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Delhi : एसिड अटैक मामले में 11 साल बाद डॉक्टर को 12 साल सश्रम कारावास, अपराध में सह-आरोपी को इसलिए किया रिहा
Mon, 25 Aug 2025 02:08 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 25 Aug 2025 02:08 AM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
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तीस हजारी कोर्ट ने 2014 में एक महिला पर तेजाब फेंकने के जुर्म में एक डॉक्टर को 12 साल के कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि पीड़िता पौराणिक पक्षी फीनिक्स की तरह राख से उठी और भयावह घटना से उत्पन्न शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक आघात से लड़कर अपने जीवन का पुनर्निर्माण किया।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौम्या चौहान, दोषियों डॉ. अशोक यादव (42) और वैभव (32) के खिलाफ सजा पर बहस सुन रही थी। उन लोगों को महिला के चेहरे पर तेजाब फेंकने की आपराधिक साजिश रचने का दोषी ठहराया गया था। अदालत ने यादव को 12 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई, साथ ही पांच लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया, जो महिला को देय होगा। अदालत ने दोषी वैभव को यह देखते हुए रिहा कर दिया कि वह 25 दिसंबर, 2014 से 10 साल से ज्यादा की सजा काट चुका है।
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अदालत ने कहा कि दोषी अशोक यादव पूरी साजिश का मास्टरमाइंड है, जब पीड़िता ने उसके बार-बार शादी के प्रस्तावों को ठुकरा दिया और उसकी शादी कहीं और तय हो गई, तो दोषी ने उसका चेहरा बिगाड़कर उससे बदला लेने की सोची। उसके बाद यादव ने सह-आरोपी वैभव से संपर्क किया और महिला पर तेजाब फेंकने की योजना बनाई। संदेह से बचने के लिए यादव ने महिला का बैग लूटकर इसे डकैती का रंग देने का फैसला किया।
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अदालत ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एमबीबीएस की डिग्री भी दोषी की गहरी पैठ वाली पितृसत्तात्मक मानसिकता और मध्ययुगीन सोच को नहीं मिटा सकी। बदले की भावना में वह इतना अंधा हो गया था कि उसने चिकित्सा पेशेवरों की ली जाने वाली पवित्र शपथ, यानी परोपकार, अहिंसा और गोपनीयता का पालन करने की शपथ को तिलांजलि दी और एक निर्दोष जीवन को नष्ट करने की साजिश रचने लगा।