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Rekha Gupta: विधानसभा चुनावों में दो बार हारीं, तीसरी दफा मिली जीत; संघर्षों से भरा रहा है रेखा का सियासी सफर
Thu, 20 Feb 2025 08:51 AM IST
शाहरुख खान
विनोद डबास, अमर उजाला, नई दिल्ली
विनोद डबास, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 20 Feb 2025 08:51 AM IST
सार
दिल्ली के मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने वाली रेखा गुप्ता का सियासी सफर संघर्षों से भरा रहा है। रेखा गुप्ता ने 2015 और 2020 में शालीमार बाग विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार बंदना कुमारी के हाथों हार का सामना किया था।
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Delhi CM Rekha Gupta
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
रेखा गुप्ता का मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने का रास्ता काफी संघर्षपूर्ण रहा है। उन्हें वर्ष 2015 व 2020 के विधानसभा चुनावों में शालीमार बाग इलाके में हार का सामना करना पड़ा था।
इसके अलावा वर्ष 2017 में भाजपा की ओर से सभी पार्षदों के टिकट काटने के कारण वह भी चुनाव लड़ने से वंचित हो गई थीं। इतना ही नहीं, दो वर्ष पहले उन्हें मेयर चुनाव में भी हार का सामना करना पड़ा था।
उन्हें न केवल चुनावी हार का सामना करना पड़ा, बल्कि पार्टी की आंतरिक राजनीति में भी उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, मगर अब उनका नाम मुख्यमंत्री के नामों की सूची में शामिल हो गया है।
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रेखा गुप्ता ने 2015 और 2020 में शालीमार बाग विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार बंदना कुमारी के हाथों हार का सामना किया था। इसके बाद वर्ष 2007 व 2012 में पार्षद रहीं रेखा गुप्ता को वर्ष 2017 में भाजपा ने सभी पार्षदों के टिकट काट देने के कारण चुनाव में भी उतरने का मौका नहीं मिला।
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इसके अलावा वर्ष 2017 में भाजपा की ओर से सभी पार्षदों के टिकट काटने के कारण वह भी चुनाव लड़ने से वंचित हो गई थीं। इतना ही नहीं, दो वर्ष पहले उन्हें मेयर चुनाव में भी हार का सामना करना पड़ा था।
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उन्हें न केवल चुनावी हार का सामना करना पड़ा, बल्कि पार्टी की आंतरिक राजनीति में भी उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, मगर अब उनका नाम मुख्यमंत्री के नामों की सूची में शामिल हो गया है।
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रेखा गुप्ता ने 2015 और 2020 में शालीमार बाग विधानसभा सीट से आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार बंदना कुमारी के हाथों हार का सामना किया था। इसके बाद वर्ष 2007 व 2012 में पार्षद रहीं रेखा गुप्ता को वर्ष 2017 में भाजपा ने सभी पार्षदों के टिकट काट देने के कारण चुनाव में भी उतरने का मौका नहीं मिला।
यह एक बड़ा झटका था, क्योंकि वह पार्टी की आंतरिक राजनीति में अपनी जगह बना चुकी थीं, लेकिन पार्टी के अंदरूनी फैसलों के चलते वह चुनावी राजनीति से दूर हो गईं। रेखा को वर्ष 2023 में एमसीडी मेयर चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था, जब आप पार्षद शैली ओबराय ने उन्हें हराया।
मेयर और स्थायी समिति का अध्यक्ष बनने से भी रह गई थीं वंचित
इस हार ने उनके राजनीतिक जीवन को और कठिन बना दिया, लेकिन रेखा ने हार मानने के बजाय अपने संघर्ष को जारी रखा। वर्ष 2012 से 2017 तक पार्षद रहने के दौरान उन्हें पार्टी की आंतरिक राजनीति में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उन्हें मेयर और स्थायी समिति का अध्यक्ष बनने से भी वंचित कर दिया गया।
इस हार ने उनके राजनीतिक जीवन को और कठिन बना दिया, लेकिन रेखा ने हार मानने के बजाय अपने संघर्ष को जारी रखा। वर्ष 2012 से 2017 तक पार्षद रहने के दौरान उन्हें पार्टी की आंतरिक राजनीति में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। उन्हें मेयर और स्थायी समिति का अध्यक्ष बनने से भी वंचित कर दिया गया।
हालांकि, रेखा ने कभी हार नहीं मानी और वर्ष 2022 में शालीमार बाग से फिर से पार्षद का टिकट मिला। इस बार फिर उन्होंने जीत हासिल की और फिर भाजपा ने उन्हें 2023 के विधानसभा चुनाव में शालीमार बाग इलाके से फिर टिकट दिया।
