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केजरीवाल को राहत नहीं: सिंघवी के कड़े सवालों पर CBI का ऐसा जवाब, गिरफ्तारी की बताई वजह; जानें किसने क्या कहा

Wed, 17 Jul 2024 07:22 PM IST
अनुज कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अनुज कुमार Updated Wed, 17 Jul 2024 07:22 PM IST
सार

केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि सीबीआई द्वारा केजरीवाल की गिरफ्तारी एक 'बीमा गिरफ्तारी' है। सीबीआई ने इस गिरफ्तारी पर करारा जवाब दिया। कोर्ट रूम में आज दोनों पक्षों में तीखी बहस हुई।

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Decision reserved on Kejriwal plea seeking CBI arrest CBI answer to Singhvi questions in court room
अरविंद केजरीवाल की जमानत पर हुई सुनवाई - फोटो : एएनआई

विस्तार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा दायर उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया जिसमें आबकारी नीति मामले से संबंधित भ्रष्टाचार के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा उनकी गिरफ्तारी को चुनौती दी गई है। केजरीवाल ने अपनी गिरफ्तारी को अवैध बताया है। वहीं सीबीआई ने कहा कि पूरे साक्ष्य आने पर ही कानून के तहत गिरफ्तारी की। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने केजरीवाल की अंतरिम जमानत याचिका पर भी आदेश सुरक्षित रखा है।

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कोर्ट रूम में आज दोनों पक्षों में हुई बहस

ये एक बीमा गिरफ्तारी- केजरीवाल के वकील
केजरीवाल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि सीबीआई द्वारा केजरीवाल की गिरफ्तारी एक 'बीमा गिरफ्तारी' है जो कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत ईडी मामले के संबंध में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई अंतरिम जमानत के बाद की बात है। सिंघवी ने जोर देकर कहा कि सर्वोच्च न्यायालय की अंतरिम जमानत के बावजूद, केजरीवाल बीमा गिरफ्तारी के कारण फिर से शुरुआती स्थिति में आ गए हैं। उन्होंने कहा क्योंकि कुछ लोग चाहते हैं, चाहे किसी भी तरह से वह सलाखों के पीछे रहे। सिंघवी ने आगे कहा कि केजरीवाल के पक्ष में तीन रिहाई आदेश हैं और इसलिए सुझाव दिया कि सीबीआई की गिरफ्तारी एक बीमा गिरफ्तारी है।

सीबीआई के पास एक ही सबूत- अभिषेक मनु सिंघवी
उन्होंने बताया कि केजरीवाल को गिरफ्तार करने के लिए ट्रायल कोर्ट के समक्ष सीबीआई की याचिका में कोई प्रावधान नहीं बताया गया। जिसके तहत वे गिरफ्तारी करना चाहते थे, न ही केजरीवाल को कोई पूर्व सूचना दी गई थी। ट्रायल कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए सिंघवी ने कहा कि विवेक का प्रयोग केवल एक पैराग्राफ में है, केजरीवाल को सुनवाई का अवसर दिए बिना या कोई पूर्व सूचना दिए बिना। 

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केजरीवाल बीमार हैं- केजरीवाल के वकील
उन्होंने तर्क दिया कि सीबीआई के पास मामले में केजरीवाल से पूछताछ के दौरान और उनकी गिरफ्तारी के समय एक ही सबूत थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि केजरीवाल जमानत पाने के लिए ट्रिपल टेस्ट पास करते हैं यानी, सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने का कोई जोखिम नहीं है, उनके भागने का जोखिम नहीं है और वे जांच में सहयोग करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि केजरीवाल का ब्लड शुगर लेवल कम हो गया है।

