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दिल्ली: दो साल की उम्र में 45 किलो की हो गई थी बच्ची, बेरिएट्रिक सर्जरी से हुआ इलाज
Tue, 03 Aug 2021 06:19 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Tue, 03 Aug 2021 06:19 PM IST
सार
दिल्ली के मैक्स पटपड़गंज अस्पताल में यह ऑपरेशन हुआ है। अस्पताल का दावा है कि सर्जरी कराने वाली दुनिया की सबसे कम उम्र की और सबसे अधिक वजन वाली बच्ची है।
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फाइल फोटो
- फोटो : istock
विस्तार
एक गंभीर बीमारी के चलते शाहदरा की रहने वाली दो साल की बच्ची का वजन 45 किलो हो गया था। बच्ची की जान बचाने के लिए डॉक्टरों को बेरिएट्रिक सर्जरी (मोटापा कम करने वाला ऑपरेशन)करनी पड़ी। डॉक्टरों का कहना है कि बेरिएट्रिक सर्जरी के लिए कम से कम 12 से 15 वर्ष के बीच उम्र होनी चाहिए, हालांकि इस बच्ची के मामले में कोई और विकल्प नहीं था। ऐसे में बच्ची की जान बचाने के लिए यह सर्जरी की गई।
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दिल्ली के मैक्स पटपड़गंज अस्पताल में यह ऑपरेशन हुआ है। अस्पताल का दावा है कि सर्जरी कराने वाली दुनिया की सबसे कम उम्र की और सबसे अधिक वजन वाली बच्ची है। अस्पताल के बेरिएट्रिक एंड रोबोटिक सर्जरी के विभागाध्यक्ष डॉक्टर विवेक बिंदल ने बताया कि बच्ची जन्म के समय सामान्य थी और उसका वजन 2.5 किलोग्राम था।
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हालांकि, जन्म के तुरंत बाद उसका वजन तेजी से बढ़ने लगा और छह महीने में उसका वजन 14 किलोग्राम हो गया। अगले डेढ़ साल में उसका वजन तेजी से बढ़ता गया और 2 साल और 3 महीने में उसका वजन 45 किलोग्राम तक पहुंच गया।
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उसकी हालत इस हद तक बिगड़ गई कि उसे नींद के दौरान सांस लेने में बहुत परेशानी होने लगी और वह अपनी पीठ के बल सो नहीं पा रही थी। बच्ची की इस हालत को देखते हुए माता-पिता उसे अस्पताल लेकर आए। जहां बच्ची की विभिन्न जांच की गई और डॉक्टरों की टीम ने बेरिएट्रिक सर्जरी करने का फैसला किया।
डॉ. बिंदल ने कहा कि बच्चों में बेरिएट्रिक सर्जरी की निम्न आयु सीमा 12-15 वर्ष होती है लेकिन इस मामले में सर्जरी बहुत जरूरी थी। विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम बनाने के बाद बच्ची की लैप्रोस्कोपिक गैस्ट्रिक स्लीव सर्जरी की गई। इस तकनीक में पेट का एक हिस्सा काटकर उसका आकार छोटा कर दिया जाता है, जिससे व्यक्ति को भूख नहीं लगती। उसका पेट भरा ही रहता है क्योंकि पेट में जगह कम होती है और कम खाने की वजह से वजन नियंत्रण में रहने लगता है।
इस मामले में सबसे बड़ी चुनौती थी इतने छोटे बच्चे में इस तरह की प्रक्रिया के किसी भी सर्जरी का वीडियो उपलब्ध नहीं था। इसके अलावा जो उपकरण होते हैं वह भी वयस्कों के लिए ही डिजाइन किए गए होते हैं। हालांकि, विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम के साथ मिलकर इस ऑपरेशन को सफलतापूर्वक किया गया।
स्लीप एपनिया से भी पीड़ित थी बच्ची
अस्पताल के डॉक्टर डॉ. राजीव उत्तम ने कहा की बच्ची को गंभीर स्लीप एपनिया था(नींद के दौरान गले की मांसपेशियों का शिथिल हो जाना) जिसके कारण उसे पीडियाट्रिक आईसीयू केयर की आवश्यकता थी। लेकिन सौभाग्य से उसने सांस लेने में कोई तकलीफ प्रकट नहीं की और वह ऑपरेशन के बाद काफी सहज थी। सर्जरी के कुछ दिनों के भीतर ही उसका स्लीप एपनिया बेहतर हो गया और सर्जरी के केवल चार दिनों बाद ही उसे छुट्टी मिल गई। बच्ची की आवश्यकताओं का ध्यान रखते हुए धीरे-धीरे उसका वजन कम करने के लिए उसे एक विशेष आहार पर रखा गया है। उसके अगले साल तक वजन कम होने और एक सामान्य वयस्क के रूप में विकसित होने की उम्मीद है। क्लिनिकल टीम द्वारा उसकी कड़ी निगरानी की जाएगी। उसके पैरों में ताकत लाने में मदद करने के लिए उसपर विशेष ध्यान दिया गया है।