500 लोगों पर FIR, शिया धर्मगुरू ने किया जाम का ऐलान
कर्बला को लेकर यूपी गेट पर प्रदर्शन करने और एनएच-24 को जामकर बवाल करने के मामले में पुलिस ने शिया समुदाय के 500 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
उन पर राष्ट्रीय राजमार्ग जाम करने, बलवा, सरकारी संपत्ति को नुकसान और आगजनी आदि की धाराएं लगाई गई हैं। पुलिस ने वीडियो फुटेज और फोटो के आधार पर जाम लगाने के दोषी लोगों की तलाश शुरू कर दी है।
सोमवार को दिल्ली के जोर बाग स्थित कर्बला की जमीन पर जारी मजलिस में शामिल होने जा रहे शिया समुदाय के लोगों को जब दिल्ली पुलिस ने राजधानी में एंट्री करने से रोका तो उन्होंने यूपी गेट पर ही जाम लगा दिया था।
दिल्ली पुलिस ने घुसने नहीं दिया
दोपहर करीब एक बजे से लगा जाम देर रात साढ़े नौ बजे खुल सका। इस दौरान कुछ उपद्रवियों ने एक बस, एक कार और एक ट्रक को आग भी लगा दी थी।
जाम खुलने के करीब एक घंटे बाद ही यूपी गेट पर प्रदर्शन कर रहे यूपी और उत्तराखंड के शिया समुदाय के लोग भी वापस लौट गए। दिल्ली पुलिस ने उन्हें दिल्ली में प्रवेश नहीं करने दिया।
पुलिस ने मामले में 500 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाते हुए एफआईआर दर्ज करते ही जांच शुरू कर दी है। सीओ रणविजय सिंह ने बताया मौके से मिली जानकारी के आधार पर तीन लोगों को नामजद भी किया गया है। मगर इनके नाम की सत्यता की जांच की जा रही है।
यह धमकी है या चेतावनी!
शिया मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना कल्बे जव्वाद नकवी ने करबला मसले को लेकर अब 31 मार्च को दिल्ली जाम का ऐलान किया है।
उन्होंने कहा कि अगर कांग्रेस ने करबला विवाद को नहीं सुलझाया तो उसको भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। अंजुमन-ए-हैदरी की ओर से आयोजित प्रेसवार्ता में शिया धर्मगुरुने देश भर के शिया समुदाय के लोगों से राजधानी दिल्ली पहुंचने का आह्वान किया है।
जोरबाग की एक मस्जिद में मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में जव्वाद ने कहा कि अगर करबला विवाद नहीं सुलझाया गया तो दिल्ली में जो हश्र शीला सरकार का हुआ, यूपी में उससे भी बुरा हश्र कांग्रेस का हो सकता है।
कांग्रेस हर दफ्तर के सामने होगा प्रदर्शन
यूपी के जिन जिलों से मुस्लिम प्रत्याशी जीते थे, उन जगहों पर प्रदर्शन कर जनता के सामने कांग्रेस की पोल खोली जाएगी। इसके अलावा यूपी के सभी जिलों में कांग्रेस के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा।
जव्वाद ने 10 मार्च के प्रदर्शन को एक ट्रेलर बताते हुए कहा कि उनकी मांगे नहीं मानी गईं तो 31 मार्च को स्थिति और भी ज्यादा खराब होगी।
उस दिन सोनिया गांधी से मिलकर करबला की जमीन को नर्सरी के कब्जे से मुक्त कराने की मांग की जाएगी। सोनिया गांधी से मिलने के लिए उन्हें अगर पुलिस की लाठियां भी खानी पड़ी तो वह इसके लिए तैयार हैं।
अहमद पटेल की गिरफ्तारी नहीं हुई तो...
जव्वाद ने आरोप लगाया कि अहमद पटेल के दखल की वजह से करबला विवाद नहीं सुलझ पा रहा है। एक साल पहले वह करबला मसले पर सोनिया गांधी से मिले थे।
उस समय सोनिया ने पटेल से 10 दिनों के भीतर पूरे मसले को सुलझाने के लिए कहा था। लेकिन पटेल ने उस पर अमल नहीं किया। दूसरी ओर सोमवार को हुए बवाल के बाद जोरबाग इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
इससे उनके समुदाय के लोगों को भारी अपमान झेलना पड़ा है। अगर कांग्रेस ने अहमद पटेल पर तुरंत कड़ी कार्रवाई नहीं करता है तो दिल्ली ही नहीं पूरे देश भर में यह चिंगारी फैल सकती है।