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कोचिंग सेंटर हादसा: मौत के खेल पर सिर्फ कागजी कार्रवाई का मरहम... जिम्मेदारी सबकी पर नियम किए जाते हैं दरकिनार

Mon, 29 Jul 2024 08:20 AM IST
शाहरुख खान धनंजय मिश्रा, अमर उजाला, नई दिल्ली
धनंजय मिश्रा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 29 Jul 2024 08:20 AM IST
सार

मौत के खेल पर सिर्फ कागजी कार्रवाई का मरहम लगा दिया जाता है। हर एजेंसियों की जिम्मेदारी तय है, पर नियम दरकिनार कर दिए जाते हैं। हादसे के कुछ दिनों तक एजेंसियां कार्रवाई करती हैं। इसके बाद सब कुछ ठंडे बस्ते में चला जाता है।

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Delhi Coaching Centre Flooding Story Paperwork is only balm on this game of death
Delhi Coaching Centre Flood - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिल्ली में रिहायशी इलाके में कोचिंग सेंटर चलाने को लेकर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं है। ऐसे में नियमों में तिकड़म लगा कर कोचिंग सेंटर चलाए जा रहे हैं। वर्ष 2010 में मास्टर प्लान में कोचिंग सेंटर को संरक्षण दिया गया था। प्लान में संशोधन करके यह प्रावधान किया गया था कि रिहायशी इलाकों में कोचिंग सेंटर, ट्यूशन सेंटर चल सकते हैं, क्योंकि वहां रहने वालों के बच्चे कहां पर पढ़ने जाएंगे। लेकिन इसका व्यावसायिक उपयोग बच्चों की जान पर भारी पड़ रहा है। 
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व्यावसायिक और रिहायशी उपयोग की संपत्तियों के लिए नियम पहले से बने हुए हैं। चूंकि रिहायशी इलाकों में कोचिंग सेंटर चलाने में पाबंदी नहीं है। संपत्तियां बनी तो रिहायशी हैं, लेकिन इनका उपयोग कोचिंग सेंटर पर व्यावसायिक तौर पर किया जाता है। 
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उदाहरण के लिए एक 100 वर्गमीटर का प्लॉट रिहायशी संपत्ति के तौर पर 10-15 लोगों के रहने के लिए बनाया जाता है। अब उसी का उपयोग कोचिंग सेंटर में किया जाता है और वहां 200-300 बच्चे एक साथ आते हैं। इससे उस इमारत का दुरुपयोग होता है। 
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इसमें नियमों का उल्लंघन इसलिए हैं कि भले ही वह कोचिंग सेंटर हैं जिसके लिए मास्टर प्लान में विशेष तौर पर नियम उल्लेखित नहीं है, लेकिन इतनी बढ़ी संख्या में लोगों का जुटना एक तरीके से एसेंबिली बिल्डिंग में आता है। ऐसे में वहां पर न केवल आग से सुरक्षा के इंतजाम होने चाहिए बल्कि निकास और प्रवेश के अलग-अलग गेट भी होना चाहिए। 
 

अफसर नहीं करते कार्रवाई 
रिहायशी इलाकों में बने मकानों में चार-चार मंजिल के प्लाॅट पर कोचिंग सेंटर बिना सुरक्षा नियमों के चल रहे हैं। संबंधित विभाग और उसके अधिकारियों को इसकी जानकारी है। लेकिन कार्रवाई से दूरी बनी हुई है।

2019 में सूरत की घटना के बाद पूर्वी दिल्ली के लक्ष्मी नगर में कोचिंग सेंटरों को सील किया गया था, जबकि मुखर्जी नगर में 30 से अधिक कोचिंग सेंटरों को नोटिस दिया गया था। लेकिन, कोई खास असर इसका नहीं हुआ है। बीते वर्ष मुखर्जी नगर में कोचिंग सेंटर में लगी आग के बाद भी विभिन्न एजेंसियों ने कार्रवाई की थी वह भी कागजी कार्रवाई साबित हुई।

 

ऐसे होता है खेल...
रिहायशी संपत्ति में कुल प्लॉट के दो तिहाई हिस्से में ही निर्माण होना चाहिए। लेकिन होता 100 फीसदी है। अगर कोचिंग सेंटर चल रहा है तो कन्वर्जन चार्ज भरना चाहिए, लेकिन ज्यादातर नहीं भरा जाता है।

50 से अधिक लोग जहां एकत्रित हो वहां फायर एनओसी लेनी होती है। मास्टर प्लान के अनुसार, रिहायशी संपत्ति जिसकी ऊंचाई 15 मीटर है या इससे कम उसे एनओसी लेने की जरूरत नहीं है। होता है यह है कि संपत्ति को दिखाया रिहायशी जाता है लेकिन उसका उपयोग व्यावसायिक होता है।
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