Delhi : आखिर आप को कांग्रेस की बी टीम साबित करने में कामयाब रही भाजपा, भ्रष्टाचार के भंवर में फंसे दोनों दल
आप को कांग्रेस की बी टीम साबित करने में भाजपा कामयाब रही और दोनों दलों को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेर लिया। इसके अलावा भाजपा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आभा मंडल पर चोट कर रही है।
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मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी ने भाजपा की राजनीति व रणनीति को बल दे दिया है। आप को कांग्रेस की बी टीम साबित करने में भाजपा कामयाब रही और दोनों दलों को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेर लिया। इसके अलावा भाजपा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आभा मंडल पर चोट कर रही है। सोशल मीडिया पर भाजपा ने लगातार दोनों दलों के गठबंधन पर कई पोस्ट किए हैं जिसमें दोनों पार्टियां एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप मढ़ रही है। उस पत्र को भी पोस्ट किया जिसमें कथित शराब घोटाले की शिकायत तत्कालीन पुलिस कमिश्नर राकेश अस्थाना से कांग्रेस की तरफ से ही हुई थी। दरअसल, भ्रष्टाचार के विरोध में उपजी आम आदमी पार्टी को भ्रष्टाचार के लपेटे में लेने की शुरू से रणनीति रही थी। हालांकि, भाजपा के लिए आगामी विधानसभा चुनाव तक बरकरार रखने की चुनौती भी कम नहीं होगी।
केजरीवाल की गिरफ्तारी से सियासी गलियारे में चर्चा आम है भ्रष्टाचार के मुद्दे पर भाजपा ने अपने दोनों मुख्य विपक्षी पार्टी को घेर लिया है। अदालत अगर उन्हें मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन, संजय सिंह की तरह ही न्यायिक हिरासत में भेजती है तो फिर उनकी छवि धूमिल होगी। ऐसे में जो फ्लोटिंग वोटर है वह भाजपा की झोली में जा सकते हैं। इस मुद्दे को केवल लोकसभा चुनाव के दौरान ही नहीं, बल्कि आगामी विधानसभा चुनाव तक भाजपा भुनाएगी। सियासत के जानकारों की माने तो दिल्ली की सत्ता तक पहुंचने के लिए भाजपा को इसी राह पर आगे बढ़ेगी। वहीं, कांग्रेस के सामने गठबंधन की मजबूरी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता भी आम आदमी पार्टी के साथ खड़े है। भाजपा का कहना है कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के प्रत्याशियों से जनता सवाल पूछ रही है कि जब एक दूसरे को भला-बुरा कहकर ही सत्ता हथियाना था तो फिर अब साथ-साथ आने का मकसद क्या है।
भाजपा दबाव की रणनीति जारी रखेगी
भाजपा अब विशेष रणनीति के तहत दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से इस्तीफा देने का दबाव बनाएगी। धरना-प्रदर्शन कर आप को जहां घेरेगी वहीं दिल्ली के उपराज्यपाल से भी मांग करेगी कि मुख्यमंत्री से इस्तीफा मांगे। उन्हें नैतिक आधार पर मुख्यमंत्री बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। इस नीति में भाजपा कामयाब भी रही है। सत्येंद्र जैन और मनीष सिसोदिया काफी दिनों तक जेल में रहने के दौरान मंत्री पद पर बने रहे थे। राजनीतिक दबाव पड़ने पर ही दोनों नेताओं का मंत्री पद लिया गया और आतिशी व सौरभ भारद्वाज को दिल्ली कैबिनेट में शामिल किया गया था।
लोकसभा से विधानसभा चुनाव तक पर संकट
ईडी की गिरफ्तारी के बाद आम आदमी पार्टी के सामने कई चुनौतियां खड़ी हो गई है। लोकसभा से विधानसभा चुनाव तक संकट है। फिलहाल पूरे चुनावी कैंपेन पर ग्रहण लग सकता है। रणनीति से लेकर प्रचार की भूमिका में उसके सबसे बड़े स्टार प्रचारक आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ही है। सेकेंड लाइनर नेता मनीष सिसोदिया व सत्येंद्र जैन पहले से ही जेल में है। लोकसभा चुनाव के कुछ ही महीने बाद दिल्ली विधानसभा चुनाव भी होना है। इसकी तैयारियों पर भी ग्रहण लग सकता है।
राजनीतिक जानकारों की माने तो मनीष सिसोदिया को एक साल से जमानत नहीं मिली है। कथित शराब घोटाले में अगर ऐसा ही केजरीवाल के साथ हुआ तो संभव है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव से भी उन्हें दूर रहना पड़ सकता है। वर्तमान दिल्ली की सरकार पर भी अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे है। अगर गिरफ्तार होते हैं तो जेल से ही सरकार चलाना बेहद कठिन है। केंद्र शासित प्रदेश होने की स्थिति में दिल्ली के उपराज्यपाल भी राष्ट्रपति से सलाह-मशवरा ले सकते है।