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Delhi: HC ने पॉक्सो मामले में आरोपी को दी जमानत, कहा- लड़की के घरवालों की वजह से युवाओं को जाना पड़ता है जेल
Wed, 14 Aug 2024 05:23 PM IST
श्याम जी.
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: श्याम जी.
Updated Wed, 14 Aug 2024 05:23 PM IST
सार
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक फैसले की सुनवाई करते हुए आरोपी किशोर को जमानत दे दी। आरोपी किशोर लड़की से दुष्कर्म के मामले में पॉक्सो के तहत जेल में बंद था। कोर्ट ने कहा कि अधिकतर मामले में लड़की के घरवालों को लड़के और लड़की के रिश्ते को लेकर आपत्ति होती है। वे केस दर्ज करा देते हैं और लड़के को जेल में जीवन गुजरना पड़ता है।
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Delhi High Court
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
हाईकोर्ट ने कहा ऐसे युवा लड़के जो वयस्कता से थोड़ी कम उम्र की लड़कियों से प्यार करते हैं और अपने रोमांटिक रिश्ते पर आपत्ति जताने वाले परिवारों के कहने पर दर्ज मामलों के कारण जेलों में सड़ रहे हैं। अदालत ने ऐसे मामलों में कानून के गलत इस्तेमाल पर टिप्पणी करते हुए एक नाबालिग लड़की से दुष्कर्म के आरोपी युवक को पॉक्सो मामले में जमानत दे दी।
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न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि 18 वर्ष से कम आयु की लड़कियों और 20 वर्ष से अधिक आयु के लड़कों के बीच सहमति से यौन संबंध बनाना कानूनी रूप से संदिग्ध है, क्योंकि नाबालिग लड़की द्वारा दी गई सहमति कानून की नजर में वैध सहमति नहीं है। अदालत ने कहा याचिकाकर्ता के भविष्य को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, यदि वह जेल में बंद रहता है, तो उसके एक कठोर अपराधी के रूप में बाहर आने की संभावना बहुत अधिक है।
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वर्तमान मामले में लड़की की मां ने अपनी बेटी के संबंध में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी, जो बाद में याचिकाकर्ता के साथ रहती पाई गई। मामेल में यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम के तहत व अपहरण, गंभीर यौन उत्पीड़न और दुष्कर्म के अपराधों के लिए प्राथमिकी दर्ज की गई थी। अभियोक्ता ने शुरू में दावा किया कि वह अपनी मर्जी से अपने प्रेमी, याचिकाकर्ता के साथ गई थी और उससे शादी कर ली है तथा अब वह गर्भवती है, लेकिन बाद में वह अपने रुख से मुकर गई।
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अदालत ने कहा उनका मानना है कि वर्तमान मामला प्रेम प्रसंग का है इस समय यह न्यायालय इस प्रश्न पर विचार नहीं कर रहा है कि क्या याचिकाकर्ता ने (पोकसो और आईपीसी के तहत) अपराध किए हैं। यह न्यायालय केवल इस बात से चिंतित है कि क्या एक युवा जो पिछले तीन वर्षों से जेल में है, उसे जमानत दी जानी चाहिए या नहीं, इस तथ्य के मद्देनजर कि अभियोक्ता ने अपने बयानों में अपना रुख बदल दिया है।
अदालत ने कहा लगातार देखा जा रहा है कि पोक्सो मामले लड़की के परिवार के इशारे पर दायर किए जा रहे हैं, जो एक युवा लड़के के साथ उसकी दोस्ती और प्रेम संबंधों पर आपत्ति जताते हैं और ऐसे मामलों में कानून का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप युवा लड़के, जो वास्तव में 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों से प्यार करते हैं, जेलों में सड़ रहे हैं।
अदालत ने आगे कहा कि इससे पहले भी याचिकाकर्ता दो बार अपने घर से भाग चुकी है और डॉक्टरों को दिए गए उसके बयान के अनुसार उसकी मां को इस रिश्ते के बारे में पता था। लड़की के बयान के अनुसार उसकी मां ने केवल इसलिए एफआईआर दर्ज कराई है क्योंकि याचिकाकर्ता ने अपना धर्म बदलने से इनकार कर दिया था, इससे यह संकेत मिलता है कि वर्तमान एफआईआर अभियोक्ता के माता-पिता के कहने पर दर्ज कराई गई थी, जो याचिकाकर्ता और अभियोक्ता के बीच के रिश्ते को स्वीकार नहीं करते थे।