बंदना कुमारी को हराकर पिछली हार का लिया बदला
इस चुनाव में उन्होंने आम आदमी पार्टी की बंदना कुमारी को हराकर न केवल अपनी पिछली हार का बदला लिया, बल्कि भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण सीट भी जीत ली। इस जीत के साथ रेखा गुप्ता की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हुआ है और अब वह मुख्यमंत्री बन गईं। उनके संघर्ष और समर्पण ने उन्हें पार्टी के भीतर एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित किया है।
इस चुनाव में उन्होंने आम आदमी पार्टी की बंदना कुमारी को हराकर न केवल अपनी पिछली हार का बदला लिया, बल्कि भाजपा के लिए एक महत्वपूर्ण सीट भी जीत ली। इस जीत के साथ रेखा गुप्ता की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हुआ है और अब वह मुख्यमंत्री बन गईं। उनके संघर्ष और समर्पण ने उन्हें पार्टी के भीतर एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित किया है।
शालीमार बाग क्षेत्र का विधायक दूसरी बार मुख्यमंत्री
शालीमार बाग क्षेत्र से विधायक बनने वाला व्यक्ति अब दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने की ओर बढ़ रहा है। रेखा गुप्ता ने हाल ही में इस इलाके से जीत हासिल की, जहां उन्होंने आप की बंदना कुमारी को हराया। इस जीत ने उन्हें मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवारों में प्रमुख बना दिया है। यहां यह भी याद रखना जरूरी है कि शालीमार बाग क्षेत्र से विधायक रहे भाजपा नेता साहिब सिंह वर्मा भी मुख्यमंत्री बने थे।
शालीमार बाग क्षेत्र से विधायक बनने वाला व्यक्ति अब दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने की ओर बढ़ रहा है। रेखा गुप्ता ने हाल ही में इस इलाके से जीत हासिल की, जहां उन्होंने आप की बंदना कुमारी को हराया। इस जीत ने उन्हें मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवारों में प्रमुख बना दिया है। यहां यह भी याद रखना जरूरी है कि शालीमार बाग क्षेत्र से विधायक रहे भाजपा नेता साहिब सिंह वर्मा भी मुख्यमंत्री बने थे।
साहिब सिंह वर्मा ने 1993 में शालीमार बाग से विधायक के रूप में चुनाव जीता और इसके बाद 1996 में मदनलाल खुराना के हवाला कांड में फंसने के बाद मुख्यमंत्री बने। हालांकि, उनका कार्यकाल बहुत लंबा नहीं चला और उन्हें 1998 में चुनाव से पहले हटा दिया गया। लिहाजा शालीमार बाग क्षेत्र अब एक बार फिर राजनीति में सुर्खियों में है, जहां रेखा गुप्ता की जीत और मुख्यमंत्री पद की संभावनाओं ने इलाके को एक बार फिर से राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना दिया है।
नंदगढ़ से शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे ग्रामीण
रेखा गुप्ता का परिवार नंदगढ़ गांव में शिव मंदिर की पूजा-अर्चना करने के लिए मार्च माह में आता है। इस बार भी 27 मार्च को गांव में रेखा गुप्ता का परिवार आएगा। गांव में चांद दलाल के घर पर ही पूजा-अर्चना के बाद रुकते हैं। रेखा गुप्ता का परिवार अमावस्या पर भी पूजा-अर्चना के लिए गांव में आता है।
रेखा गुप्ता का परिवार नंदगढ़ गांव में शिव मंदिर की पूजा-अर्चना करने के लिए मार्च माह में आता है। इस बार भी 27 मार्च को गांव में रेखा गुप्ता का परिवार आएगा। गांव में चांद दलाल के घर पर ही पूजा-अर्चना के बाद रुकते हैं। रेखा गुप्ता का परिवार अमावस्या पर भी पूजा-अर्चना के लिए गांव में आता है।
चांद दलाल ने बताया कि उसकी मां शंकुतला व रेखा गुप्ता की मां धर्म बहन हैं। वह सुख-दुख में भी शामिल होती हैं। रेखा गुप्ता के दिल्ली के सीएम बनने पर वह परिवार समेत ग्रामीणों को सुबह दिल्ली में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए बस में लेकर जाएंगे। गांव के अन्य लोगों को भी दिल्ली ले जाया जाएगा।
रेखा गुप्ता दो साल पहले गांव में आई थीं। उनके अलावा उसके भाई, भाभी, माता व पिता हर साल गांव के मंदिर में आते हैं। रेखा गुप्ता के पिता व भाई को उन्होंने फोन कर बधाई भी दी है।
उन्होंने ग्रामीणों को दिल्ली में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने का न्योता दिया और उनकी ग्रामीणों को लेकर आने की जिम्मेदारी भी लगाई है। उनके परिवार के अन्य सदस्य जुलाना में रहते हैं।