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Delhi Groundwater: दूषित भूजल से निपटने में लापरवाही पर एनजीटी की फटकार, जल स्रोतों पर अधिकारियों से जवाब तलब

Fri, 08 Aug 2025 05:44 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 08 Aug 2025 05:44 AM IST
सार

अदालत ने डीजेबी और डीपीसीसी को चार सप्ताह के अंदर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा। साथ ही, आवेदक को कानूनी सलाहकार नियुक्त करने का समय दिया। मामले में अगली सुनवाई 4 नवंबर को होगी।

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Delhi Groundwater: NGT reprimands for negligence in dealing with contaminated groundwater
एनजीटी - फोटो : संवाद

विस्तार

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने आवासीय सोसाइटियों में खराब और दोषपूर्ण वर्षा जल संचयन प्रणालियों (आरडब्ल्यूएच) के चलते द्वारका में भूजल प्रदूषण से निपटने में दिल्ली के अधिकारियों की तरफ से की गई अपर्याप्त कार्रवाई पर फटकार लगाई है। ऐसे में अदालत ने डीजेबी और डीपीसीसी को चार सप्ताह के अंदर विस्तृत कार्रवाई रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा। साथ ही, आवेदक को कानूनी सलाहकार नियुक्त करने का समय दिया। मामले में अगली सुनवाई 4 नवंबर को होगी।

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अदालत ने यह भी नोट किया कि मूल 2021 के आदेश में डीजेबी, डीपीसीसी और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) को शामिल करते हुए संयुक्त सुधारात्मक कार्य योजना अनिवार्य की गई थी। चूंकि सीपीसीबी को मौजूदा निष्पादन कार्यवाही में पक्ष नहीं बनाया गया था, इसलिए आवेदक को इसे शामिल करने के लिए उचित कदम उठाने की अनुमति दी गई।
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यह मामला 2021 में दायर एक मूल आवेदन से उत्पन्न हुआ है, जिसमें द्वारका की आवासीय कॉलोनियों में दोषपूर्ण या उपेक्षित वर्षा जल संचयन बुनियादी ढांचे के कारण भूजल प्रदूषण के बारे में चिंता जताई गई थी। एनजीटी ने पहले डीजेबी, डीपीसीसी और सीपीसीबी द्वारा एक संयुक्त कार्य योजना सहित सुधारात्मक उपायों का आदेश दिया था। सुनवाई के दौैरान आवेदक महेश चंद्र सक्सेना अधिकरण के सामने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। उन्होंने संबंधित एजेंसियों की तरफ से पूर्व में जारी किए गए उपचारात्मक निर्देशों को लागू करने में निरंतर विफलता पर जोर दिया। दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) ने 22 जुलाई, 2025 को पुनः प्रस्तुत की गई एक नई रिपोर्ट में द्वारका में 176 आवासीय सोसाइटियों में किए गए एक सर्वेक्षण के चौंकाने वाले निष्कर्ष प्रस्तुत किए गए।
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डीजेबी की रिपोर्ट से पता चला कि 115 सोसाइटियों में भूजल फीकल कोलीफॉर्म से दूषित था। चार सोसाइटियों में वर्षा जल संचयन (आरडब्ल्यूएच) प्रणालियां पूरी तरह से निष्क्रिय थीं। 25 सोसाइटियों में सूखे गड्ढे थे और केवल 32 सोसाइटियों में फीकल कोलीफॉर्म की कोई उपस्थिति नहीं पाई गई। अदालत ने पाया कि डीजेबी ने पहले 20 जनवरी, 2025 को दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) को सूचित किया था, जिसमें चूक करने वाली सोसाइटियों पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति (ईसी) लगाने की सिफारिश की गई थी। हालांकि, एनजीटी के समक्ष कोई ठोस अनुवर्ती कार्रवाई प्रस्तुत नहीं की गई, जिससे प्रवर्तन को लेकर चिंताएं पैदा हुईं।

जल स्रोतों के बिगड़ते हालात पर एनजीटी ने अधिकारियों से मांगा जवाब

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दिल्ली के जल स्रोतों की बिगड़ती स्थिति पर चिंता जताते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब दाखिल करने को कहा है। अदालत ने कहा कि अधिकारियों की तरफ से प्रस्तुत जवाब केवल असोला की 10 प्रमुख आर्द्रभूमियों तक ही सीमित था जिनके लिए पहले ही कदम उठाए जाने की बात कही गई थी लेकिन अन्य जलाशयों के संबंध में कोई प्रभावी जवाब नहीं मिला है। मामले में अगली सुनवाई 26 सितंबर को होगी। इस दौरान जल निकायों के संरक्षण और बहाली से जुड़े एक अन्य मामले पर भी सुनवाई होनी है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), दिल्ली राज्य नमभूमि प्राधिकरण और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने नई प्रतिक्रिया देने के लिए अदालत से समय मांगा था। यह मामला दिल्ली में जल स्रोतों पर अवैध अतिक्रमण और प्रदूषण से जुड़ा है। 12 मार्च को मीडिया रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने इस मामले को स्वतः संज्ञान में लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के कुल 142 छोटे जल स्रोतों में से 20 फीसदी पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया गया है। इनमें से 9 फीसदी को पार्क बना दिया गया है जबकि 12 फीसदी में दूषित पानी भर गया है। इससे पहले दिल्ली नमभूमि प्राधिकरण की तरफ से 7 अप्रैल को अदालत में सौंपी रिपोर्ट से पता चला है कि मौजूदा समय में दिल्ली में कुल 1,046 जल निकाय हैं।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि दिल्ली नमभूमि प्राधिकरण ने पहले चरण में 631 जल निकायों को पुनर्जीवित करने का निर्देश दिया है। इनमें से अब तक 256 जलाशयों के कायाकल्प का काम पूरा हो चुका है। इससे पहले भू-स्थानिक दिल्ली लिमिटेड (जीएसडीएल) ने ऐसे 322 स्थानों की पहचान की थी, जहां जलाशय है। मगर राजस्व विभाग की जमीनी पड़ताल में इनमें से सिर्फ 43 की ही पहचान हो पाई थी। ऐसे में नमभूमि प्राधिकरण ने राजस्व विभाग से इन 43 जल निकायों का मानचित्रण करने और उन्हें राजस्व रिकॉर्ड में जोड़ने को कहा था। वहीं, दिल्ली नमभूमि प्राधिकरण ने दो दिसंबर, 2024 को जानकारी दी थी कि शहर में कुल 1,367 जल निकाय हैं। इनमें से 1,045 सूची में हैं, जबकि 322 का पता उपग्रहों से प्राप्त तस्वीरों से चला है। इनमें से 674 के लिए जमीनी सत्यापन का काम पूरा हो चुका है। यह वो जल निकाय हैं जिन्हें साफ तौर पर देखा जा सकता है।

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