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हैप्पीनेस करिकुलम को मिली अंतरराष्ट्रीय पहचान
Fri, 20 Nov 2020 02:23 PM IST
विक्रांत चतुर्वेदी
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: विक्रांत चतुर्वेदी
Updated Fri, 20 Nov 2020 02:23 PM IST
सार
- हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने हैप्पीनेस करिकुलम को सराहा
- हार्वर्ड विश्वविद्यालय द्वारा दिल्ली के हैप्पीनेस करिकुलम पर ऑनलाइन चर्चा
- छात्रों का माइंडसेट विकसित करने का प्रयास है- मनीष सिसोदिया
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दिल्ली के सरकारी स्कूल
- फोटो : Twitter
विस्तार
दिल्ली के सरकारी स्कूलों में चल रहे हैप्पीनेस करिकुलम को अब अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलने लगी है। करिकुलम पर दुनिया केप्रतिष्ठित संस्थान हॉर्वर्ड विश्वविद्यालय ने एक ऑनलाइन चर्चा आयोजित की। चर्चा में करिकुलम को काफी सराहा गया। इसमें मुख्य वक्ता के रुप में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया शामिल हुए। उन्होंने कहा कि हमने ऐसा पाठ्यक्रम बनाया है जो छात्रों को जीवन भर अच्छी सोच के लिए तैयार करे।
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हार्वर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ एजुकेशन (एचजीएसई) के अंतरराष्ट्रीय शिक्षा सप्ताह के दौरान यह ऑनलाइन पैनल चर्चा आयोजित हुई। इस चर्चा का विषय था हैप्पीनेस पाठ्यक्रम के जरिए सामाजिक और भावनात्मक शिक्षा। इसमें एचजीएसई स्थित प्रैक्टिस इन इंटरनेशनल एजुकेशन के फोर्ड फाउंडेशन प्रोफेसर फर्नाडो रीमर तथा हैप्पीनेस करिकुलम कमेटी के अध्यक्ष डॉ अनिल तेवतिया भी शामिल हुए।
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उपमुख्यमंत्री ने चर्चा में कहा कि हैप्पीनेस पाठ्यक्रम कोई नैतिक शिक्षा कार्यक्रम नहीं है जो छात्रों को नैतिक मूल्यों के बारे में उपदेश देता है। यह छात्रों की मानसिकता को विकसित करने पर केंद्रित है। जिससे छात्र अपने जीवन, दृष्टिकोण और व्यवहार में मूल्यों को अपनाएं।
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इस दौरान पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि शिक्षा समाज में सुधार का एकमात्र तरीका है। राजनेताओं को बेहतर शिक्षा के माध्यम से शिक्षा के सहायक के रूप में काम करना चाहिए। शिक्षा ही एकमात्र ऐसा उपकरण उपलब्ध है जो समाज में सुधार कर सकता है, और हमें ऐसा समाज दे सकता है, जिसका हम सभी सपना देखते हैं।
प्रो रीमर ने कहा कि हैप्पीनेस करिकुलम शिक्षकों में क्षमता.निर्माण की बड़ी चुनौती से निपटने में काफी मददगार साबित हुआ है। सभी स्कूलों में ऐसी कक्षाएं काफी प्रभावशाली हैं। उन्होंने कहा कि आज कोरोना महामारी के कारण दुनिया एक अनिश्चित भविष्य की तरफ बढ़ रही है। ऐसे में हमें शिक्षा के उद्देश्यों पर गहराई के साथ सवाल करना जरूरी है।