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दिल्ली सरकार की जिम्मेदारी निगम को फंड देना: हाईकोर्ट
Sat, 22 Dec 2018 02:17 AM IST
vivek shukla
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 22 Dec 2018 02:17 AM IST
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delhi high court
- फोटो : PTI
हाईकोर्ट ने पूर्वी व उत्तरी दिल्ली नगर निगम के कर्मचारियों के वेतन को लेकर केंद्र व दिल्ली सरकार के बीच चल रही खींचतान पर शुक्रवार को साफ कर दिया कि चौथे वित्त आयोग की सिफारिशों के हिसाब से नगर निगमों को भुगतान करने की जिम्मेदारी दिल्ली सरकार की है।
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मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन व न्यायमूर्ति वीके राव की खंडपीठ ने कहा कि अगर दिल्ली सरकार को अनुदान जारी करने में कोई आपत्ति है तो अगली तारीख पर मुख्य सचिव शपथ पत्र दाखिल कर बताएं कि इसके पीछे क्या कारण हैं। कोर्ट ने दिल्ली सरकार को 7 जनवरी तक लंबित राशि जारी करने का आदेश दिया है। कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 8 जनवरी 2019 को होगी।
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निगम कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलने को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है। नगर निगम के 45 हजार कर्मचारियों में करीब 13 हजार शिक्षक, नर्स, डॉक्टर व क्लर्क शामिल हैं।
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खंडपीठ ने दोनों नगर निगमों को आदेश दिया है कि वे तीन दिन के अंदर दिल्ली सरकार को यह जानकारी दें कि उन्हें कर्मचारियों के वेतन व पेंशन का भुगतान करने के लिए चौथे वित्त आयोग की सिफारिश के हिसाब से कितना फंड चाहिए। यह जानकारी मिलने पर दिल्ली सरकार निगमों को अनुदान जारी करेगी।
मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के स्थायी अधिवक्ता राहुल मेहरा ने कहा कि ऐसा दावा किया जा रहा है कि अनुदान की जरूरत की पहले पड़ताल होनी चाहिए। इस दलील पर असहमति जताते हुए खंडपीठ ने कहा कि अगर निगम द्वारा दिए गए फंड के आंकड़ों और सत्यापन में कोई फर्क आया तो मुख्य सचिव शपथ पत्र में इसकी जानकारी दे सकते हैं।
खंडपीठ ने इसके साथ ही दिल्ली सरकार की वह मांग भी ठुकरा दी, जिसमें उसने अनुदान में केंद्र सरकार को सहयोग करने का निर्देश देने की मांग की थी। खंडपीठ ने कहा कि 16 अप्रैल व 15 मार्च को भी अदालत दिल्ली सरकार को भुगतान के संबंध में निर्देश दे चुकी है। जब तक भुगतान नहीं होता, कोर्ट यह दलील नहीं सुनेगी।