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Delhi Polls: पहले चलती थीं DTC बसें, अब कार भी डगमगाए; यहां वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, फिर भी पानी की समस्या

Sun, 19 Jan 2025 09:15 AM IST
विजय पुंडीर शुजात आलम, अमर उजाला, नई दिल्ली
शुजात आलम, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Sun, 19 Jan 2025 09:15 AM IST
सार

घोंडा गांव के लोगों ने कहा कि तीनों ही बड़ी पार्टियों के नेता यहां विधायक रहे, लेकिन किसी ने भी गांव के लिए कुछ खास नहीं किया। घोंडा में 8-10 साल से लगातार पानी की समस्या बनी हुई है। पास में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट होने के बावजूद पानी नसीब नहीं हो पा रहा है। 

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Delhi election People of Ghonda village expressed their problems and appeared angry with the election parties
Delhi election 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

‘एक समय ऐसा था जब घोंडा चौक पर डीटीसी बसें चलती थीं, लेकिन आज यहां से कार लेकर निकलना भी बेहद मुश्किल है। सड़क की दोनों तरफ अतिक्रमण होने से घोंडा चौक पर सुबह से लेकर रात तक जाम लगा रहता है। रात होते ही लोग अपने घरों से बाहर निकलने में डरते हैं।’ शनिवार को अमर उजाला की टीम घोंडा गांव पहुंची तो लोगों ने ये दर्द बयां किया। संवाददाता ने चुनावी मुद्दों को टटोलने की कोशिश की तो गांव के लोग खासे नाराज दिखे।

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लोगों ने कहा कि तीनों ही बड़ी पार्टियों के नेता यहां विधायक रहे, लेकिन किसी ने भी गांव के लिए कुछ खास नहीं किया। घोंडा में 8-10 साल से लगातार पानी की समस्या बनी हुई है। पास में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट होने के बावजूद पानी नसीब नहीं हो पा रहा है। पानी आता भी है तो बदबूदार होता है। रात होते ही इलाके में नशेड़ी और बदमाश सक्रिय हो जाते हैं। इससे अकेली महिलाओं का निकलना भी मुश्किल हो जाता है। झपटमारी की समस्या भी यहां खूब है। घोंडा गांव में जगह-जगह गंदगी का अंबार है। साफ-सफाई और सड़कों की हालत खराब है। जो भी नेता समस्याओं का समाधान करने की बात करेगा, हमारा वोट उसे ही जाएगा।

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पुराने गांवों में होती है गिनती
राजधानी के पुराने गांवों में घोंडा गावं की गिनती होती है। इसी गांव के नाम पर विधानसभा बनी। इस विधानसभा में घोंडा गांव, यमुना विहार, भजनपुरा, गामड़ी गांव, पुराना उस्मानपुर गांव के अलावा कई दूसरे इलाके शामिल हैं। घोंडा गांव से ही विधायक तय होता है। गांव में अलग-अलग बिरादरियों के मोहल्ले हैं।

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पांचवीं बार जीत की फिराक में भाजपा
इस सीट पर तीनों प्रमुख दलों को कभी न कभी जीत मिली है। 1993 में भाजपा के लाल बहादुर तिवारी ने पहली बार जीत हासिल की। 1998 और 2003 में कांग्रेस के भीष्म शर्मा दो बार लगातार जीते। वर्ष 2008 में भाजपा के साहिब सिंह चौहान ने कांग्रेस को हराकर जीत दर्ज की। वर्ष 2013 में आप की लहर होने के बावजूद भाजपा ने सीट बचाई। 2015 में आप के श्रीदत्त शर्मा ने भाजपा के साहिब सिंह चौहान को हराकर सीट पर अपना कब्जा कर लिया। वर्ष 2020 में भाजपा ने वापसी करते हुए अजय महावर के नेतृत्व में श्रीदत्त शर्मा को हरा दिया। इस बार आप से गौरव शर्मा, कांग्रेस से भीष्म शर्मा और भाजपा से अजय महावर चुनावी मैदान में हैं।

गंदे पानी की समस्या गंभीर स्वास्थ्य और पर्यावरणीय संकट है। यह जलजनित बीमारियों को बढ़ावा देती है। अपशिष्ट प्रबंधन, जल शोधन तकनीक और सामुदायिक जागरूकता से इस समस्या का समाधान संभव है। स्वच्छ जल हर व्यक्ति का अधिकार है। -अनिल मस्ताना

सड़कों की जर्जर स्थिति और सफाई की कमी बड़ी समस्या है। नियमित मरम्मत, कचरा प्रबंधन व सामुदायिक भागीदारी से सड़कों को सुधारना और स्वच्छ रखना संभव है। बेहतर बुनियादी ढांचा स्वस्थ और सुरक्षित समाज की नींव है। - देशराज प्रेमी

अगर पुलिस गश्त बढ़ाए तो अपराध कम होंगे। सीसीटीवी कैमरे और सही निगरानी से मदद मिल सकती है। लोग भी सतर्क रहें और पुलिस का साथ दें। मिलकर काम करेंगे तो समाज सुरक्षित और खुशहाल बनेगा। - धर्मवीर सिंह

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