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फ्लाइट में डॉक्टर बने भगवान: 40 हजार फीट की ऊंचाई पर बच्ची को दो बार आया अटैक, थमने लगी थीं सांसें फिर...
Mon, 28 Aug 2023 12:50 PM IST
श्याम जी.
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: श्याम जी.
Updated Mon, 28 Aug 2023 12:50 PM IST
सार
बेंगलुरु से ओपन हार्ट सर्जरी करवाकर दिल्ली लौट बच्ची को फ्लाइट में दो बार अटैक आया। इस दौरान बेंगलुरु में एक सम्मेलन से लौट रहे एम्स के पांच डॉक्टरों ने उसे बचा लिया। डॉक्टरों ने फ्लाइट के पीछे के हिस्से में ट्रॉली के ऊपर बच्ची का उपचार किया।
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डॉक्टर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बेंगलुरु से ओपन हार्ट सर्जरी करवाकर करीब 21 दिन बाद दिल्ली लौट रही दो साल की बच्ची की हालत फ्लाइट में बिगड़ गई। 40 हजार फीट की ऊंचाई पर विस्तारा एयरलाइंस की फ्लाइट में अचानक उसका शरीर नीला पड़ने लगा। बच्ची बेहोश थी, धड़कन नहीं थी। सांसें भी थमने लगी थीं।
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उसी वक्त क्रू मेंबर ने यात्रियों से मदद मांगी। खुशनसीबी से उसी फ्लाइट में एम्स के पांच सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर भी मौजूद थे। वह बेंगलुरु से ही एक सम्मेलन में शिरकत कर लौट रहे थे। इमरजेंसी कॉल सुनकर पांचों तुरंत बच्ची के पास पहुंचे।
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बच्ची को देख डॉक्टर भी परेशान हो उठे, लेकिन तुरंत ही अपने अस्पताल एम्स के इमरजेंसी प्रोटोकॉल के तहत सबने एक डॉक्टर को लीडर बनाया और उसकी अगुवाई में इलाज शुरू कर दिया, लेकिन फ्लाइट में बच्ची की बीमारी के हिसाब से कोई संसाधन नहीं थे।
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डॉक्टरों के लिए यह बड़ी चुनौती थी, तब उन्होंने इमरजेंसी ऑक्सीजन मास्क को निकाला, लेकिन वह काफी बढ़ा था। इसे काटकर बच्ची के अनुरूप बनाया। दवा देने के लिए कैनुला लगाने की जरूरत पड़ी। फ्लाइट में उपलब्ध संसाधन की मदद से बच्ची को कैनूला लगाया गया, जिससे उसे दवा दी गई। बच्ची को सीपीआर की भी जरूरत पड़ी।
इस चुनौती को भी डॉक्टरों ने पार किया। करीब 45 मिनट तक चले इस ऑपरेशन के बाद बच्ची की हालत में कुछ सुधार हुआ। उसके शरीर का रंग भी बदलकर गुलाबी हो गया। हालांकि, इस बीच बच्ची को दो बार हार्ट अटैक भी आया, जिसे शॉक देकर रिवाइव किया।
इसके बाद डॉक्टरों ने क्रू मेंबर को फ्लाइट नीचे उतारने के लिए कहा। उस वक्त क्रू मेंबर के पास नागपुर व मुंबई में इमरजेंसी लैंडिंग का विकल्प था। इजाजत मिलने के बाद फ्लाइट नागपुर उतारी गई। इसी बीच डॉक्टरों ने जमीन पर तैनात मेडिकल ऑफिसर से संपर्क साध लिया था। फ्लाइट उतरने से पहले मौके पर बाल रोग विशेषज्ञ एंबुलेंस में सभी सुविधाओं के साथ मौजूद थे।
जमीन पर आते ही बच्ची को तुरंत एंबुलेंस में ले जाया गया, जहां एम्स के डॉक्टरों ने स्थानीय डॉक्टरों के साथ मिलकर इलाज किया। फिलहाल, बच्ची नागपुर के अस्पताल में भर्ती है, जबकि फ्लाइट दिल्ली के लिए रवाना हो गई। बताया जा रहा है कि बच्ची का परिवार बांग्लादेश से उपचार करवाने आया था।
झटका न लगे, इसलिए खाने की ट्रॉली पर किया इलाज
हवाई जहाज को लैंड कराने के दौरान भी बच्ची को हार्ट अटैक आया था। ऐसे में उसे सीपीआर देने की जरूरत पड़ी थी। पहले बच्ची का एयर होस्टेस के टेबल के पास इलाज किया गया। झटका न लगे, इसलिए बाद में उसे खाने की ट्रॉली पर रखकर सीपीआर दी गई। फ्लाइट के उतरते समय भी डॉक्टर बच्ची को सीपीआर देते रहे।
हवाई जहाज को लैंड कराने के दौरान भी बच्ची को हार्ट अटैक आया था। ऐसे में उसे सीपीआर देने की जरूरत पड़ी थी। पहले बच्ची का एयर होस्टेस के टेबल के पास इलाज किया गया। झटका न लगे, इसलिए बाद में उसे खाने की ट्रॉली पर रखकर सीपीआर दी गई। फ्लाइट के उतरते समय भी डॉक्टर बच्ची को सीपीआर देते रहे।
डॉ. नवदीप कौर ने संभाला मोर्चा
इस टीम में एम्स से डॉ. नवदीप कौर (एनेस्थीसिया), डॉ. दमनदीप सिंह (कार्डियक रेडियोलॉजी), डॉ. ऋषभ जैन (पूर्व, रेडियोलॉजी), डॉ. ओइशिका (ओबीजी) और डॉ. अविचला टैक्सक (कार्डियक रेडियोलॉजी) शामिल हुए। डाॅ. कौर ने टीम लीडर की जिम्मेदारी संभाली। डॉ. दमनदीप ने बताया कि रविवार रात करीब नौ बजे बेंगलुरु से फ्लाइट टेकऑफ हुई थी। इसके करीब आधे घंटे बाद ही इमरजेंसी कॉल हुई।
इस टीम में एम्स से डॉ. नवदीप कौर (एनेस्थीसिया), डॉ. दमनदीप सिंह (कार्डियक रेडियोलॉजी), डॉ. ऋषभ जैन (पूर्व, रेडियोलॉजी), डॉ. ओइशिका (ओबीजी) और डॉ. अविचला टैक्सक (कार्डियक रेडियोलॉजी) शामिल हुए। डाॅ. कौर ने टीम लीडर की जिम्मेदारी संभाली। डॉ. दमनदीप ने बताया कि रविवार रात करीब नौ बजे बेंगलुरु से फ्लाइट टेकऑफ हुई थी। इसके करीब आधे घंटे बाद ही इमरजेंसी कॉल हुई।
हमने जाकर देखा कि छोटी बच्ची की हालत खराब है। उसमें न धड़कन थी, शरीर नीला हो गया, बेहोश थी। उसकी मां रो रही थी। हम बच्ची को फ्लाइट के पीछे के हिस्से में ले गए जहां उपचार किया। बच्ची सांस भी नहीं ले सकती थी जिस कारण वैकल्पिक तरीके से बच्ची को ऑक्सीजन देने की व्यवस्था की गई। उपचार के बाद रात करीब तीन बजे फ्लाइट दिल्ली पहुंची।