प्रगति मैदान में नियमों के साथ खिलवाड़, पर्यावरण मंत्री भड़के, डीपीसीसी को दिए सख्त कार्रवाई के आदेश
पिछले कुछ समय से प्रगति मैदान में चल रहे निर्माण कार्यों को लेकर शुक्रवार को जब पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने निरीक्षण किया तो लापरवाहियों को देख वे भड़क उठे। उन्होंने तत्काल दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को निर्माण करने वाली कंपनी के खिलाफ सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए। इसके बाद बोर्ड की ओर से कंपनी को नोटिस भी जारी कर दिया।
पर्यावरण मंत्री ने प्रगति मैदान में बन रहे अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी कम कन्वेंशन सेंटर, टनल और अकमोडेशन ब्लॉक्स का निरीक्षण किया था। उन्होंने बताया कि निरीक्षण के दौरान पर्यावरण संबंधी नियमों का पालन नहीं हो रहा था। साथ ही कंस्ट्रक्शन एंड डिमॉलिशन वेस्ट रूल 2016 का भी पालन नहीं हो रहा था। धूल को उड़ने से रोकने के लिए कोई इंतजाम नहीं थे। बिल्डिंग मैटीरियल जैसे मिट्टी आदि को न तो कवर किया था और न ही पानी डाला था। एप्रोच रोड और इंटरनल रोड पूरी तरह धूल से भरी हैं और सड़कों पर पानी का छिड़काव नहीं है, ट्रक भी यहां बिना ढके ही बिल्डिंग मैटीरियल लेकर आ रहे हैं।
हमारे यहां कोई लापरवाही नहीं
एक ओर पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन ने प्रगति मैदान में चल रहे निर्माण कार्यों को लेकर सवाल खड़े किए, वहीं आईटीपीओ अध्यक्ष एलसी गोयल ने स्पष्ट कहा कि उनके यहां किसी भी तरह की लापरवाही नहीं हो रही। दक्षिण दिल्ली नगर निगम और एनजीटी से मंजूरी मिलने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू किए गए हैं। उनका कहना है कि पर्यावरण मंत्री के निरीक्षण के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है, लेकिन अभी तक वे कंपनी के कार्यों से संतुष्ट हैं।
निर्माण कार्यों पर 10 दिन लगे रोक : सीपीसीबी
दिल्ली में इन दिनों प्रदूषण का स्तर कई गुना ज्यादा है। विशेषज्ञ दीवाली पर हवा में घुले जहर में और इजाफा होने की आशंका जता रहे हैं। इसीलिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने दिल्ली सहित पड़ोसी राज्य सरकारों को सलाह दी है कि 10 दिन तक दिल्ली-एनसीआर में निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
सीपीसीबी का मानना है कि निर्माण कार्यों के चलते भी वायु प्रदूषण हो रहा है। इसलिए 1 से 10 नवंबर तक निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध होना चाहिए। इसके अलावा 4 से 10 नवंबर तक बायोगैस एवं कोयले से चलने वाले सभी उद्योग भी बंद होने चाहिए। बोर्ड ने लिखा है कि पिछले वर्ष दिल्ली वायु प्रदूषण के चलते गैस चैंबर बन गई थी। इस बार पहले से अलर्ट नहीं हुए तो हालात बदतर हो सकते हैं।
निर्माण कार्य और उद्योगों को बंद करने के अलावा यातायात एवं परिवहन विभाग को भी इन 10 दिन तक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। सीपीसीबी ने पत्र में आम लोगों से भी अपील की है कि कि दीवाली तक निजी वाहनों का इस्तेमाल कम से कम करें, ताकि दिल्ली को जाम और धूल न झेलनी पड़े।