अवस्था में है। इस अवस्था में व्यक्ति जागृत स्थिति में रहता है, लेकिन वह किसी भी चीज पर प्रतिक्रिया नहीं करता है।
विज्ञापन


मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने एकल न्यायाधीश के 18 मई के आदेश के अमल पर रोक लगा दी है। उस आदेश में दिल्ली पुलिस के अपने कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही बरतने और नाकाम रहने के लिए पीड़ित को क्षतिपूर्ति के लिए पात्र ठहराया गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


खंडपीठ ने 18 मई के आदेश के खिलाफ दिल्ली पुलिस की अपील पर आदेश पारित किया है। उच्च न्यायालय ने अपील को स्वीकार कर लिया और अंतिम सुनवाई के लिए मामले को 22 अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

दिल्ली पुलिस की तरफ से पेश हुए अतिरिक्त स्थायी अधिवक्ता गौतम नारायण ने पीठ को कहा कि एकल न्यायाधीश के समक्ष उठाए गए मुद्दे रिट याचिका में विचारणीय नहीं है, क्योंकि इसमें तथ्यों का प्रश्न शामिल है और क्षतिपूर्ति के लिए दीवानी मुकदमा दायर किया जा सकता था।

वकील ने पीठ को बताया कि उच्चतम न्यायालय का एक फैसला है जो कहता है कि जिन मामलों में तथ्यों का प्रश्न शामिल हो, उनमें केवल दीवानी मुकदमा ही विचारणीय है। उन्होंने कहा कि 75 लाख रुपये की रकम को दिल्ली उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा करा दिया गया है।

पीठ ने निर्देश दिया कि राशि को किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में सावधि जमा में रखा जाए। एकल न्यायाधीश ने कहा था कि अवरोधकों पर ऐसी कोई चीज नहीं लगी हुई थी, जिससे वे दूर से दिखाई दे सकें।
 

उच्च न्यायालय ने 2015 की इस घटना के संबंध में याचिकाकर्ता धीरज कुमार को 75 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्देश दिया। उस समय कुमार 21 साल के थे।

घटना दिसंबर 2015 में वेस्ट पंजाबी बाग इलाके के निकट हुई थी, उस वक्त कुमार और उनके पिता मोटरसाइकिल से घर जा रहे थे। इस दौरान उनकी मोटर साइकिल पुलिस अवरोधकों से टकरा गई थी ।

पीड़ित को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कई ऑपरेशनों और इलाज के बाद उसे बेहोशी की हालत में ही छुट्टी दी गई थी। अदालत को बताया गया कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के सारांश रिकॉर्ड के मुताबिक वह स्पष्ट रूप से सोचने या ध्यान केंद्रित करने में असमर्थ था और अब तक उसकी हालत ऐसी ही है।

युवक के पिता ने उच्च न्यायालय का रुख कर इलाज का खर्च, आय का नुकसान समेत अन्य कारणों का हवाला देकर मुआवजे का अनुरोध किया था।

वहीं, पुलिस ने कहा था कि हादसा कुमार की लापरवाही के कारण हुआ। वह तेज गति से बाइक चला रहा था और अवरोधकों से टक्कर नहीं हो, इसके लिए समय पर ब्रेक नहीं लगा पाया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed