फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Delhi Building Collapse: Screams and cries were drowned in the blast.

Delhi Building Collapse: धमाके में दब गई चीख-पुकार, मलबे में घुटती रहीं सांसें; जारी है जीवन बचाने की जंग

Sun, 31 May 2026 05:34 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 31 May 2026 05:34 AM IST
सार

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पहले जोरदार धमाके जैसी आवाज सुनाई दी और अगले ही पल पूरे इलाके में धूल और मलबे का विशाल गुबार छा गया।

विज्ञापन
Delhi Building Collapse: Screams and cries were drowned in the blast.
साकेत में हादसा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सैदुल्लाजाब में शनिवार रात इमारत गिरने का हादसा इतना भयावह था कि शुरुआती कुछ मिनटों तक लोगों को समझ ही नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पहले जोरदार धमाके जैसी आवाज सुनाई दी और अगले ही पल पूरे इलाके में धूल और मलबे का विशाल गुबार छा गया। कुछ क्षणों के लिए लोगों को लगा कि कहीं आग लग गई है या कोई बड़ा विस्फोट हुआ है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक धमाके की आवाज में मलबे में दबे लोगों की चीख पुकार तो कुछ देर के लिए सुनाई ही नहीं पड़ी। 

विज्ञापन


घटनास्थल के पास रहने वाले सुरेश ने बताया कि धमाके के कुछ सेकंड बाद ही चारों ओर घना धूल का बादल फैल गया। दृश्यता लगभग खत्म हो गई थी और लोग घबराकर घरों से बाहर निकल आए। उनके अनुसार करीब आधे घंटे तक धूल का गुबार पूरे इलाके में छाया रहा। जब धूल छंटी तो सामने का दृश्य देखकर लोग सन्न रह गए। एक पूरी इमारत भरभराकर जमीन पर आ चुकी थी और उसके नीचे कई लोगों के दबे होने की आशंका थी। स्थानीय निवासियों का दावा है कि दमकल और अन्य बचाव दलों के पहुंचने से पहले तीन से चार लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया था।   
विज्ञापन


रात गहराने के साथ उम्मीद और चिंता के बीच बचाव अभियान लगातार जारी रहा। मौके पर पहुंचे डॉग स्कॉएड से भी एनडीआरएफ को काफी मदद मिली। जवानों का कहना है कि मलबा सावधानी से हटाया जा रहा है ताकि अंदर मौजूद लोगों को सुरक्षित बचाया जा सके। अंदर दबे लोगों की संख्या के बारे में कोई अधिकारी कुछ बोलने को तैयार नहीं है। हालांकि मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो 30 से चार मजदूर अंदर दबे हो सकते हैं। क्योंकि सातवीं मंजिल के लिए लिंटर डालने का काम चल रहा था। 
विज्ञापन
विज्ञापन


प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जब राहत एवं बचाव टीम पहुंची तो धूल के गुबार के बीच भारी मलबे को देखकर उन्हें समझ में नहीं आया कि बचाव अभियान कहां से शुरू करें । स्थानीय लोगों को आगे जुटा देख उन्हें मौके से हटाया गया और राहत कार्य शुरू हुआ। मौके पर डाग स्क्वायड बुला लिया गया है ताकि मलबे में दबे लोगों की तलाश और आसान हो सके। 
रात तीन बजे के करीब भी बिना थके हुए एनडीआरएफ और पुलिस की टीम बचाव अभियान में जुटी हुईं थीं। 

कैंटीन भी चपेट में आई, कई मेडिकल विद्यार्थियों के दबने की आशंका 
हादसे में घायल 25 वर्षीय छात्रा नीलम के पिता बलवंत यादव ने बताया कि उनकी बेटी इमारत के पाश स्थित कैंटीन में थी जब इमारत गिरी। नीलम हाल ही में विदेश से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करके लौटी थी और साकेत स्थित अराइज मेडिकल एकेडमी में स्नातकोत्तर प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही थी। उन्होंने बताया कि हादसे वक्त कैंटीन में 30-35 छात्र-छात्राएं थीं। इनमें से ज्यादातर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी का पैर टूट गया है। स्थानीय निवासी रविंद्र सिंह ने बताया कि इमारत का निर्माण चार से पांच साल पहले ही हुआ था।

मोबाइल फोन की रोशनी बनी सहारा
हादसे के बाद घटनास्थल की बिजली बाधित हो गई। अंधेरे के बीच स्थानीय लोगों ने मोबाइल फोन की रोशनी के सहारे राहत कार्य शुरू किया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दो दर्जन से अधिक लोग मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाकर मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुट गए। शुरुआती दौर में मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने भी मोबाइल की रोशनी का उपयोग करते हुए राहत कार्य में सहयोग किया।

दहशत में लोग
इमारत गिरने के साथ ही आसपास के इलाके में जोरदार धमाके जैसी आवाज सुनाई दी, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कुछ ही क्षणों में पूरे क्षेत्र में धूल और मलबे का गुबार फैल गया। स्थानीय निवासियों के अनुसार, इमारत के एक हिस्से में निर्माण कार्य चल रहा था।

घटना बेहद दुखद
साकेत मेट्रो स्टेशन के निकट इमारत गिरने की घटना बेहद दुखद और चिंताजनक है। एनडीआरएफ, दिल्ली अग्निशमन सेवा, दिल्ली पुलिस, डीडीएमए, एमसीडी, कैट्स और सिविल डिफेंस की टीमें युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हुई हैं। मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए सभी एजेंसियां समन्वय के साथ काम कर रही हैं। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। नागरिकों की सुरक्षा और कल्याण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।
- रेखा गुप्ता, मुख्यमंत्री, दिल्ली

सैदुल्लाजाब में जेलदार की है प्लाटिंग 
नाम नहीं बताने की शर्त पर स्थानीय लोगों ने बताया कि सैदुल्लाजाब में आधे से ज्यादा प्लाट भवन मालिक जेलदार के काटे हुए हैं। दबी जुबान पर कुछ लोगों का कहना है रसूखदार होने की वजह से सिस्टम के लोग भी इस ओर ध्यान नहीं देते हैं। स्थानीय लोग भी चुप रहते हैं और कोई कुछ नहीं बोलता है। जनप्रतिनिधि भी उसके प्रभाव में हैं। 


मजदूर दबे, किसी को नहीं परवाह 
मौके पर हर कोई दबे हुए छात्रों की बात कर रहा है लेकिन जो मजदूर और मिस्त्री यहां काम कर रहे थे उनके बारे में कोई कुछ नहीं बोल रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि मलबे में दबे लोग जो अब तक रेस्क्यू किए गए हैं, वे लोग हैं जो अक्सर यहां पराठे खाने के लिए आते हैं। यहां पराठे खिलाने वाली आंटी के बारे में भी कुछ पता नहीं चला है। आशंका है कि वह भी मलबे में दबी हुई हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed