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पराली के धुएं से निजात दिलाने के लिए दिल्ली सरकार की कवायद तेज
Thu, 24 Sep 2020 05:57 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Thu, 24 Sep 2020 05:57 AM IST
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अरविंद केजरीवाल (फाइल फोटो)
- फोटो : Twitter @CMODelhi
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सर्दियों में दिल्ली की हवा को दमघोंटू होने से बचाने के लिए प्रदेश सरकार ने कवायद शुरू कर दी है। पर्यावरण मंत्री गोपाल राय के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी बुधवार को पूसा स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों के साथ बैठक की। इस मौके पर संस्थान की तरफ से पराली को लेकर विकसित अपनी नई तकनीक का प्रदर्शन भी किया गया।
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तकनीक पर संतोष जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र समेत राज्य सरकारों को पराली जलाने की समस्या के समाधान के लिए वैज्ञानिकों के साथ मिलकर काम करने की जरूरत है। साथ ही बृहस्पतिवार को संस्थान का दौरा करने की बात भी मुख्यमंत्री ने कही। मुख्यमंत्री ने विकास विभाग के अधिकारियों को तकनीक के लागत का विस्तृत विश्लेषण करने और बाहरी दिल्ली के सभी खेतों में इसके इस्तेमाल की संभावना पता करने के निर्देश दिए हैं।
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तकनीक देखने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में ठंड के मौसम में प्रदूषण का प्रमुख स्रोत धान की पराली और फसल के अन्य अवशेष हैं। संस्थान ने इस दिशा में बेहतर काम किया है। मुख्यमंत्री ने दिल्ली की आबोहवा साफ रखने के लिए इस तकनीक पर काम करने की जरूरत भी बताई। मुख्यमंत्री का मानना है कि अगर इसका इस्तेमाल सही तरीके से खेतों में किया जा सका तो पराली जलाने की समस्या को दूर किया जा सकता है।
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इससे पहले पर्यावरण मंत्री गोपाल राय ने संस्थान का दौरा कर इस तकनीक को देखा था। उन्होंने तकनीक का डेमो देखा था और मुख्यमंत्री से इस बारे में चर्चा करने की बात कही थी। इसी कड़ी में संस्थान के वैज्ञानिक मुुख्यमंत्री से मिले और पराली के निपटान के तकनीक पर चर्चा की। बातचीत के बाद मुख्यमंत्री ने तय किया कि वह बृहस्पतिवार को संस्थान का दौरा करके तकनीक का लाइव डेमो देखेंगे।
पूसा डी-कंपोजर तकनीक माना जा रहा बेहतर
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की तकनीक को पूसा डी-कंपोजर कहा जा रहा है। इसमें फसल वाले खेतों में केमिकल का छिड़काव किया जा सकता है। इससे 8-10 दिनों में फसल के डंठल अपने आप खत्म हो जाता है। कैप्सूल की लागत केवल 20 रुपये प्रति एकड़ है और प्रभावी रूप से प्रति एकड़ 4-5 टन कच्चे भूसे का निस्तारण किया जा सकता है। पंजाब और हरियाणा के कृषि क्षेत्रों में पिछले चार सालों के शोध परिणाम बेहतर रहे हैं।
ईपीसीए ने भी कसी कमर
पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण एवं संरक्षण प्राधिकरण (ईपीसीए) ने भी हवा की साफ रखने के लिए सख्ती बढ़ा दी है। प्राधिकरण अध्यक्ष भूरेलाल दिल्ली समेत पंजाब, हरियाणा व राजस्थान में प्रदूषण के हॉटस्पॉट का दौरा कर स्थिति का जायजा ले रहे हैं। इस बारे में संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों को ईपीसीए अपनी रिपोर्ट भी भेज रहा है। इसी कड़ी में ईपीसीए ने दिल्ली के सभी 18 हॉटस्पॉट पर 15 अक्तूबर से रात में गश्त शुरू करने के लिए दिल्ली के अधिकारियों को कहा है। यही नहीं, इस बीच अगर दिल्ली में कहीं नए हॉट स्पॉट बने हैं तो उनकी भी पहचान की जाएगी। ईपीसीए का मानना है कि दिल्ली के हॉटस्पॉट पर निगरानी रखने के साथ वहां प्रदूषण के स्रोत को खत्म करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है।