ये 6 थ्योरी बदल रही हैं दिल्ली का गणित
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थ्योरी नं.1
राजनीतिक पार्टियों में जीत-हार को लेकर अब माथापच्ची शुरू हो गई है। खास बात यह कि दोनों पार्टियां खुद को एक-दूसरे से कम नहीं आंक रही हैं।
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थ्योरी एक ही है, लेकिन इसे लेकर अपने-अपने तरीके से परिभाषित किया जा रहा है। मध्यमवर्ग, युवा, झुग्गी-झोपड़ी, वोटिंग प्रतिशत बढ़ने और नकारात्मक सर्वे की कसौटी पर दिल्ली चुनाव को आंका जा रहा है।
थ्योरी नं.2
दोपहर एक बजे के बाद बड़ी तादाद में वोटरों के निकलने को लेकर भाजपा काफी आशान्वित है। भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि संघ के कार्यकर्ताओं को इसमें विशेष योगदान रहा।
दोपहर से पहले जब आप की तरफ मतदान हुआ तो संघ कार्यकर्ता जो बूथ पर जुटे थे वह घर-घर जाकर मतदान करने की अपील करने लगे। शाम के वक्त अपने काडर और परंपरागत वोटरों से विशेष तौर पर अपने पक्ष में मतदान करवाया।
वहीं, आप का मानना है कि दोपहर के पहले तो वोट प्रतिशत बढ़ा ही, बाद में भी उत्साहित वोटरों ने आप के लिए वोट किया। वहीं, कांग्रेस इस थ्योरी से बाहर रहने को दबी जुबान में स्वीकार भी रही है।
परंपरागत वोटरों के भरोसे कांग्रेस
थ्योरी नं.3
वोट प्रतिशत बढ़ने के कारण भाजपा उत्साहित है, वहीं आप का भी इस पर दावा है। भाजपा कार्यकर्ताओं से कहा गया था कि अगर 60 प्रतिशत मतदान होता है तो जीत पक्की है, जबकि मतदान इससे काफी अधिक हुआ।
नकारात्मक सर्वे से संघ कार्यकर्ता तेजी से निकले। आम आदमी पार्टी के रणनीतिकारों की मानें तो उनका कहना है कि पिछले बार भी रिकॉर्ड वोटिंग हुई थी, लेकिन इस बार उससे भी अधिक हुई है लिहाजा इस बार पूर्ण बहुमत मिलेगा।
वजह यह है कि मतदाताओं को एक विकल्प मिल गया है। जनता बदलाव और स्थिर सरकार के लिए निकली है। कांग्रेस का दावा है कि परंपरागत वोटरों ने उसके पक्ष में मतदान किया है।
किरण बेदी के नाम का फायदा/नुकसान?
युवा और महिला वोटरों को लेकर असमंजस की स्थिति है। मध्यवर्गीय वोट पर भाजपा को यकीन है। पार्टी मान रही है कि युवा वर्ग ने नरेंद्र मोदी के पक्ष मतदान किया तो महिलाओं ने किरण बेदी के नाम पर।
वहीं आप का दावा है कि महिला और युवा वर्ग का आज भी केजरीवाल में यकीन है। कांग्रेस सिर्फ बुजुर्ग और परंपरागत वोट पर ही अपनी बढ़त की बात कर रही है। उस दौरान भी एक ही नारा था केंद्र में मोदी और दिल्ली में केजरी।
कौन बदल रहा आप की गणित
थ्योरी नं.5
झुग्गी-झोपड़ी के वोटर को लेकर भी अपनी थ्योरी है। भाजपा का दावा है कि झुग्गी और अनधिकृत कॉलोनियों के वोटरों का ध्रुवीकरण हुआ है। यह वोट जहां झुग्गी वही मकान को लेकर भाजपा में भी पड़ा।
वहीं आम आदमी पार्टी मानकर चल रही है कि झुग्गी और अनधिकृत कॉलोनी का पूरा वोट आप को ही मिला है। इस पर भाजपा के भी कुछ रणनीतिकार सहमत हैं।
अल्पसंख्यक समुदाय के वोटरों को लेकर भी असमंजस है। भाजपा का मानना है कि जामा मस्जिद के इमाम ने जो अपील की है उससे मुस्लिम वर्ग में ध्रुवीकरण हुआ है और इस वर्ग ने कांग्रेस का भी साथ दिया है।
एक मुश्त मतदान आप को नहीं हुआ है। आप का मानना है कि घर वापसी मुद्दे पर नाराजगी थी। इसका पूरा फायदा आप को ही मिला है।
कौन बढ़ा रहा भाजपा का भरोसा
थ्योरी नं.6
शहरी आबादी में मतदान प्रतिशत बढ़ने से भाजपा इसे अपने पाले में मानकर चल रही है। पार्टी का तर्क है कि पढ़ा-लिखा वर्ग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कामकाज से प्रभावित हुआ है।
उधर, आप का दावा है कि जो मतदाता पिछली बार मतदान नहीं कर पाए थे, उन्होंने इस बार बढ़चढ़कर मतदान किया। पढ़ा-लिखा मतदाता भाजपा की केंद्र सरकार के कामकाज को अच्छी तरह समझ चुका है।