दिल्ली में 10 लाख लोगों को मिलेगा दुकानों का मालिकाना हक, डीडीए ने की घोषणा
दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने दिल्ली के विभिन्न इलाकों में बनी दुकानों को फ्री होल्ड करने की घोषणा कर दी है। दिल्ली में विधानसभा चुनावों से ठीक पहले लिए गए इस फैसले से उन सभी कॉलोनियों में बनी दुकानों के मालिकों को मालिकाना हक देने की तैयारी है, जो पहले अपनी संपत्ति को फ्री होल्ड नहीं करवा पाते थे। दिल्ली में करीब 10 लाख दुकानदारों को इस सुविधा का लाभ मिलेगा।
डीडीए मुख्यालय में सोमवार को डीडीए बोर्ड के सदस्य विजेन्द्र गुप्ता ने बताया कि मास्टर प्लान 2021 के तहत 2538 सड़कों को व्यावसायिक मार्ग की श्रेणी में शामिल किया गया है। इस प्रावधान के तहत सड़कों पर आवासीय संपत्तियों में बनी दुकानों को कमर्शियल श्रेणी में शामिल किया जाएगा, जिससे इन दुकानों पर सीलिंग का खतरा टलेगा और दुकान के मालिक को कमर्शियल श्रेणी में मिलने वाले अन्य लाभ भी मिल सकेंगे।
उन्होंने कहा कि उन दुकानदारों को इस सुविधा का सबसे ज्यादा लाभ होगा, जिन्होंने बिल्डरों से दुकानें खरीदीं और दुकानों की रजिस्ट्री नहीं हो पाई, लेकिन अब इन दुकानों की फ्री होल्ड रजिस्ट्री का रास्ता साफ हो गया है। ऐसा होने से एक जमीन पर बनीं 10 दुकानों के मालिक अपनी-अपनी दुकान की अलग रजिस्ट्री करवा सकेंगे। ऐसी संपत्तियों की रजिस्ट्री करवाने के लिए 16 दिसंबर 2019 से डीडीए की विंडो खोली जाएगी।
दुकानों को फ्री होल्ड करने की नीति व्यावसायिक सड़कों, मिक्स लैंड यूज में मौजूद व्यावसायिक इकाइयों और दुकानों को कवर करेगी। मास्टर प्लान 2021 के तहत इन्हें छूट पहले ही दी जा चुकी है, लेकिन इस श्रेणी में आने वाले दुकानदारों के पास अपनी दुकानों का मालिकाना हक नहीं था। यह संपत्तियां दिल्ली अपार्टमेंट अधिनियम 1986 के अनुसार अपार्टमेंट की परिभाषा में आती हैं।
हालांकि, फिलहाल दिल्ली के 351 मार्ग ऐसे हैं जिन्हें दिल्ली सरकार की ओर से मिक्स लैंड यूज के तहत अधिसूचित नहीं किया गया है, जिस कारण यह नीति इन मार्गों पर आने वाली दुकानों पर लागू नहीं होगी।
संपत्तियां फ्री होल्ड होने से ये होंगे लाभ
इस श्रेणी के तहत फ्री होल्ड के दायरे में आने वाली दुकानों के मालिक/यूनिट धारक अब डीडीए से अपने पक्ष में अपार्टमेंट डीड प्राप्त कर सकते हैं। इसके आधार पर उन्हें पट्टेदार (स्वामीत्व) के रूप में मान्यता दी जाएगी। इसके साथ ही यूनिट धारकों/दुकानदारों को अपनी यूनिट फ्री होल्ड करने के लिए बिल्डर/डेवलपर की दया पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
इसके साथ ही दुकानदारों को अपनी संपत्ति को फ्री होल्ड करवाने के लिए बिल्डरों द्वारा दी जाने वाली एनओसी के लिए के चक्कर काटने पड़ते थे, लेकिन अब यह प्रक्रिया पूरी तरह डीडीए के हाथों में होगी और लोग बिना किसी परेशानी के अपनी संपत्ति को फ्री होल्ड करवाने के आवेदन कर सकेंगे।
अभी तक दुकानदारों को बिल्डरों अपनी संपत्ति का फ्री होल्ड कराने के लिए बिल्डर द्वारा दिए जाने वाले अनापत्ति पत्र (एनओसी) पर निर्भर रहना पड़ता था। डीडीए के इस आदेश के बाद एक समय सीमा तय की जाएगी, इसके भीतर अगर बिल्डर की ओर से एनओसी नहीं दिया जाता है तो बिना बिल्डर की एनओसी के डीडीए की ओर फ्री होल्ड करने की प्रक्रिया को शुरू कर दिया जाएगा।
बिल्डर दुकानदारों से नहीं ले सकेंगे ग्राउंड रेंट
दुकानें फ्री होल्ड ना होने की स्थिति में बिल्डर दुकानदारों से संपत्ति का ढाई प्रतिशत ग्राउंड रेंट लेते थे। डीडीए के मुताबिक, बिल्डर दुकानदारों से ग्राउंड रेंट लेकर डीडीए के पास जमा नहीं करवाते थे, लेकिन अब दुकानें फ्री होल्ड होने के बाद बिल्डर ग्राउंड रेंट वसूल नहीं कर सकेंगे। इसके साथ ही इस नीति से उन दुकानदारों को भी लाभ मिलेगा, जिनकी दुकानों की लीज खत्म हो चुकी हैं।
डीडीए ऐसे दुकानदारों को अपने पुराने दस्तावेज प्रस्तुत करने के लिए कहेगा, जिनके आधार पर मामूली शुल्क लेकर लोगों की लीज को बहाल कर दिया जाएगा। दुकान मालिक अपनी संपत्ति के आधार पर विभिन्न प्रकार के ऋण भी लेने के हकदार हो जाएंगे।
ऐसे होगा फ्री होल्ड संपत्ति के लिए आवेदन
इस नीति के तहत दुकानों को फ्री होल्ड करवाने के लिए आवेदक को प्री-मेच्योर बांड के साथ डीडीए द्वारा जारी एक फार्म भरना होगा। इसके साथ ही एक शपथ पत्र भी देना होगा कि आवेदनकर्ता अपनी संपत्ति पर सभी पुराना बकाया समेत मौजूदा शुल्क देने को तैयार है। इस बकाया राशि का भुगतान करने पर, आवेदक को उसकी संपत्ति की अपार्टमेंट डीड मिल जाएगी।