दिल्ली: बजट में है 'बेसिक नीड्स एप्रोच टू डेवलपमेंट' की झलक, शिक्षा क्षेत्र में दूर की सोच रही है सरकार
दिल्ली सरकार ने सोमवार को बजट पेश किया। इसमें शिक्षा क्षेत्र की दूरदर्शिता के साथ-साथ बेसिक नीड्स एप्रोच टू डेवलपमेंट भी साफ झलक रही है। इस सिद्धांत में विषमता नहीं रहती है और इसके तहत मूलभूत सुविधा सरकार ही देती है। तभी सबका साथ सबका विकास संभव हो पाता है।
इस बार के बजट में प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी हुई है। सामाजिक विकास पर भी खर्च कर सरकार समावेशी विकास की तरफ अग्रसर है। दिल्ली सरकार के पास तीन बड़े विभाग हैं, जिनके सहारे दिल्ली की बेहतरी के लिए काम किया जा सकता है।
इसमें से शिक्षा व स्वास्थ्य में तो दिल्ली सरकार का प्रदर्शन औसत से बेहतर रहा है, जबकि परिवहन में सरकार अपने आउटकम बजट में खुद भी मान रही है कि प्रदर्शन औसत से खराब रहा है। लगातार छठे साल शिक्षा क्षेत्र में बजट आवंटन सबसे ज्यादा रखकर सरकार ने दूर की सोची है।
खास बात यह है कि पीसा टेस्ट में दिल्ली सरकार के शामिल करने का विजन दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था को वैश्विक मानकों पर स्थापित करने में मददगार साबित होगा। हर तीसरे साल 15 साल से ऊपर के बच्चों के शिक्षा के स्तर के वैश्विक सर्वे से यह पता लगेगा कि दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था दुनिया के दूसरे शहरों के शैक्षिक मापदंडों पर कितनी खरी उतरती है।
हालांकि, डिजिटलाइजेशन को शिक्षा में बढ़ावा देने की कोशिश दिल्ली सरकार ने की है। फिर भी शिक्षकों की भर्ती की दिशा में सरकार को सोचना होगा। स्वास्थ्य के क्षेत्र में संजीदगी की जरूरत है। आयुष्मान भारत योजना को दिल्ली में लागू करना बेहतर कदम है।
क्षमता निर्माण व शोध की दिशा में गंभीर प्रयास करने की आवश्यकता है। इसके लिए दिल्ली सरकार को केंद्र सरकार के साथ कदमताल करना होगा। परिवहन क्षेत्र में भी बेहतर करने पर सरकार का जोर होना चाहिए। सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को बेहतर करने की आवश्यकता है।
सरकार ने महिलाओं को मुफ्त सफर की सुविधा देकर बाजार तक पहुंच बढ़ाई है। यह अर्थ व्यवस्था के लिए बेहतर साबित होगा। सरकार ने अपने आटकम बजट में खुद माना है कि परिवहन विभाग के 53 प्रतिशत नाजुक संकेतक ट्रैक पर नहीं है। साफ है कि परिवहन के क्षेत्र में दिल्ली सरकार को ऊंची छलांग लगानी पड़ेगी।
खासतौर से इसलिए कि दिल्ली वायु प्रदूषण की मार कई वर्षों से झेलती रही है। इस बजट में सरकार ने नई बसें तो खरीदने की बात की है। दिल्ली की सड़क पर 11 हजार बसों की डिमांड जल्द पूरी करनी होगी। लास्ट माइल कनेक्टिविटी के लिए भी बजट में ठोस विजन नहीं दिख रहा है।
(अर्थशास्त्र के विशेषज्ञ रामेश्वर चेचानी से संवाददाता नवनीत शरण की बातचीत के आधार पर)