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'अब मोदी होंगे दिल्ली के CM': अध्यादेश को लेकर केन्द्र सरकार पर भड़के केजरीवाल, बोले- क्यों करवाते हो चुनाव

Thu, 15 Jun 2023 04:31 AM IST
Digvijay Singh अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: Digvijay Singh Updated Thu, 15 Jun 2023 04:31 AM IST
सार

मुख्यमंत्री ने कहा कि अध्यादेश के माध्यम से मुख्य सचिव को कैबिनेट का निर्णय सही या गलत तय करने का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा मंत्री का आदेश कानूनी रूप से गलत लगने पर सचिव उसे मानने से इन्कार कर सकता है। 

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Delhi CM's strong attack on PM Modi
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल - फोटो : Twitter/@ArvindKejriwal

विस्तार

केंद्र के अध्यादेश पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा। सीएम ने कहा कि इस अध्यादेश का एक लाइन में मतलब है कि अब दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल नहीं बल्कि नरेंद्र मोदी होंगे और वे ही सभी फैसले लेंगे। अध्यादेश के कई प्रावधानों के कारण दिल्ली की चुनी हुई सरकार का कोई मतलब नहीं रह गया है। यह अध्यादेश सुप्रीम कोर्ट के आदेश और दिल्ली सरकार के अधिकारों को कुचलने वाला है।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि अध्यादेश के माध्यम से मुख्य सचिव को कैबिनेट का निर्णय सही या गलत तय करने का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा मंत्री का आदेश कानूनी रूप से गलत लगने पर सचिव उसे मानने से इन्कार कर सकता है। दुनिया में पहली बार हो रहा है कि सचिव को मंत्री का बॉस बना दिया गया है। केजरीवाल ने कहा कि अध्यादेश में तीन ऐसे प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिससे दिल्ली सरकार पूरी तरह से खत्म हो जाती है। 



 
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अध्यादेश में कहा गया है कि अगर कोई मंत्री अपने सचिव को कोई आदेश देगा तो सचिव यह निर्णय लेगा कि मंत्री का आदेश कानूनी रूप से ठीक है या नहीं। उन्होंने इससे जुड़े दो उदाहरण साझा किए। उन्होंने कहा कि पहला मामला विजिलेंस सचिव से जुड़ा है। सर्विसेज मंत्री सौरभ भारद्वाज ने विजिलेंस सचिव को एक वर्क ऑर्डर दिया कि किस तरह से कार्य किया जाएगा, मगर विजिलेंस सचिव ने दिल्ली सरकार के अंदर खुद को एक स्वतंत्र प्राधिकारी घोषित कर दिया है। वह कह रहे है कि अध्यादेश के आने के बाद वह दिल्ली की चुनी हुई सरकार के प्रति जवाबदेह नहीं है। 

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वहीं दूसरा उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली में एक जगह झुग्गियां तोड़ी गई। दिल्ली सरकार के वकील ने झुग्गियां तोड़ने के खिलाफ बहुत कमजोर दलीलें दी। दलीलों को सुन कर ऐसा लगा रहा था कि वो दूसरी पार्टी से मिला हुआ है। इसके बाद संबंधित मंत्री ने सचिव को आदेश दिया कि अगली सुनवाई में कोई अच्छा और वरिष्ठ अधिवक्ता नियुक्त करना चाहिए। इस पर संबंधित सचिव फाइल में लिखते है कि अधिवक्ता की नियुक्ति का अधिकार उनका है। इस तरह से हम सरकार कैसे चलाएंगे।

सीएम ने कहा कि अध्यादेश के अनुसार दिल्ली सरकार के अधीन सभी आयोग, प्राधिकरण और बोर्ड का गठन अब केंद्र सरकार करेगी। इसका मतलब साफ है कि दिल्ली जल बोर्ड का गठन अब केंद्र सरकार करेगी और अब केंद्र सरकार ही दिल्ली जल बोर्ड को चलाएगी। इसी तरह, दिल्ली परिवहन निगम, दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग का गठन अब केंद्र सरकार करेगी। दिल्ली में अलग-अलग विभाग और सेक्टर से जुड़े 50 अधिक आयोग हैं और उनका गठन अब केंद्र सरकार करेगी तो फिर दिल्ली सरकार क्या करेगी? फिर चुनाव ही क्यों कराया जाता है? यह बहुत ही खतरनाक अध्यादेश है।

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