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'टू फिंगर टेस्ट' सर्कुलर पर यू-टर्न

Mon, 08 Jun 2015 07:49 PM IST
Updated Mon, 08 Jun 2015 07:49 PM IST
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Delhi government may take back its advisory of two finger test on rape victim

दिल्ली सरकार ने सरकारी अस्पतालों के लिए जारी किया गया आदेश रेप पीड़िताओं के विवादित टू फिंगर टेस्ट को मंजूरी देने की बाद वापस ले लिया गया है।

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हालांकि, इस एडवाइजरी में साफ-साफ कहा गया था कि यह पीड़िता की अनुमति से ही किया जाएगा। इस टेस्ट को Per Vaginal (PV) examination या पी.वी. भी कहा जाता है।
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हालांकि इसका पहले ही अंदाजा लगाया जा रहा था कि विवादों में आने के बाद इस तकलीफदेह टेस्ट को लेकर जो सर्कुलर जारी किया गया, वह सरकार वापस ले लेगी।

कैसे होता है ये टेस्ट?

Delhi government may take back its advisory of two finger test on rape victim

केजरीवाल सरकार के इस फैसले का विपक्ष ने खुले तौर पर विरोध किया था। विपक्ष के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने भी टेस्ट पर सवाल उठाए थे।

विशेषज्ञों के अनुसार इस टेस्ट में डॉक्टर महिला के प्राइवेट पार्ट में दो उंगलियां डालकर यह पता लगाने की कोशिश करते हैं कि रेप पीड़िता को कोई अंदरूनी चोट तो नहीं लगी है।

प्राइवेट पार्ट के अंदर से सैंपल लेकर उसकी स्लाइड बनाई जाती है और फिर लैब टेस्ट किया जाता है। इस टेस्ट में अंदर ले जाई गई उंगलियों की संख्या से यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि महिला सक्रिय सेक्स लाइफ में है या नहीं।

लंबे समय से हो रहा है विरोध

Delhi government may take back its advisory of two finger test on rape victim

सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा इस टेस्ट का लंबे समय से विरोध किया जाता रहा है। 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस टू फिंगर टेस्ट के बारे में कहा था कि ये टेस्ट पीड़िता को उतना ही तकलीफ देता है जितना कि उसके साथ हुआ रेप।

कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में ये भी कहा था कि यह पीड़िता का अपमान तो है ही साथ ही उसके अधिकारों का हनन भी है। इस तरह का टेस्ट मानसिक पीड़ा देता है। सरकार को ऐसे टेस्ट के लिए कोई दूसरा तरीका अपनाना चाहिए।

एम्स के डॉक्टर सुधीर गुप्ता का कहना है कि हालांकि यह टेस्ट सेक्सुअल एक्सपीरियेंस और पेनीट्रेशन को जांचने के लिए किया जाता है लेकिन यह सही तरीका नहीं है। यही कारण है कि सभी इस टेस्ट का काफी विरोध कर रहे हैं जिसके चलते दिल्ली सरकार ने अपनी एडवाइजरी वापस लेगी।

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