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कांग्रेस की अंदरूनी कलह सामने आई, शीला दीक्षित ने कार्यकारी अध्यक्षों के पर कतरे

Wed, 17 Jul 2019 06:24 PM IST
राजेश सैनी अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Published by: राजेश सैनी Updated Wed, 17 Jul 2019 06:24 PM IST
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Delhi congress Chief Sheila Dikshit gave new responsibilities to Three Leaders
शीला दीक्षित (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

दिल्ली कांग्रेस नेताओं की अंतर्कलह सतह पर आती दिख रही है। प्रभारी पीसी चाको के शीला दीक्षित को लिखे गए पत्र के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ने आज अपने कार्यकारी अध्यक्षों के पर कतर दिये।

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एक पत्र जारी करते हुए शीला दीक्षित ने कार्यकारी अध्यक्ष हारुन यूसुफ और देवेंद्र यादव को दिल्ली विश्वविद्यालय/एनएसयूआई का कामकाज देखने तक सीमित कर दिया, जबकि तीसरे कार्यकारी अध्यक्ष राजेश लिलोठिया को उत्तरी-दक्षिणी दिल्ली के नगर निगमों और यूथ कांग्रेस के कामकाज देखने को कह दिया। 
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दरअसल, दिल्ली कांग्रेस के नेताओं के बीच अंतर्कलह तब शुरू हुई जब शीला दीक्षित ने लोकसभा चुनाव के बाद पूरे संगठन को नया रूप देने की कोशिश शुरू की। इस क्रम में एक पत्र जारी कर उन्होंने मौजूदा 280 ब्लॉक कमेटियों के अध्यक्षों को उनके पद से हटा दिया।
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इसके बाद सभी ब्लॉक कमेटियों के लिए निरीक्षक की नियुक्ति की गई। इनकी सिफारिश पर प्रत्येक ब्लॉक कमेटी में प्रभावशाली कार्यकर्ताओं को चुना जाना था जो विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए बेहतर परिणाम दे सकें। लेकिन पुराने जमे-जमाए नेताओं को शीला की यह ईमानदार कोशिश रास नहीं आई और वे अपने लिए नेताओं के पास जुगाड़ की तलाश करने लगे। 

Delhi congress Chief Sheila Dikshit gave new responsibilities to Three Leaders
दिल्ली कांग्रेस प्रभारी पीसी चाको (फाइल फोटो) - फोटो : ANI

इसलिए शुरू हुआ विरोध
कहा जा रहा है कि ब्लॉक कमेटियों को भंग करने का फैसला शीला दीक्षित ने प्रदेश प्रभारी पीसी चाको से सलाह लिए बिना लिया था। उन्होंने इसके लिए तीनों कार्यकारी अध्यक्षों से भी सलाह नहीं ली थी।

विरोधी खेमे ने आरोप लगाया कि शीला दीक्षित अस्वस्थ हैं और उनकी ओर से पार्टी के फैसले कुछ अन्य लोग ले रहे हैं। राजेश लिलोठिया ने इसके बाद ब्लॉक निरीक्षक की मीटिंग लेना शुरू कर दिया था। पार्टी कार्यालय में भी लगातार वो उपस्थित रहते थे।

शीला दीक्षित का मत है कि लंबे समय से ब्लॉक कमेटी के विभिन्न पदों पर बैठे और परिणाम न दे रहे कार्यकर्ताओं को हटाकर नए लोगों को मौका दिया जाना चाहिए, लेकिन हारुन यूसुफ और कुछ अन्य नेता अपने क्षेत्रों के कुछ लोगों को पदों पर बनाए रखना चाहते हैं क्योंकि उनका कहना है कि इन्हीं कार्यकर्ताओं के दम पर पार्टी ने लंबे समय तक राज किया है।

वे अपने क्षेत्रों में आज भी प्रभावशाली हैं। उन्हें हटाना पार्टी के लिए घाटे का सौदा हो सकता है। अपने लोगों को 'सेट' करने की इस कोशिश पर शीला दीक्षित ने इनकार कर दिया जिससे दोनों खेमों में दूरी बढ़ गई। 

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