केजरीवाल को नोटिस पर सीबीआई का जवाब
सीबीआई के वकील डीपी सिंह ने कहा कि बीमा गिरफ्तारी शब्द का इस्तेमाल उचित नहीं है। उन्होंने तर्क दिया कि अदालत के समक्ष कई याचिकाएं और आवेदन आए हैं और आज तक सीबीआई द्वारा किसी भी उल्लंघन के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की गई है। केजरीवाल को नोटिस न दिए जाने के मुद्दे पर सिंह ने तर्क दिया कि दिल्ली जेल नियम के अनुसार, अदालत की हिरासत में किसी व्यक्ति से पूछताछ करने के लिए अदालत की अनुमति लेना अनिवार्य है।

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केजरीवाल की गिरफ्तारी पर सीबीआई ने दिया जवाब
उन्होंने कहा कि सीबीआई को केजरीवाल को पहले से नोटिस देने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा 24 जून को मैंने उनसे पूछताछ की, लेकिन उन्हें गिरफ्तार नहीं किया अगर कोई बीमा गिरफ्तारी होती, तो मैं धारा 41 के तहत ही गिरफ्तारी के अपने अधिकार का इस्तेमाल कर सकता था। लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया।

केजरीवाल की भूमिका पहले स्पष्ट नहीं थी: सीबीआई
सिंह ने तर्क दिया कि सीबीआई को आरोपी को बुलाने का समय तय करने का अधिकार है। उन्होंने बताया कि केजरीवाल की भूमिका पहले स्पष्ट नहीं थी, क्योंकि आबकारी नीति आबकारी मंत्री के अधिकार क्षेत्र में आती थी। हालांकि, जब भी उनकी भागीदारी प्रासंगिक हुई, सीबीआई ने उन्हें बुलाया। उन्होंने कहा कि मामले में शामिल मुख्य लोगों अमनदीप ढल्ल, मनीष सिसोदिया और के कविता की जमानत हाईकोर्ट ने खारिज कर दी है। 

केजरीवाल जांच में सहयोग नहीं कर रहे: सीबीआई
सिंह ने कहा कि केजरीवाल पूछताछ के दौरान दूसरों पर आरोप लगाकर सीबीआई की जांच को पटरी से उतारने की कोशिश कर रहे हैं। सिंह ने तर्क दिया कि जमानत देने के लिए कोर्ट को चार्जशीट पर गौर करना होगा। उन्होंने कहा कि सीबीआई केजरीवाल के खिलाफ चार्जशीट तैयार करने के अंतिम चरण में है। सिंह ने तर्क दिया कि अगर जमानत पर पहले ट्रायल कोर्ट में बहस की जाए तो यह तर्कसंगत होगा। उन्होंने कहा वह कोर्ट पहली कोर्ट होनी चाहिए जिसके पास जमानत देने या न देने के लिए तर्कसंगत कारण होने चाहिए। मैं जमानत पर बहस नहीं कर रहा हूं क्योंकि मैं गिरफ्तारी कानूनी थी या नहीं, इस पर आपके फैसले का इंतजार करूंगा।

29 जुलाई को आएगा नियमित जमानत पर फैसला
केजरीवाल की गिरफ्तारी और अंतरिम जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर आदेश सुरक्षित रखते हुए जस्टिस कृष्णा ने मुख्यमंत्री की नियमित जमानत याचिका पर सुनवाई 29 जुलाई को तय की है। केजरीवाल ने ट्रायल कोर्ट का दरवाजा खटखटाए बिना जमानत के लिए सीधे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। वह कथित घोटाले से जुड़े भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में न्यायिक हिरासत में हैं। 

सुप्रीम कोर्ट पहले ही दे चुका है राहत
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में केजरीवाल को अंतरिम जमानत दे दी, जबकि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली उनकी याचिका को बड़ी बेंच को भेज दिया। 26 जून को अवकाशकालीन न्यायाधीश अमिताभ रावत ने मुख्यमंत्री को तीन दिन के लिए सीबीआई हिरासत में भेज दिया था, उन्होंने कहा कि इस समय गिरफ्तारी को अवैध नहीं कहा जा सकता। हालांकि, न्यायाधीश ने कहा था कि गिरफ्तारी अवैध नहीं है, लेकिन सीबीआई को अति उत्साही नहीं होना चाहिए।

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