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Delhi: कितनी बदली दिल्ली की सियासत? 1993 में BJP को बहुमत, 2013 तक कांग्रेस का कब्जा, 10 साल से 'आप' का राज

Sun, 19 Jan 2025 08:44 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Sun, 19 Jan 2025 08:44 AM IST
सार

2013 में आप संयोजक अरविंद केजरीवाल की अगुआई में आप ने पहली बार चुनाव लड़ा और 28 सीटें जीतकर धमाकेदार एंट्री की थी। भाजपा 31 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल तो रहा, लेकिन बहुमत से दूर।

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Delhi Election 2025 BJP had a majority government in 1993, Congress had a golden period from 1998 to 2008
Delhi Assembly Election 2025 - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बीते तीन दशकों में दिल्ली की राजनीति में बदलाव देखने को मिला। वर्ष 1993 में विधानसभा चुनावों की शुरुआत के बाद अधिकांश बार दिल्ली में पूर्ण बहुमत की सरकार बनी। लेकिन अन्ना आंदोलन के बाद बनी आम आदमी पार्टी (आप) के चुनाव में आने से 2013 का चुनाव अपवाद साबित हुआ था। उस समय किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। इसे छोड़ दें तो हर चुनाव में दिल्ली की जनता ने स्पष्ट जनादेश दिया।

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हर चुनाव में पूर्ण बहुमत देना यह दर्शाता है कि राजधानी की जनता स्थिर सरकार चाहती है। आंकड़ों पर गौर करें तो 1993 में भाजपा और 1998 से 2008 तक कांग्रेस की पूर्ण बहुमत की सरकार रही। 2015 और 2020 में आप ने दिल्ली की सियासत में एकछत्र राज किया। 1993 से 2008 के बीच हुए विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर होती थी। 1993 में दिल्ली में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 49 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। कांग्रेस को 14 सीटें मिलीं, जबकि अन्य दल और निर्दलीय सात सीटों पर काबिज हुए। 1998 से 2008 तक का समय कांग्रेस के लिए स्वर्णिम युग था।

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1998 के चुनावों में कांग्रेस ने 52 सीटें जीतकर भाजपा को सत्ता से बेदखल कर दिया। भाजपा केवल 17 सीटों पर सिमट गई। 2003 के चुनाव में कांग्रेस ने 47 सीटों पर जीत हासिल की और लगातार दूसरी बार शीला दीक्षित मुख्यमंत्री बनीं। 2008 में कांग्रेस ने 43 सीटें जीतकर अपनी सत्ता बरकरार रखी।

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भाजपा ने जीतीं थीं 31 सीटें
2013 में आप संयोजक अरविंद केजरीवाल की अगुआई में आप ने पहली बार चुनाव लड़ा और 28 सीटें जीतकर धमाकेदार एंट्री की थी। भाजपा 31 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल तो रहा, लेकिन बहुमत से दूर। जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) और शिरोमणि अकाली दल (एसएडी), निर्दलीय को एक-एक सीट मिली थी। कांग्रेस मात्र आठ सीटों पर सिमट गई थी। इस त्रिशंकु स्थिति में आप ने कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई थी, लेकिन यह केवल 49 दिन ही चल पाई थी।

2015 के चुनाव में आप की ऐतिहासिक जीत
2015 के चुनावों में आप ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 70 में से 67 सीटें जीत लीं। भाजपा को केवल तीन सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस खाता भी नहीं खोल पाई। इसी तरह 2020 में हुए विधानसभा चुनावों में एक बार फिर आप ने अपना दबदबा कायम रखा। पार्टी ने 62 सीटें जीतकर भाजपा और कांग्रेस को करारी शिकस्त दी। भाजपा केवल आठ सीटों पर सिमट गई, जबकि 15 सालों तक दिल्ली की सत्ता में रही कांग्रेस का प्रदर्शन लगातार दूसरी बार शून्य रहा।

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