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दिल्ली में चुनावी शंखनाद : पूर्वांचली, पंजाबी, जाट व वैश्य मतदाताओं के हाथ होगी सत्ता की चाबी

Tue, 07 Jan 2020 06:24 AM IST
Vikas Kumar परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 07 Jan 2020 06:24 AM IST
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delhi assembly election 81 percent Hindus of the population in Delhi 10 seats Muslim majority
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई

दिल्ली में चुनावी शंखनाद के साथ ही सियासी गहमागहमी शुरू हो गई है। सत्ता की कुर्सी तक पहुंचने के लिए सभी राजनैतिक पार्टियां अपनी रणनीति तैयार कर चुकी है। इसी तैयारी का अहम हिस्सा है मतदाताओं का जातीय समीकरण। पिछले दो विधानसभा चुनावों के परिणामों पर गौर करें तो पता चलता है कि पूर्वांचली, पंजाबी, वैश्य और जाट मतदाताओं के हाथ सत्ता की चाबी है। ऐसे में इस बार भी सत्तासीन आप, भाजपा और कांग्रेस इन्हीं जातियों को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। 

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 वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक दिल्ली की आबादी 1,67,53,235 थी, जोकि अब 2.01 करोड़ के आसपास पहुंच चुकी है। चुनाव आयोग के ही अनुसार दिल्ली के 70 विधानसभा क्षेत्रों में करीब 1.47 करोड़ मतदाता हैं। राजनैतिक पार्टियों के मुताबिक इनमें 81 फीसदी हिंदू, 12 फीसदी मुस्लिम, 5 फीसदी सिख और करीबन एक-एक फीसदी ईसाई-जैन मतदाता हैं। 70 में से 10 विधानसभा सीटों को मुस्लिम बहुल माना जाता है, जिनमें बल्लीमारान, चांदनी चौक, मटिया महल, बाबरपुर, मुस्तफाबाद, सीलमपुर, ओखला, त्रिलोकपुरी इत्यादि शामिल हैं। 
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पार्टियों के पास मौजूदा जातीय समीकरणों के अनुसार दिल्ली में करीब 25 फीसदी से ज्यादा मतदाता पूर्वांचली हैं। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के मूल निवासी मतदाता कई विधानसभा क्षेत्रों में बंटे हुए हैं, जबकि करीब 35 फीसदी आबादी पंजाबी समाज की है। इनमें 10 फीसदी से ज्यादा पंजाबी खत्री शामिल हैं। करीब 8-8 फीसदी आबादी जाटों व वैश्य की है। दिल्ली के 364 में से 225 गांव जाट बहुल हैं और विधानसभा चुनावों में करीब 20 फीसदी हिस्सेदारी जाट मतदाताओं की रहती है। 
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पूर्वांचली बहुल सीटें 
किराड़ी (47 फीसदी), बुराड़ी (44 फीसदी), उत्तम नगर (40-42 फीसदी), संगम विहार (40-42 फीसदी), बादली (38 फीसदी), गोकलपुर (36 फीसदी), मटियाला (36 फीसदी), द्वारका (34-36 फीसदी) और नांगलोई में करीब 32 फीसदी लोग पूर्वांचल के हैं। इनके अलावा करावल नगर, विकासपुरी, सीमापुरी जैसे इलाकों में पूर्वांचलियों की बड़ी आबादी देखने को मिलती है।

दलित बहुल सीटें 
करोल बाग (38), पटेल नगर (23), मोती नगर (11), दिल्ली कैंट (16), राजेंद्र नगर (22), कस्तूरबा नगर (11), मालवीय नगर (10), आरके पुरम (15) और ग्रेटर कैलाश में 10 फीसदी आबादी दलित की है। इनके अलावा उत्तर पश्चिमी दिल्ली लोकसभा क्षेत्र के सात विधानसभा क्षेत्रों में दलित मतदाता बड़ी संख्या में हैं। 70 में से 12 विधानसभा सीटें आरक्षित हैं।  


पंजाबी बहुल सीटें  
विकासपुरी, राजौरी गार्डन, हरी नगर, तिलक नगर, जनकपुरी, मोती नगर,राजेंद्र नगर, ग्रेटर कैलाश, जंगपुरा, गांधी नगर, मॉडल टाऊन, लक्ष्मी नगर, रोहिणी। 

मजबूत स्थिति में हैं उत्तराखंड के वोटर
दिल्ली की आबादी में बड़ी हिस्सेदारी उत्तराखंड से आए लोगों की भी है। अनुमान के मुताबिक उत्तराखंड के करीब 35 लाख लोग दिल्ली में रहते हैं। इसलिए बीते कुछ चुनावों से लगभग सभी पार्टियों में उत्तराखंड के सियासी चेहरे भी दिखाई देते हैं। दिल्ली में करीब 8 फीसदी मतदाता वैश्य समाज से आते हैं। जबकि 7 फीसदी गुर्जर, 5 फीसदी सिख और 12 फीसदी मतदाता मुस्लिम समाज से हैं। दिल्ली में महिला मतदाताओं पर सबकी नजरें टिकी हैं। करीब 49 फीसदी आबादी महिलाओं की है। इनके अलावा करीब 1.25 लाख ऑटो रिक्शा, झुग्गी, अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले मतदाता भी हैं। दिल्ली की 49 फीसदी आबादी इन्हीं इलाकों में रहती है। 

2015 विधानसभा चुनाव पर नजर
कुल वोट : 87,78,269
कुल सीट : 70
आप :      67
भाजपा :  03
कांग्रेस :  शून्य

किसको फायदा-किसको नुकसान
-39 सीटों के साथ आप को मिली थी बड़ी बढ़त
-28 सीटें भाजपा के पाले से खिसकीं, 8 कांग्रेस की भी।
-कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला था।

किस पार्टी को कितने वोट मिले
आप :     48,78,397 (54.3 फीसदी)
भाजपा :  28,90,485 (32.2 फीसदी)
कांग्रेस :   8,66,814 (9.7 फीसदी) 
अन्य का प्रदर्शन
बसपा : 11,70,093
लोकदल : 54,464
शिरोमणि अकाली : 44,880
निर्दलीय : 47,623
(नोट :सभी आंकड़ें चुनाव आयोग के अनुसार)

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